मथुरा में मौलाना के कथित बयान पर उठा विवाद, संत समाज ने जताया विरोध और रखी यह मांग

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज 

मथुरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद के बीच एक कथित वीडियो को लेकर नया विवाद सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में मौलाना जरजिश अंसारी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के संबंध में कथित रूप से की गई टिप्पणियों पर संत समाज, कथा वाचकों और श्रीकृष्ण जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई है। विभिन्न संगठनों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील विषय बताते हुए सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि, वायरल वीडियो और उसमें किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही, समाचार लिखे जाने तक पुलिस या प्रशासन की ओर से इस मामले में किसी आधिकारिक कार्रवाई की पुष्टि भी सामने नहीं आई थी।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ कथित वीडियो

जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा यह वीडियो 23 जून को झारखंड में दिए गए एक कथित संबोधन का बताया जा रहा है। वीडियो में मौलाना जरजिश अंसारी भगवान श्रीकृष्ण के संबंध में कुछ दावे करते हुए दिखाई दे रहे हैं। साथ ही, कथित तौर पर भगवद्गीता के एक श्लोक की अपनी व्याख्या भी प्रस्तुत करते हुए नजर आ रहे हैं।

हालांकि, वीडियो की सत्यता और उसमें प्रस्तुत दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। इसलिए इस संबंध में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जा सकता।

मथुरा के संत समाज ने जताई आपत्ति

कथित वीडियो सामने आने के बाद मथुरा-वृंदावन के कई संतों और कथा वाचकों ने सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है।

विश्व प्रसिद्ध कथावाचक मृदुल कांत शास्त्री ने कथित बयान पर असहमति जताते हुए कहा कि धार्मिक विषयों पर तथ्यों और शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर उचित और तथ्यात्मक उत्तर दिया जाएगा।

इसके अलावा, ब्राह्मण समाज के कई प्रतिनिधियों ने भी इस कथित बयान पर नाराजगी व्यक्त की और इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील विषय बताया।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण से जुड़े पक्षों की प्रतिक्रिया

श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण से जुड़े याचिकाकर्ताओं और आंदोलन से जुड़े लोगों ने भी कथित बयान की आलोचना की है।

आंदोलन से जुड़े अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का बयान समाज में तनाव उत्पन्न करने वाला हो, तो ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी धार्मिक आस्था से जुड़े विषय पर सार्वजनिक टिप्पणी करते समय संयम और जिम्मेदारी आवश्यक है।

इसी क्रम में डॉ. प्रिया दासी ने भी कथित बयान पर आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे अनुचित बताया और संबंधित मामले में कानूनी प्रक्रिया अपनाने की बात कही।

संत समाज ने की कार्रवाई की मांग

संत समाज के कई प्रतिनिधियों ने सरकार से इस पूरे प्रकरण की जांच कराने और यदि कोई कानून का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

संतों का कहना है कि विभिन्न धर्मों और आस्थाओं का सम्मान बनाए रखना सामाजिक सौहार्द के लिए आवश्यक है। उनका मानना है कि सार्वजनिक मंचों पर दिए जाने वाले बयान समाज के विभिन्न वर्गों को प्रभावित करते हैं, इसलिए जिम्मेदारी के साथ वक्तव्य दिए जाने चाहिए।

धार्मिक विषयों पर संयम की आवश्यकता

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत विविध आस्थाओं और संस्कृतियों वाला देश है। ऐसे में धार्मिक विषयों से जुड़े किसी भी बयान पर प्रतिक्रिया स्वाभाविक हो सकती है। इसलिए सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को अपने वक्तव्यों में संयम और तथ्यात्मकता बनाए रखनी चाहिए।

इसी प्रकार, किसी भी वायरल वीडियो या सोशल मीडिया सामग्री को अंतिम सत्य मानने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि होना भी आवश्यक है।

सोशल मीडिया पर तेज हुई चर्चा

कथित वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि कई लोग वीडियो की प्रामाणिकता की जांच होने तक धैर्य रखने की बात कह रहे हैं।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी सामग्री को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना आवश्यक है, ताकि गलत सूचना या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।

प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

समाचार लिखे जाने तक पुलिस या जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में किसी एफआईआर, जांच या अन्य कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी। वहीं, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि भी उपलब्ध नहीं है।

ऐसी स्थिति में मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

कानून के अनुसार होगी आगे की प्रक्रिया

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी मामले में शिकायत प्राप्त होती है और प्रथम दृष्टया कोई कानूनी आधार बनता है, तो पुलिस नियमानुसार जांच करती है। जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, वीडियो की सत्यता, संबंधित व्यक्तियों के बयान और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाती है।

इसलिए किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आता है।

मथुरा में मौलाना जरजिश अंसारी के कथित बयान को लेकर नया विवाद सामने आया है। इस मामले में संत समाज, कथा वाचकों और श्रीकृष्ण जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े लोगों ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और प्रशासन की ओर से भी कोई आधिकारिक कार्रवाई की पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में पूरे प्रकरण पर अंतिम स्थिति जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।

यह मामला फिलहाल धार्मिक, सामाजिक और कानूनी तीनों दृष्टियों से चर्चा का विषय बना हुआ है। साथ ही, विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाओं के बीच सभी की नजर अब प्रशासन की संभावित कार्रवाई और आधिकारिक तथ्यों पर बनी हुई है।

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