बाँदा में दहेज और पुत्र न होने पर महिला को प्रताड़ित करने का आरोप, एसपी से लगाई न्याय की गुहार
रिपोर्ट – ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी
बाँदा, 30 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले में दहेज की मांग और पुत्र न होने को लेकर एक महिला को प्रताड़ित किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़िता नीलम श्रीवास ने अपने पति, सास-ससुर और अन्य ससुरालियों पर शारीरिक एवं मानसिक उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और दहेज की मांग करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संबंध में उन्होंने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपकर आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
पीड़िता की शिकायत के अनुसार, उनकी शादी 24 नवंबर 2017 को सुशील कुमार (पुत्र शिवशरण), निवासी बबेरू रोड, कालूकुआं, बाँदा के साथ हुई थी। विवाह के दौरान उनके पिता ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोने-चाँदी के आभूषण और आधुनिक घरेलू उपयोग का सामान दिया था। शिकायत में बताया गया है कि शादी के समय पति बेरोजगार थे, जबकि नीलम स्वयं नौकरी करती थीं। उस दौरान सास-ससुर की ओर से पति के पीसीएस चयन और साक्षात्कार की तैयारी के लिए आर्थिक सहयोग की बात भी कही गई थी।
हालांकि, पीड़िता का आरोप है कि शादी के शुरुआती दिनों के बाद परिस्थितियां बदलने लगीं। परिवार में दो बेटियों के जन्म के बाद से उन्हें लगातार ताने सुनने पड़े। इसके बाद जब पति की नौकरी लग गई तो ससुराल पक्ष का व्यवहार और अधिक बदल गया। नीलम का आरोप है कि पति और ससुराल के अन्य सदस्यों ने उनसे 25 लाख रुपये और एक कार की मांग शुरू कर दी। मांग पूरी नहीं होने पर उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया जाने लगा।
25 लाख रुपये और कार की मांग करने का आरोप
शिकायत में नीलम श्रीवास ने आरोप लगाया है कि पति और ससुराल के लोग दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित करते थे। उन्हें तलाक देने और दूसरी शादी करने की धमकियां भी दी जाती थीं। पीड़िता के मुताबिक, ससुराल में रहने वाले पति की मौसी के चार बच्चे भी उनके साथ दुर्व्यवहार करते थे और उन्हें मानसिक रूप से परेशान करते थे।
इसके अलावा, महिला ने आरोप लगाया कि उनके आभूषण और स्कूटी की चाबी तक छीन ली गई। घर में उनके कमरे की बिजली कटवा दी गई तथा रसोई में इस्तेमाल होने वाला जरूरी सामान भी छिपा दिया गया। इन परिस्थितियों के कारण उन्हें रोजमर्रा के घरेलू कामकाज और बच्चों की देखभाल में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
पुत्र न होने पर ताने देने और दूसरी शादी की धमकी का आरोप
पीड़िता की शिकायत का एक महत्वपूर्ण पहलू पुत्र न होने को लेकर कथित भेदभाव भी है। नीलम का आरोप है कि दो बेटियों को जन्म देने के बाद से उन्हें लगातार पुत्र न होने का ताना दिया जाता है। उनसे कहा जाता है कि वह अपने मायके चली जाएं, ताकि उनके पति की दूसरी शादी कर बेटे का जन्म कराया जा सके।
महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि पति उनके चरित्र पर सवाल उठाते हैं और आए दिन गाली-गलौज करते हुए मारपीट करते हैं। शिकायत के अनुसार, पति गुटखा और शराब का सेवन करते हैं। इस वजह से घर में अक्सर विवाद की स्थिति बनी रहती है।
नौकरी करने के बावजूद घर और बच्चों का खर्च उठाने का आरोप
नीलम श्रीवास ने अपनी शिकायत में आर्थिक प्रताड़ना का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि नौकरी करने के बावजूद घर और बच्चों की जिम्मेदारियों का अधिकांश खर्च उन्हीं से उठवाया जाता है। इतना ही नहीं, उनके द्वारा खर्च किए गए प्रत्येक रुपये का हिसाब मांगा जाता है।
पीड़िता का आरोप है कि पति और ससुराल के अन्य सदस्य उन्हें आर्थिक रूप से भी परेशान करते हैं। घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ बच्चों की परवरिश का दबाव भी उन पर ही रहता है। शिकायत में बताया गया है कि पति को पिछले करीब दो महीने से उनसे अलग रखा गया है, जिससे पारिवारिक परिस्थितियां और अधिक कठिन हो गई हैं।
अपने मकान पर किरायेदार रखने को लेकर भी विवाद
शिकायत में संपत्ति से जुड़ा मामला भी उठाया गया है। नीलम का कहना है कि उनका अपना मकान है, लेकिन सास-ससुर ने उस मकान में किरायेदार रख रखे हैं। जब उन्होंने किरायेदारों को हटाने की मांग की तो उनके ससुर ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया।
महिला के मुताबिक, इस मामले को लेकर भी उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि ससुराल पक्ष का व्यवहार लगातार उनके प्रति प्रतिकूल बना हुआ है और उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें मानसिक दबाव में रखा जा रहा है।
पुलिस अधीक्षक से एफआईआर दर्ज करने की मांग
लगातार कथित प्रताड़ना से परेशान होकर नीलम श्रीवास ने अब पुलिस अधीक्षक बाँदा से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने अपनी शिकायत में दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना सहित विभिन्न आरोपों का उल्लेख किया है। साथ ही संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की है।
पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से आग्रह किया है कि उनकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और आरोप सही पाए जाने पर पति, सास-ससुर तथा अन्य संबंधित आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
गौरतलब है कि दहेज की मांग और बेटा-बेटी के बीच भेदभाव जैसी सामाजिक समस्याएं आज भी कई परिवारों में महिलाओं के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं। कानून महिलाओं को दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा से संरक्षण प्रदान करता है। ऐसे मामलों में शिकायत मिलने पर संबंधित तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस द्वारा जांच की जाती है।
फिलहाल, यह पूरा मामला महिला की ओर से पुलिस अधीक्षक को दी गई शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।

