बांदा प्रेस ट्रस्ट ने अवैध एलोपैथिक प्रैक्टिस और पत्रकार के खिलाफ कथित झूठे शपथपत्र की जांच की मांग उठाई
रिपोर्ट – शानू वर्मा
बांदा: जनपद बांदा और बुंदेलखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में कथित रूप से बिना मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री और वैधानिक पंजीकरण के एलोपैथिक इलाज किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में बांदा प्रेस ट्रस्ट ने जिलाधिकारी बांदा को औपचारिक आवेदन सौंपकर अवैध मेडिकल प्रैक्टिस की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही वरिष्ठ पत्रकार आतमाराम त्रिपाठी के खिलाफ प्रस्तुत किए गए कथित झूठे शपथपत्रों की भी निष्पक्ष जांच कराने की अपील की गई है।
ट्रस्ट का कहना है कि यह मामला केवल किसी व्यक्ति या संगठन से जुड़ा विवाद नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और जरूरतमंद परिवारों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से संबंधित गंभीर जनहित का विषय है। इसलिए प्रशासन को मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए जमीनी स्तर पर जांच करानी चाहिए।
जिलाधिकारी को सौंपा गया शिकायत पत्र
बांदा प्रेस ट्रस्ट की ओर से पत्रकार एवं ट्रस्टी अनिल तिवारी ने जिलाधिकारी को आवेदन देकर पूरे मामले की जानकारी दी है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि बांदा सहित बुंदेलखंड के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ लोग बिना मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री और आवश्यक वैधानिक पंजीकरण के एलोपैथिक पद्धति से मरीजों का उपचार कर रहे हैं।
शिकायत के अनुसार, ऐसे कथित प्रैक्टिशनरों की गतिविधियां ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं। आरोप है कि कुछ लोगों ने ‘चिकित्सा मित्र’ नाम से एक संगठन बनाकर ऐसे लोगों को संगठित करने और उन्हें संरक्षण देने का प्रयास किया है।
ट्रस्ट ने प्रशासन से मांग की है कि इस संगठन के गठन, पंजीकरण, पदाधिकारियों और वास्तविक गतिविधियों की भी जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संगठन किस उद्देश्य से संचालित हो रहा है और इसके सदस्य किन गतिविधियों में शामिल हैं।
पत्रकार आतमाराम त्रिपाठी के खिलाफ शपथपत्र का मामला
शिकायत पत्र में वरिष्ठ पत्रकार एवं बांदा प्रेस ट्रस्ट के सदस्य आतमाराम त्रिपाठी का मामला भी प्रमुखता से उठाया गया है। आवेदन के मुताबिक, आतमाराम त्रिपाठी ने जनहित में कथित अवैध मेडिकल प्रैक्टिस से संबंधित खबरें प्रकाशित की थीं। इसके बाद कुछ लोगों द्वारा उनके खिलाफ शपथपत्र प्रस्तुत किए जाने और मीडिया के माध्यम से बयानबाजी किए जाने का आरोप लगाया गया है।
ट्रस्ट का कहना है कि इन शपथपत्रों और मीडिया बयानों में राजकुमार कुशवाहा को ‘चिकित्सा मित्र’ बताया गया है। हालांकि, किसी संगठन का सदस्य या पदाधिकारी होना अपने आप में एलोपैथिक चिकित्सा करने का कानूनी अधिकार प्रदान नहीं करता।
इसी आधार पर ट्रस्ट ने मांग की है कि आतमाराम त्रिपाठी के खिलाफ प्रस्तुत शपथपत्रों की सत्यता की जांच कराई जाए। साथ ही, उनमें लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों का भी निष्पक्ष परीक्षण किया जाए। यदि जांच में झूठे तथ्य, गलत जानकारी या कूटरचित दस्तावेज सामने आते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए।
राजकुमार कुशवाहा की मेडिकल प्रैक्टिस की जांच की मांग
आवेदन में राजकुमार कुशवाहा, पुत्र धुनकू प्रसाद, निवासी ग्राम गर्गनपुरवा के संबंध में भी कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ट्रस्ट ने आरोपों की जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि कथित तौर पर उनके द्वारा कई वर्षों से बिना मेडिकल डिग्री के एलोपैथिक पद्धति से मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
इसके अलावा मरीजों को गलत उपचार देने और दवाओं की बिक्री करने से संबंधित शिकायतों की भी जांच कराने की मांग की गई है।
ट्रस्ट ने प्रशासन से यह भी कहा है कि संबंधित व्यक्ति के मेडिकल स्टोर और क्लिनिक की वैधानिक स्थिति की जांच की जाए। इसके अंतर्गत औषधि लाइसेंस, फार्मासिस्ट की उपलब्धता, दवाओं की खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाए।
