बहराइच के कतर्नियाघाट में इको टूरिज्म सत्र 2026-27 का किया गया शुभारंभ, पहली जंगल सफारी को दिखाई गई हरी झंडी
रिपोर्ट – महेश चंद्र गुप्ता
बहराइच: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित प्रसिद्ध कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में इको टूरिज्म सत्र 2026-2027 का आधिकारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर वन विभाग के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, स्थानीय ग्रामीणों और संरक्षण संगठनों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ नए पर्यटन सत्र की शुरुआत की गई। इसके बाद फीता काटकर और पहली जंगल सफारी को हरी झंडी दिखाकर पर्यटकों के लिए नए सत्र का आगाज किया गया।
इस आयोजन का उद्देश्य कतर्नियाघाट की प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है। साथ ही इको टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय समुदायों को रोजगार और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ हुआ सत्र का शुभारंभ
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में आयोजित उद्घाटन समारोह में बलहा के विधायक के प्रतिनिधि आलोक जिंदल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और पर्यटन से जुड़े विभिन्न हितधारक शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक पूजा-अर्चना से हुई। इस दौरान नए पर्यटन सत्र के सुरक्षित, स्वस्थ और सफल संचालन की कामना की गई।
इसके बाद विधिवत फीता काटकर इको टूरिज्म सत्र 2026-27 का उद्घाटन किया गया। समारोह का प्रमुख आकर्षण पहली जंगल सफारी रही, जिसे अतिथियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस पहल के साथ ही कतर्नियाघाट में आने वाले पर्यटकों के लिए नए पर्यटन सत्र की गतिविधियां शुरू हो गईं।
कतर्नियाघाट अपनी प्राकृतिक हरियाली, घने जंगलों, नदियों और विविध वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। यही वजह है कि यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीव फोटोग्राफरों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है।
थारू महिलाओं के हस्तशिल्प बने आकर्षण का केंद्र
उद्घाटन समारोह के दौरान थारू गांवों की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पादों का विशेष प्रदर्शन किया गया। इन महिलाओं ने पिछले कुछ महीनों में आयोजित आजीविका प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न प्रकार की हस्तशिल्प वस्तुएं तैयार करना सीखा है।
प्रशिक्षण के बाद महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को इस आयोजन में प्रदर्शित किया गया। इससे उनकी रचनात्मकता, पारंपरिक कला और स्थानीय हुनर को एक नया मंच मिला।
दरअसल, इको टूरिज्म का उद्देश्य केवल पर्यटकों को प्राकृतिक स्थलों की सैर कराना ही नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के अवसर उपलब्ध कराना भी है। ऐसे में थारू महिलाओं के हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन स्थानीय आजीविका को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
यदि इन उत्पादों को पर्यटकों के बीच बाजार उपलब्ध होता है, तो महिलाओं को अपने हुनर के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिल सकता है।
वन धन उत्पादों का भी किया गया प्रदर्शन
कार्यक्रम में स्थानीय समुदायों से जुड़े ‘वन धन’ उत्पादों का भी प्रदर्शन किया गया। इन उत्पादों के माध्यम से वन क्षेत्रों और आसपास के ग्रामीण समुदायों की पारंपरिक आजीविका तथा स्थानीय संसाधनों पर आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया।
वन धन से जुड़ी पहल का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उपलब्ध वन उत्पादों का बेहतर उपयोग, मूल्य संवर्धन और विपणन के अवसर विकसित करना है। इससे ग्रामीण समुदायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में सहायता मिल सकती है।
इसके अलावा, ऐसे आयोजनों से पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और ग्रामीण जीवनशैली को करीब से जानने का अवसर भी मिलता है। इस प्रकार प्राकृतिक पर्यटन के साथ स्थानीय कला और संस्कृति को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
स्कूली छात्रों और संरक्षण संगठनों ने लिया हिस्सा
इको टूरिज्म सत्र के उद्घाटन समारोह में स्कूली छात्रों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसके साथ ही वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत WWF और WTI जैसे संगठनों के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
इन संगठनों की सहभागिता से वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण जागरूकता के महत्व को रेखांकित किया गया। वहीं, विद्यार्थियों की भागीदारी से नई पीढ़ी को प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बनाने का संदेश भी मिला।
विशेषज्ञों और संरक्षण संगठनों की भागीदारी इको टूरिज्म को जिम्मेदार पर्यटन के रूप में विकसित करने के प्रयासों को मजबूती प्रदान कर सकती है।
वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण प्राकृतिक क्षेत्रों में शामिल है। यहां की जैव विविधता और प्राकृतिक वातावरण इसे इको टूरिज्म के लिहाज से विशेष पहचान देते हैं। हालांकि, ऐसे संवेदनशील वन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों का संचालन वन्यजीवों और पर्यावरण के संरक्षण को ध्यान में रखकर करना आवश्यक है।
इको टूरिज्म के माध्यम से पर्यटकों को प्रकृति के करीब लाने के साथ उन्हें वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा सकता है। इसके लिए पर्यटकों को जंगल सफारी के दौरान निर्धारित नियमों का पालन करना, वन्यजीवों से उचित दूरी बनाए रखना और जंगल में शांति बनाए रखना जरूरी है।
इसके साथ ही स्थानीय समुदायों की भागीदारी से पर्यटन का लाभ आसपास के गांवों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ पारंपरिक कला और संस्कृति को भी पहचान मिल सकती है।
नए पर्यटन सत्र से स्थानीय विकास को मिल सकती है गति
कतर्नियाघाट में इको टूरिज्म सत्र 2026-27 की शुरुआत वन्यजीव संरक्षण, प्रकृति पर्यटन और स्थानीय आजीविका को एक मंच पर लाने की दिशा में सकारात्मक पहल है। उद्घाटन समारोह में थारू महिलाओं के हस्तशिल्प, वन धन उत्पादों और स्कूली छात्रों की भागीदारी ने आयोजन को विशेष स्वरूप दिया।
कुल मिलाकर, नए पर्यटन सत्र से कतर्नियाघाट की प्राकृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रचारित करने और स्थानीय समुदायों को पर्यटन से जोड़ने के अवसर बढ़ सकते हैं। यह पहल तभी सार्थक होगी, जब पर्यटन गतिविधियों के साथ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

