फर्रुखाबाद: गिरफ्तारी की मांग को लेकर पीड़िता परिवार सहित धरने पर बैठी, पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
रिपोर्ट- हर्ष वर्मा
फर्रुखाबाद: जिले के जहानगंज थाना क्षेत्र से जुड़े एक आपराधिक मामले में पुलिस कार्रवाई को लेकर पीड़िता और उसके परिजनों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में धरना देकर न्याय की मांग की।
पीड़िता का आरोप है कि उसकी शिकायत पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद मुख्य नामजद आरोपी की अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई। इतना ही नहीं, उसका दावा है कि पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेने के बाद बिना कानूनी कार्रवाई पूरी किए छोड़ दिया।
इन आरोपों के बीच पीड़िता ने निष्पक्ष जांच, आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग प्रशासन के सामने रखी है।
यह मामला अब कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, इस समाचार के प्रकाशन तक पुलिस का विस्तृत पक्ष सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हो सका है।
कलेक्ट्रेट परिसर में परिवार सहित धरने पर बैठी पीड़िता
मंगलवार को पीड़िता अपने परिजनों के साथ फर्रुखाबाद कलेक्ट्रेट पहुंची और धरने पर बैठ गई। धरने के दौरान उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, नामजद आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाए तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
परिजनों का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी न होने के कारण वे लगातार भय और असुरक्षा की स्थिति में जीवन बिता रहे हैं। उनका आरोप है कि आरोपी खुलेआम घूम रहा है और परिवार पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़िता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, 8 जून की सुबह लगभग पांच बजे गांव के एक नामजद व्यक्ति सहित कुछ लोग उसके घर पहुंचे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि घर में प्रवेश करने के बाद उसके साथ मारपीट की गई।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि हमले के दौरान उसके कपड़े फाड़े गए तथा उसके ऊपर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगाने का प्रयास किया गया।
समाचार में लगाए गए ये सभी आरोप पीड़िता की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत पर आधारित हैं। इन आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस जांच के बाद ही होगा।
मां के घायल होने का भी आरोप
पीड़िता का कहना है कि घटना के दौरान जब उसकी मां उसे बचाने के लिए बीच-बचाव करने पहुंचीं, तब उनके साथ भी मारपीट की गई।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस घटना में उनकी मां को चोटें आईं और उनका हाथ भी घायल हो गया।
इस संबंध में उपलब्ध जानकारी शिकायत के आधार पर है। चिकित्सीय रिपोर्ट और पुलिस विवेचना के निष्कर्ष आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज
पीड़िता के अनुसार, घटना के बाद उसने जहानगंज थाने में तहरीर दी, जिसके आधार पर पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
हालांकि, उसका आरोप है कि मुकदमा दर्ज होने के बावजूद मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई।
उसका यह भी दावा है कि पुलिस ने आरोपी को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया। इस संबंध में पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत प्रतिक्रिया समाचार लिखे जाने तक उपलब्ध नहीं हो सकी।
पुलिस पर लगाए लापरवाही के आरोप
धरने के दौरान पीड़िता और उसके परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।
उनका आरोप है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जाती, तो आरोपी खुलेआम घूमकर परिवार को कथित रूप से धमकाने की स्थिति में नहीं होता।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मामले की उच्च स्तर पर जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भी आवश्यक कार्रवाई की जाए।
परिवार ने सुरक्षा की भी उठाई मांग
पीड़िता के परिजनों ने कहा कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता है।
उनका कहना है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक परिवार असुरक्षा महसूस कर रहा है। इसी कारण उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी मांग की।
प्रशासन से यह भी अनुरोध किया गया कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी कराई जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया पर लोगों का विश्वास बना रहे।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की अपील
धरने के दौरान पीड़िता ने कहा कि उसका उद्देश्य केवल न्याय प्राप्त करना है।
उसने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
परिजनों ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो वे आगे भी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठाते रहेंगे।
कानून के अनुसार जांच के बाद ही तय होगी जिम्मेदारी
किसी भी आपराधिक मामले में एफआईआर दर्ज होना जांच प्रक्रिया का प्रारंभिक चरण होता है।
कानूनी प्रक्रिया के अनुसार पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान, चिकित्सीय रिपोर्ट और अन्य प्रमाणों के आधार पर विवेचना करती है। इसके बाद ही मामले में आरोप पत्र दाखिल किया जाता है और न्यायालय में सुनवाई होती है।
भारतीय न्याय व्यवस्था में प्रत्येक आरोपी को तब तक निर्दोष माना जाता है, जब तक सक्षम न्यायालय द्वारा आरोप सिद्ध न कर दिए जाएं।
पुलिस के पक्ष की प्रतीक्षा
समाचार लिखे जाने तक इस मामले में पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी।
यदि पुलिस प्रशासन या संबंधित अधिकारी इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी करते हैं या जांच से संबंधित नई जानकारी सामने आती है, तो उसे भी समाचार में शामिल किया जाना आवश्यक होगा, ताकि पाठकों को मामले का संतुलित और तथ्यात्मक पक्ष प्राप्त हो सके।
निष्पक्ष जांच पर टिकी हैं उम्मीदें
फिलहाल यह मामला प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर केंद्रित है। पीड़िता और उसका परिवार आरोपी की गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग कर रहा है, जबकि मामले की अंतिम स्थिति पुलिस विवेचना और न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
प्रशासनिक स्तर पर यदि शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण होता है और जांच पारदर्शी तरीके से पूरी की जाती है, तो इससे न्याय व्यवस्था में आम नागरिकों का विश्वास और मजबूत हो सकता है।

