MVDA का डिफॉल्टर बिल्डरों पर शिकंजा, वृंदावन ग्रीन्स समेत कई बिल्डरों पर FIR

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज

मथुरा। मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (MVDA) ने बाह्य विकास शुल्क (EDC) समेत अन्य बकाया जमा नहीं करने वाले बिल्डरों और आवंटियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। प्राधिकरण ने बकाया वसूली अभियान तेज करने के साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी है। इसी क्रम में वृंदावन के राजपुर बांगर स्थित वृंदावन ग्रीन्स ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी के बिल्डर के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई है। वहीं, द डिवाइन ग्रुप से जुड़े मामले में भी प्राधिकरण ने जांच शुरू कर दी है।

प्राधिकरण की इस कार्रवाई से उन बिल्डरों और आवंटियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जिन्होंने निर्धारित समय पर अपना बकाया जमा नहीं किया है। MVDA ने स्पष्ट किया है कि बकाया राशि जमा करने के लिए एकमुश्त समाधान योजना (OTS-2026) का लाभ उठाने का अवसर दिया जा रहा है। इसके बावजूद भुगतान नहीं करने वालों के खिलाफ संपत्ति सील करने और नीलामी जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

128 बड़े बिल्डरों पर 41 करोड़ रुपये का बकाया

मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, पहले चरण में 128 बड़े बिल्डरों को बाह्य विकास शुल्क (EDC) के रूप में करीब 41 करोड़ रुपये जमा करने के लिए नोटिस जारी किए गए थे। यह शुल्क विकास परियोजनाओं के लिए निर्धारित नियमों के तहत देय होता है। हालांकि, कई बिल्डरों द्वारा निर्धारित समय पर भुगतान नहीं किए जाने के कारण प्राधिकरण को वसूली अभियान तेज करना पड़ा है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पहले आवासीय परियोजनाओं के लिए EDC की दर 395 रुपये प्रति वर्ग मीटर और व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए 587 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित थी। बाद में शासन स्तर से इस शुल्क की दर बढ़ाकर 700 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दी गई। ऐसे में संबंधित परियोजनाओं पर लागू नियमों और निर्धारित दरों के अनुसार देय राशि जमा करना बिल्डरों की जिम्मेदारी है।

इसके अलावा, बकाया राशि की वसूली के लिए प्राधिकरण अब नोटिस जारी करने के साथ-साथ नियमों का पालन सुनिश्चित कराने पर भी जोर दे रहा है। इस कार्रवाई का उद्देश्य विकास प्राधिकरण के राजस्व की वसूली करना और स्वीकृत परियोजनाओं में निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

OTS-2026 की समयसीमा 15 दिसंबर तक बढ़ी

बकायेदार बिल्डरों और आवंटियों को राहत देने के लिए MVDA ने एकमुश्त समाधान योजना (OTS-2026) की समयसीमा बढ़ाकर 15 दिसंबर 2026 कर दी है। पहले यह योजना 18 अप्रैल से 17 जुलाई 2026 तक लागू थी। अब पात्र बकायेदारों को अतिरिक्त समय दिया गया है, ताकि वे अपने बकाये का भुगतान कर सकें और योजना की शर्तों के अनुसार दंड ब्याज में छूट का लाभ उठा सकें।

प्राधिकरण के सचिव आशीष कुमार सिंह ने बताया कि इस योजना का लाभ लेने के इच्छुक बिल्डरों और आवंटियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करना होगा। इसके लिए आवास बंधु की आधिकारिक वेबसाइट http://www.awasbandhu.in पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

हालांकि, योजना का लाभ संबंधित पात्रता और निर्धारित शर्तों के अधीन होगा। इसलिए बकायेदारों को आवेदन करने से पहले योजना से संबंधित दिशा-निर्देशों का अध्ययन करना चाहिए। समयसीमा बढ़ाए जाने का उद्देश्य बकाया वसूली को गति देना और संबंधित लोगों को भुगतान का एक अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराना है।

वृंदावन ग्रीन्स के बिल्डर के खिलाफ FIR

बकाया वसूली के बीच MVDA ने नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी क्रम में वृंदावन के राजपुर बांगर स्थित वृंदावन ग्रीन्स ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी के बिल्डर आरके जैन के खिलाफ वृंदावन कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

प्राधिकरण के सहायक अभियंता पंकज शुक्ला की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, आरोप है कि बिल्डर ने आंतरिक विकास कार्य पूरे किए बिना प्राधिकरण के पास बंधक रखे गए 620 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के फ्लैट बेच दिए। आरोप यह भी है कि इन फ्लैटों को बंधक मुक्त कराए बिना बिक्री की गई।

प्राधिकरण की ओर से इस मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगी। संबंधित पक्ष का जवाब और मामले में आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

द डिवाइन ग्रुप के मामले में भी जांच शुरू

इसी तरह द डिवाइन ग्रुप से जुड़े एक अन्य मामले में भी प्राधिकरण ने जांच शुरू की है। जानकारी के अनुसार, छटीकरा के मौजा छटीकरा में खसरा संख्या 74 से संबंधित परियोजना को लेकर मामला सामने आया है। आरोप है कि अदालत की ओर से स्टे होने के बावजूद करीब दो करोड़ रुपये में फ्लैट बेचने के लिए प्रचार किया गया।

प्राधिकरण ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की है। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित परियोजना में किन परिस्थितियों में प्रचार किया गया और क्या इसमें न्यायालय के आदेश या विकास प्राधिकरण के नियमों का उल्लंघन हुआ है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी परियोजना में निवेश करने से पहले खरीदारों के लिए उसकी कानूनी स्थिति, स्वीकृत नक्शे और प्राधिकरण से संबंधित अनुमतियों की जानकारी हासिल करना आवश्यक है।

15 दिसंबर के बाद सख्त कार्रवाई की चेतावनी

MVDA के सचिव आशीष कुमार सिंह ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा तक बकाया जमा नहीं करने वाले बिल्डरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्राधिकरण के अनुसार, ऐसे मामलों में संपत्ति सील करने और नियमों के तहत नीलामी की प्रक्रिया अपनाने पर विचार किया जाएगा।

इसलिए संबंधित बिल्डरों और आवंटियों के पास अब बकाया भुगतान करने के लिए 15 दिसंबर 2026 तक का समय है। उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना भुगतान पूरा करना होगा, ताकि संभावित दंडात्मक कार्रवाई से बचने के लिए योजना के अंतर्गत उपलब्ध विकल्पों का लाभ लिया जा सके।

कुल मिलाकर, MVDA की कार्रवाई से मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में विकास परियोजनाओं की निगरानी और बकाया वसूली को लेकर सख्ती बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। एक ओर प्राधिकरण OTS-2026 के माध्यम से बकायेदारों को राहत का अवसर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर कथित अनियमितताओं के मामलों में कानूनी कार्रवाई भी कर रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 15 दिसंबर तक कितने बिल्डर बकाया जमा करते हैं और जांच के बाद संबंधित मामलों में क्या कदम उठाए जाते हैं।

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