संतकबीरनगर में स्वास्थ्य बीमा कंपनी को इलाज खर्च के 1.13 लाख रुपये ब्याज सहित देने का आदेश

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रिपोर्ट – शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी 

संतकबीरनगर: स्वास्थ्य बीमा कराने के बाद भी इलाज में हुए खर्च का भुगतान नहीं मिलने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने बीमा अवधि के दौरान कराए गए इलाज के खर्च के रूप में 1 लाख 13 हजार 67 रुपये 10 प्रतिशत ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता को क्षतिपूर्ति के रूप में 50 हजार रुपये देने होंगे। आयोग ने बीमा कंपनी को यह भुगतान 60 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया है।

यह मामला संतकबीरनगर जिले के खलीलाबाद क्षेत्र के बड़ी सरौली गांव का है। शिकायतकर्ता लक्ष्मी शंकर नारायण पाल ने आरोप लगाया था कि स्वास्थ्य बीमा के तहत इलाज कराने के बाद भी कंपनी ने चिकित्सा खर्च का भुगतान नहीं किया। इसके बाद उन्होंने अद्विक लीगल कंसल्टेंसी के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दाखिल किया। मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आयोग ने यह आदेश दिया।

पांच लाख रुपये का कराया था स्वास्थ्य बीमा

मामले के अनुसार, खलीलाबाद कोतवाली क्षेत्र के उदासीन मठ, बड़ी सरौली गांव निवासी लक्ष्मी शंकर नारायण पाल ने वर्ष 2023 में अपने और अपने परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा कराया था। यह बीमा स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी से पांच लाख रुपये की बीमा राशि के लिए कराया गया था। इसमें उनकी पत्नी और बच्चे भी शामिल थे।

स्वास्थ्य बीमा कराने का उद्देश्य बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में इलाज पर होने वाले खर्च के लिए आर्थिक सुरक्षा प्राप्त करना था। हालांकि, शिकायतकर्ता के अनुसार, बीमा अवधि के दौरान जब उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हुई और अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, तो चिकित्सा खर्च के भुगतान को लेकर समस्या सामने आई।

शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि इलाज के लिए खर्च की गई राशि का दावा बीमा कंपनी के समक्ष प्रस्तुत किया गया था, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद उन्हें अपने खर्च की भरपाई के लिए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

सीने में भारीपन और दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती

शिकायत में दी गई जानकारी के मुताबिक, 8 फरवरी 2025 को लक्ष्मी शंकर नारायण पाल को सीने में भारीपन, मुंह सूखने, खांसी और सीने में दर्द जैसी समस्याएं शुरू हुईं। उनकी तबीयत को देखते हुए परिवार के सदस्य उन्हें गोरखपुर स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां उन्हें भर्ती कराकर इलाज कराना पड़ा।

शिकायतकर्ता के अनुसार, अस्पताल में दवा और उपचार पर कुल 1 लाख 13 हजार 67 रुपये खर्च हुए। यह खर्च स्वास्थ्य बीमा की अवधि के दौरान हुआ था। इसलिए उन्होंने चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति के लिए बीमा कंपनी के समक्ष दावा प्रस्तुत किया।

हालांकि, शिकायतकर्ता का कहना था कि दावा प्रपत्र भरवाने के बाद कंपनी की ओर से शीघ्र भुगतान किए जाने की बात कही गई, लेकिन इसके बावजूद राशि नहीं मिली। ऐसे में इलाज पर खर्च हुई रकम की वापसी नहीं होने से उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

भुगतान नहीं मिलने पर उपभोक्ता आयोग में दाखिल किया वाद

शिकायतकर्ता के अनुसार, बीमा कंपनी के समक्ष दावा प्रस्तुत करने और भुगतान की प्रतीक्षा करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने अद्विक लीगल कंसल्टेंसी के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दाखिल किया।

वाद में इलाज के दौरान खर्च हुई रकम का भुगतान कराने की मांग की गई। शिकायतकर्ता ने बीमा अवधि के दौरान हुए चिकित्सा व्यय और कंपनी की ओर से भुगतान नहीं किए जाने से संबंधित तथ्यों को आयोग के समक्ष रखा।

इसके बाद आयोग ने मामले की पत्रावली में उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों का अवलोकन किया। प्रस्तुत तथ्यों पर विचार करने के बाद आयोग ने बीमा कंपनी को चिकित्सा खर्च की राशि ब्याज सहित देने और अतिरिक्त क्षतिपूर्ति का भुगतान करने का आदेश दिया।

जिला उपभोक्ता आयोग ने सुनाया फैसला

जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार सिंह और महिला सदस्य संतोष ने मामले पर सुनवाई के बाद आदेश जारी किया। आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता के इलाज पर खर्च हुए 1 लाख 13 हजार 67 रुपये पर 10 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करे।

इसके अतिरिक्त, शिकायतकर्ता को क्षतिपूर्ति के रूप में 50 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया गया है। आयोग ने कुल देय राशि के भुगतान के लिए 60 दिनों की समयसीमा निर्धारित की है।

इस फैसले के तहत बीमा कंपनी को चिकित्सा खर्च की मूल राशि, उस पर निर्धारित ब्याज और अतिरिक्त क्षतिपूर्ति का भुगतान करना होगा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में ब्याज की गणना किस तारीख से की जानी है, इसका स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए अंतिम देय रकम की गणना आयोग के आदेश की पूरी प्रति के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

स्वास्थ्य बीमा और उपभोक्ता अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण मामला

यह मामला स्वास्थ्य बीमा के तहत चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति को लेकर उपभोक्ताओं के सामने आने वाली समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करता है। स्वास्थ्य बीमा लेने वाले लोगों के लिए पॉलिसी की शर्तों, कवरेज, दावा प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी रखना महत्वपूर्ण होता है। वहीं, दावा प्रस्तुत करने के बाद उससे संबंधित रसीदें, अस्पताल के बिल, चिकित्सा रिपोर्ट और बीमा कंपनी के साथ हुए पत्राचार को सुरक्षित रखना भी उपयोगी है।

यदि किसी उपभोक्ता को बीमा दावे के निस्तारण में समस्या आती है, तो वह संबंधित शिकायत निवारण प्रक्रिया का सहारा ले सकता है। जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता आयोग में भी शिकायत की जा सकती है। हालांकि, हर मामले का निर्णय संबंधित पॉलिसी की शर्तों, उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानूनों के आधार पर होता है।

संतकबीरनगर के इस मामले में आयोग ने प्रस्तुत दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर बीमा कंपनी को भुगतान का आदेश दिया है। अब आदेश के अनुसार 60 दिनों के भीतर भुगतान किया जाना है।

खलीलाबाद के लक्ष्मी शंकर नारायण पाल के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने इलाज खर्च के 1,13,067 रुपये पर 10 प्रतिशत ब्याज और 50 हजार रुपये अतिरिक्त क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। बीमा कंपनी को निर्धारित समयसीमा में भुगतान करना होगा।

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