हालांकि, इन सभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। इसलिए ट्रस्ट ने प्रशासन से निष्पक्ष तरीके से सभी तथ्यों का परीक्षण कराने की अपील की है।
प्रतिबंधित और नकली दवाओं की बिक्री पर भी उठाए सवाल
बांदा प्रेस ट्रस्ट ने शिकायत में दवाओं के कथित अवैध कारोबार का मुद्दा भी उठाया है। आवेदन में प्रतिबंधित, नकली और अनावश्यक एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल तथा वितरण की जांच कराने की मांग की गई है।
ट्रस्ट का मानना है कि यदि बिना उचित चिकित्सकीय योग्यता के लोग मरीजों को दवाएं देते हैं तो इससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। विशेष रूप से एंटीबायोटिक दवाओं का अनावश्यक इस्तेमाल मरीजों के उपचार को प्रभावित कर सकता है।
इसलिए प्रशासन से मांग की गई है कि संबंधित मेडिकल स्टोर और क्लिनिकों में उपलब्ध दवाओं की जांच की जाए। साथ ही, दवाओं की खरीद के स्रोत, बिक्री के रिकॉर्ड और आवश्यक लाइसेंस का सत्यापन भी कराया जाए।
गांव-गांव जाकर जांच करे संयुक्त उच्चस्तरीय टीम
बांदा प्रेस ट्रस्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल, प्रशासनिक और पुलिस विभाग की संयुक्त उच्चस्तरीय टीम गठित करने की मांग की है। ट्रस्ट का कहना है कि जांच केवल कार्यालयों में बैठकर कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि अधिकारियों को गांव-गांव जाकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करना चाहिए।
इसके लिए टीम द्वारा संबंधित क्लिनिकों, मेडिकल स्टोरों और अन्य चिकित्सा केंद्रों का मौके पर निरीक्षण किया जाना चाहिए। आवश्यक दस्तावेजों की जांच के साथ दवाओं के भंडारण और बिक्री की स्थिति का भी परीक्षण किया जाए।
इसके अलावा, यदि जांच में बिना वैधानिक अनुमति के चिकित्सा गतिविधियां संचालित होने या प्रतिबंधित दवाओं के कारोबार की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
ट्रस्ट ने दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और नियमानुसार गिरफ्तारी सहित अन्य कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग भी की है।
उप मुख्यमंत्री और भारतीय प्रेस परिषद को भी भेजी गई शिकायत
बांदा प्रेस ट्रस्ट ने जिलाधिकारी को दिए गए आवेदन की प्रतियां उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री ब्रजेश पाठक तथा भारतीय प्रेस परिषद, नई दिल्ली को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी हैं।
ट्रस्ट ने इन संस्थाओं से मामले का संज्ञान लेने और संबंधित विभागों के माध्यम से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने की अपील की है।
आवेदन में विशेष रूप से कहा गया है कि जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाने वाले पत्रकारों को कथित तौर पर शपथपत्रों और दुष्प्रचार के माध्यम से दबाने के प्रयासों की भी जांच होनी चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारिता का दायित्व जनता की समस्याओं और प्रशासनिक कमियों को सामने लाना है। ऐसे में पत्रकारों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का परीक्षण भी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए।
ग्रामीणों के स्वास्थ्य और पत्रकारिता की निष्पक्षता का मामला
बांदा प्रेस ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि उसकी शिकायत का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा व्यवस्था की वैधानिकता सुनिश्चित करना और आम लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है।
अब इस मामले में जिलाधिकारी और संबंधित विभागों की ओर से की जाने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी। यदि प्रशासन संयुक्त टीम गठित कर निष्पक्ष जांच कराता है तो ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित कथित अवैध चिकित्सा गतिविधियों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
साथ ही, वरिष्ठ पत्रकार आतमाराम त्रिपाठी के खिलाफ प्रस्तुत शपथपत्रों की जांच से यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित हैं या नहीं। फिलहाल बांदा प्रेस ट्रस्ट ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग दोहराई है।

