लखीमपुर हिंसा मामला सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा को दिवाली पर घर जाने की दी अनुमति, 16 नवंबर तक लौटना होगा

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रिपोर्ट- शरद अवस्थी

लखीमपुर खीरी। वर्ष 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में जमानत पर बाहर चल रहे आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के अवसर पर अपने परिवार और करीबी रिश्तेदारों के साथ त्योहार मनाने के लिए गृह नगर जाने की अनुमति दे दी है। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि उन्हें पहले से निर्धारित जमानत शर्तों का पालन करना होगा और 16 नवंबर तक वापस लौटना होगा। इस फैसले के साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई समय पर पूरी करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि मुकदमे की कार्यवाही में न तो अनावश्यक जल्दबाजी होनी चाहिए और न ही अत्यधिक देरी की जानी चाहिए। अदालत ने अभियोजन पक्ष को सुनवाई के दौरान संतुलन बनाए रखने की सलाह दी।

दिवाली पर परिवार के साथ त्योहार मनाने की मिली अनुमति

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश आशीष मिश्रा की ओर से दाखिल उस अनुरोध पर आया, जिसमें उन्होंने दिवाली के अवसर पर अपने गृह नगर लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति मांगी थी। उनके पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने अदालत के समक्ष अपनी दलीलें रखीं।

गौरतलब है कि आशीष मिश्रा को इस मामले में जमानत मिली हुई है, लेकिन जमानत की शर्तों के तहत उन्हें अपने गृह नगर लखीमपुर खीरी में प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी। ऐसे में उन्होंने परिवार और करीबी रिश्तेदारों के साथ दिवाली मनाने के लिए अदालत से विशेष अनुमति मांगी।

पीठ ने अनुरोध पर विचार करने के बाद उन्हें निर्धारित शर्तों के अधीन यात्रा की अनुमति दे दी। अदालत के आदेश के अनुसार, आशीष मिश्रा दिवाली मनाने के लिए लखीमपुर खीरी जा सकेंगे, लेकिन उन्हें 16 नवंबर को वापस लौटना होगा। इस प्रकार, उन्हें सीमित अवधि के लिए अपने गृह नगर जाने की छूट दी गई है।

3 अक्टूबर 2021 को हुई थी लखीमपुर खीरी हिंसा

यह मामला 3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया क्षेत्र में हुई हिंसक घटना से जुड़ा है। उस समय उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के विरोध में किसान प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान हुई घटनाओं में चार किसानों समेत कुल आठ लोगों की मौत हो गई थी।

मामले के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान एक एसयूवी की चपेट में आने से चार किसानों की जान चली गई थी। इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और कथित तौर पर आक्रोशित किसानों ने एसयूवी चालक तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस हिंसा के दौरान एक पत्रकार की भी मौत हुई थी।

इस घटना ने देशभर में व्यापक चर्चा पैदा की थी। इसके बाद मामले की जांच, आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और मुकदमे की सुनवाई को लेकर लगातार ध्यान बना रहा। आशीष मिश्रा, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे हैं, इस मामले में आरोपी हैं और जमानत पर बाहर हैं।

मुकदमे की प्रगति पर सुप्रीम कोर्ट ने ली जानकारी

सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की मौजूदा स्थिति और मुकदमे की प्रगति के बारे में जानकारी प्राप्त की। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि मामले की सुनवाई कर रहे अधीनस्थ अदालत के न्यायाधीश का इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा तबादला कर दिया गया था।

इसके अलावा, अदालत को बताया गया कि मामले की पैरवी के लिए नए सरकारी वकील की नियुक्ति की गई है। मुकदमे में गवाहों की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि कुल 131 गवाहों में से 90 गवाहों से पूछताछ पूरी हो चुकी है।

यह जानकारी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मुकदमे की सुनवाई में गवाहों के बयान और अन्य न्यायिक प्रक्रियाएं मामले के निस्तारण में अहम भूमिका निभाती हैं। हालांकि, अभी 41 गवाहों से पूछताछ शेष बताई गई है। ऐसे में मुकदमे की आगे की कार्यवाही समयबद्ध तरीके से पूरी करना न्यायालय के समक्ष एक महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।

सुनवाई में देरी न होने देने पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई के दौरान उचित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। साथ ही, न्यायिक कार्यवाही को अनावश्यक रूप से लंबा खींचने से भी बचना जरूरी है। पीठ ने कहा कि बहुत अधिक जल्दबाजी की आवश्यकता नहीं है, लेकिन अत्यधिक विलंब भी नहीं होना चाहिए। अभियोजन पक्ष को इन दोनों पहलुओं के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।

इस टिप्पणी से स्पष्ट है कि अदालत मुकदमे की निष्पक्षता के साथ-साथ उसकी समयबद्ध प्रगति को भी महत्व दे रही है। किसी भी आपराधिक मामले में सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देना और आवश्यक साक्ष्यों की जांच करना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए, सुनवाई को उचित गति से आगे बढ़ाना जरूरी है।

पीड़ित पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी अदालत को बताया कि वे मामले में अब तक हुई प्रगति से संतुष्ट हैं। यह जानकारी सुनवाई के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण बिंदुओं में शामिल रही।

नए जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने संभाला कार्यभार

मामले की न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी सामने आया। न्यायिक अधिकारी लोकेश राय ने 14 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी के जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला। उन्होंने शिव कुमार सिंह का स्थान लिया है, जो इससे पहले इस मामले की सुनवाई कर रहे थे।

न्यायाधीश के स्थानांतरण और नए सरकारी वकील की नियुक्ति के बीच मुकदमे की आगे की सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी। वहीं, सुप्रीम कोर्ट की ओर से समयबद्ध सुनवाई पर दिए गए जोर के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शेष गवाहों की पूछताछ और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं किस गति से आगे बढ़ती हैं।

आगे की सुनवाई पर रहेगी नजर

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा को दिवाली के अवसर पर परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति दी है। हालांकि, यह राहत पहले से लागू शर्तों के अधीन है और उन्हें 16 नवंबर तक लौटना होगा।

दूसरी ओर, मुकदमे की सुनवाई में अब तक 131 में से 90 गवाहों के बयान दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में आने वाले समय में शेष गवाहों की पूछताछ और मामले की सुनवाई की प्रगति महत्वपूर्ण होगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया को निष्पक्ष रखते हुए अनावश्यक देरी से बचना चाहिए।