कानपुर में बदलते मौसम का दिख रहा असर: उर्सला अस्पताल में वायरल बुखार और दस्त के बढ़े मरीज, पढ़िए डॉक्टर की सलाह

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रिपोर्ट – मुकेश वर्मा 

कानपुर: जुलाई के महीने में कानपुर का मौसम लगातार बदल रहा है। कभी तेज धूप तो कभी अचानक बारिश होने से तापमान और वातावरण में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। दिन के समय उमस लोगों की परेशानी बढ़ा रही है, जबकि रात में तापमान अपेक्षाकृत कम हो रहा है। मौसम में इस बदलाव का असर अब लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। शहर के उर्सला जिला अस्पताल में वायरल बुखार, दस्त और मौसमी संक्रमण से प्रभावित मरीजों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, फिलहाल अधिकांश मरीज सामान्य मौसमी संक्रमण से पीड़ित हैं। राहत की बात यह है कि अभी तक डेंगू जैसे गंभीर संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी गंभीर मरीज को विशेष उपचार के लिए भर्ती करने की आवश्यकता पड़ी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम के अनुरूप सावधानी बरतने की अपील की है।

मौसम में लगातार बदलाव से बढ़ा संक्रमण का खतरा

जुलाई में मानसून के सक्रिय होने के कारण कभी तेज धूप और कभी बारिश का सिलसिला जारी है। ऐसे मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जिससे वायरस और बैक्टीरिया तेजी से सक्रिय हो सकते हैं। इसके कारण वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम, गले में संक्रमण, दस्त और पेट संबंधी समस्याएं बढ़ने लगती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में अचानक बदलाव होने पर शरीर को नए वातावरण के अनुसार स्वयं को ढालने में समय लगता है। यदि इस दौरान खान-पान और साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए, तो संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।

उर्सला अस्पताल में बढ़ी मरीजों की संख्या

उर्सला जिला अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में इन दिनों मौसमी बीमारियों से संबंधित मरीजों की संख्या पहले की तुलना में अधिक देखी जा रही है। अस्पताल में आने वाले अधिकांश मरीज वायरल बुखार, दस्त, पेट दर्द, कमजोरी और सामान्य संक्रमण जैसी समस्याओं से परेशान हैं।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सभी मरीजों को आवश्यक जांच और उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। डॉक्टरों की टीम लगातार मरीजों की निगरानी कर रही है, ताकि किसी भी गंभीर स्थिति का समय रहते पता लगाया जा सके।

डॉ. बी.सी. पाल ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की

उर्सला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. बी.सी. पाल ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण मौसमी संक्रमण के मामले बढ़ना सामान्य बात है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में वायरल बुखार और दस्त के मरीज आ रहे हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक अस्पताल में डेंगू के किसी मरीज की पुष्टि नहीं हुई है और न ही कोई गंभीर मरीज भर्ती है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग पूरी सतर्कता के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

फिलहाल डेंगू की पुष्टि नहीं

बरसात का मौसम शुरू होते ही लोग डेंगू और अन्य मच्छरजनित बीमारियों को लेकर चिंतित रहते हैं। हालांकि उर्सला अस्पताल के अनुसार अभी तक डेंगू के किसी मरीज की पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद चिकित्सकों का कहना है कि आने वाले दिनों में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि घर या आसपास पानी जमा होने दिया जाए तो मच्छरों के पनपने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए समय रहते सफाई और जल निकासी पर ध्यान देना आवश्यक है।

खानपान में सावधानी बरतना जरूरी

डॉ. बी.सी. पाल ने लोगों को खान-पान में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में खुले में बिकने वाले तले-भुने खाद्य पदार्थ, लंबे समय से कटे हुए फल तथा अस्वच्छ भोजन से बचना चाहिए।

इसके साथ ही केवल स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल का सेवन करने की सलाह दी गई है। यदि संभव हो तो पानी को उबालकर या फिल्टर करके पीना चाहिए, ताकि संक्रमण का खतरा कम हो सके।

घर और आसपास रखें साफ-सफाई

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ-साथ आसपास के वातावरण की सफाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

लोगों को सलाह दी गई है कि घर के आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। यदि पानी किसी बर्तन, गमले या टंकी में जमा हो तो उसे नियमित रूप से बदलते रहें। इससे मच्छरों के पनपने की संभावना कम होगी और कई मौसमी बीमारियों से बचाव संभव होगा।

संतुलित आहार और पर्याप्त पानी का सेवन लाभदायक

मौसम में बदलाव के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना भी आवश्यक है। डॉक्टरों का कहना है कि संतुलित भोजन, ताजे फल-सब्जियां, पर्याप्त मात्रा में पानी और उचित आराम शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।

इसके अलावा नियमित रूप से हाथ धोना, बाहर से आने के बाद साफ-सफाई रखना तथा भोजन बनाने और खाने से पहले स्वच्छता का पालन करना भी महत्वपूर्ण है।

लक्षण दिखें तो चिकित्सक से करें संपर्क

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार बुखार, बार-बार दस्त, अत्यधिक कमजोरी, उल्टी या अन्य गंभीर लक्षण महसूस हों, तो स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

समय पर जांच और उपचार मिलने से अधिकांश मौसमी बीमारियों का प्रभावी इलाज संभव है। इसलिए किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर रखे हुए है नजर

उर्सला अस्पताल सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लगातार मौसमी बीमारियों की स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। अस्पताल में आवश्यक दवाएं, चिकित्सक और अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।

अधिकारियों का कहना है कि यदि लोग डॉक्टरों की सलाह का पालन करें और स्वच्छता के साथ संतुलित खान-पान अपनाएं, तो अधिकांश मौसमी संक्रमणों से बचा जा सकता है।

कानपुर में बदलते मौसम का प्रभाव अब स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। उर्सला अस्पताल में वायरल बुखार और दस्त के मरीजों की संख्या बढ़ने से यह स्पष्ट है कि मौसम के अनुरूप सावधानी बरतना समय की आवश्यकता है। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल डेंगू जैसे गंभीर संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है।

फिर भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि लोग स्वच्छ भोजन, शुद्ध पेयजल, साफ-सफाई और संतुलित जीवनशैली अपनाएं। समय पर सावधानी और चिकित्सकीय परामर्श न केवल मौसमी संक्रमण से बचाव में सहायक होगा, बल्कि पूरे परिवार के स्वास्थ्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा।

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