बिजनौर में डीएम कार्यालय में वकीलों से विवाद, सैकड़ों अधिवक्ताओं ने धरना देकर की तबादले की मांग
रिपोर्ट- ताबिश मिर्जा
बिजनौर, उत्तर प्रदेश। बिजनौर में जिलाधिकारी कार्यालय में अधिवक्ताओं की एंट्री को लेकर विवाद खड़ा हो गया। जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह पर दुर्व्यवहार करने और पीड़ित को लेकर कार्यालय पहुंचे अधिवक्ताओं को बाहर निकालने का आरोप लगाते हुए वकीलों ने जमकर नाराजगी जताई। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि सैकड़ों अधिवक्ता जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में धरने पर बैठ गए। उन्होंने जिलाधिकारी के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए उनके स्थानांतरण की मांग की। मिली जानकारी के अनुसार, एक पीड़ित व्यक्ति को लेकर कुछ अधिवक्ता अपनी बात रखने के लिए जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह के कार्यालय पहुंचे थे। इसी दौरान कार्यालय में प्रवेश को लेकर विवाद हो गया। अधिवक्ताओं का आरोप है कि जिलाधिकारी ने उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया और उन्हें कार्यालय से बाहर जाने के लिए कह दिया। इस घटना से नाराज वकीलों ने इसे अधिवक्ताओं के सम्मान से जुड़ा मामला बताया।
अधिवक्ताओं ने डीएम के व्यवहार पर जताई नाराजगी
घटना के बाद अधिवक्ताओं में काफी आक्रोश देखने को मिला। नाराज वकीलों ने जिलाधिकारी के रवैये को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। कुछ अधिवक्ताओं ने गुस्से में जिलाधिकारी को राजा और तानाशाह तक कह दिया। इस दौरान विरोध प्रदर्शन कर रहे कुछ लोगों की ओर से आपत्तिजनक शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया। अधिवक्ताओं का कहना था कि यदि कोई पीड़ित व्यक्ति अपनी समस्या लेकर प्रशासनिक अधिकारी के पास पहुंचता है, तो उसकी बात सुनना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। ऐसे में पीड़ित के साथ पहुंचे अधिवक्ताओं को कार्यालय से बाहर निकालने का कथित व्यवहार उचित नहीं है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और आम नागरिकों के अधिकारों से जोड़ते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।
सैकड़ों अधिवक्ता धरने पर बैठे, स्थानांतरण की मांग
विवाद बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में अधिवक्ता जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में एकत्र हो गए। इसके बाद उन्होंने धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह के स्थानांतरण की मांग उठाई। उनका कहना था कि प्रशासनिक अधिकारियों को जनता और उनके प्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए।
वहीं, इस घटनाक्रम के चलते जिलाधिकारी कार्यालय में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई। अधिवक्ताओं की बढ़ती संख्या और विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी सक्रिय हो गया।
एसपी केके बिश्नोई पुलिस बल के साथ पहुंचे
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिजनौर के पुलिस अधीक्षक केके बिश्नोई पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति को संभालने और प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं से बातचीत करने का प्रयास किया। इसके साथ ही जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने भी मामले को शांत कराने के लिए पहल की।
प्रशासनिक अधिकारियों की बातचीत और समझाने के प्रयासों के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई। काफी देर तक चले घटनाक्रम के बाद अधिवक्ता धरने से उठ गए। इस तरह जिलाधिकारी कार्यालय में बना तनाव समाप्त हुआ।
प्रशासनिक संवाद पर फिर उठे सवाल
बिजनौर में हुआ यह घटनाक्रम प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच बेहतर संवाद की आवश्यकता को सामने लाता है। अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं और आम लोगों की समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रहती है। ऐसे में प्रशासनिक कार्यालयों में संवाद और व्यवहार को लेकर संवेदनशीलता बनाए रखना जरूरी है।
हालांकि, पूरे मामले में अधिवक्ताओं की ओर से लगाए गए आरोपों और प्रशासन का पक्ष तथ्यों के आधार पर स्पष्ट होना अभी महत्वपूर्ण है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद धरना समाप्त हो गया है। लेकिन अधिवक्ताओं की ओर से उठाई गई स्थानांतरण की मांग के संबंध में आगे क्या निर्णय होता है, इस पर सभी की निगाहें रहेंगी।

