कानपुर के ककवन में विद्यालय बना तालाब, 10 दिन बाद भी जलभराव; 180 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
रिपोर्ट- आनंद तिवारी
कानपुर जिले के बिल्हौर क्षेत्र के ककवन कस्बे में जलभराव की समस्या ने स्कूली बच्चों की पढ़ाई को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। यहां तालाब के किनारे स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय और दो आंगनबाड़ी केंद्रों का परिसर पानी से भरा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि बारिश थमे करीब दस दिन बीतने के बाद भी जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी है। इसके चलते बच्चों को अपने विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्रों के बजाय दूसरे स्थानों पर बैठकर पढ़ाई और अन्य गतिविधियां करनी पड़ रही हैं।
स्थिति यह है कि कहीं विद्यालय की कक्षाएं दूसरे प्राथमिक विद्यालय में संचालित की जा रही हैं, तो कहीं आंगनबाड़ी के बच्चों को पशु अस्पताल और निजी मकान के बरामदे में बैठाना पड़ रहा है। ऐसे में बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनकी नियमित गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। वहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों को शिकायत दिए जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है।
ककवन के उच्च प्राथमिक विद्यालय में जलभराव से पढ़ाई बाधित
ककवन कस्बे के दक्षिणी छोर पर तालाब के किनारे स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय परिसर में दो आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित होते हैं। विद्यालय में प्रधानाचार्य अजीत सिंह के साथ सुनीता यादव और जगत सिंह सहित तीन शिक्षकों का स्टाफ तैनात है। यहां तीन कक्षाओं में कुल 89 विद्यार्थी पंजीकृत हैं।
इसके अलावा, परिसर में संचालित आंगनबाड़ी प्रथम केंद्र में 46 और आंगनबाड़ी द्वितीय केंद्र में 45 बच्चे पंजीकृत हैं। इस प्रकार तीनों केंद्रों से जुड़े कुल 180 बच्चों की पढ़ाई और दैनिक गतिविधियां जलभराव से प्रभावित हो रही हैं।
दरअसल, सितंबर के पहले सप्ताह में लगातार हुई बारिश के कारण विद्यालय के पीछे स्थित तालाब लबालब भर गया था। तालाब से दूसरे जलाशय तक पानी पहुंचने का रास्ता अवरुद्ध होने के कारण पानी की निकासी नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप तालाब का पानी विद्यालय परिसर में भर गया और कक्षाओं का संचालन प्रभावित हो गया।
दूसरे विद्यालय, पशु अस्पताल और निजी मकान के बरामदे में चल रहीं कक्षाएं
जलभराव के कारण जब विद्यालय परिसर में पढ़ाई कराना संभव नहीं रहा, तब बच्चों को वैकल्पिक स्थानों पर भेजने की व्यवस्था की गई। उच्च प्राथमिक विद्यालय की कक्षाएं गांव के प्राथमिक विद्यालय द्वितीय में संचालित कराई गईं। वहीं, आंगनबाड़ी प्रथम केंद्र को पशु अस्पताल में चलाना पड़ा, जबकि दूसरे केंद्र के बच्चों को उत्तम के निजी मकान के बाहर बने बरामदे में बैठाया गया।
इस अस्थायी व्यवस्था के सहारे बच्चों की पढ़ाई और गतिविधियों को जारी रखने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, अपने नियमित परिसर से दूर कक्षाएं संचालित होने के कारण शिक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि समस्या का समाधान होने के बजाय बार-बार बच्चों को दूसरे स्थानों पर भेजना पड़ रहा है। इससे विद्यालय में सामान्य शैक्षणिक व्यवस्था बहाल करने की मांग तेज हो गई है।
इंजन से पानी निकलवाने के बाद फिर डूब गया विद्यालय परिसर
जलभराव की समस्या सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर पंपिंग सेट इंजन की मदद से परिसर से पानी निकलवाया गया था। लगभग दो सप्ताह बाद पानी हटने पर विद्यालय में परीक्षाएं और आंगनबाड़ी केंद्रों की गतिविधियां दोबारा शुरू हो सकीं। हालांकि, यह राहत अधिक समय तक नहीं टिक पाई।
एक और दो अक्टूबर को हुई लगातार बारिश के बाद विद्यालय परिसर फिर से पानी में डूब गया। इसके बाद बच्चों को दोबारा वैकल्पिक स्थानों पर भेजना पड़ा। अब बारिश थमे करीब दस दिन बीतने के बावजूद परिसर में पानी जमा है।
इससे स्पष्ट होता है कि केवल इंजन लगाकर पानी निकालना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। जब तक तालाब से पानी की निकासी का रास्ता नहीं खुलता और जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक प्रत्येक बारिश के बाद विद्यालय परिसर में दोबारा जलभराव होने की आशंका बनी रहेगी।
अतिक्रमण को बताया जा रहा जलभराव की मुख्य वजह
ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय के पास स्थित तालाब से दूसरे तालाब तक पानी जाने का रास्ता बंद है। निकासी मार्ग पर अतिक्रमण होने के कारण पानी का बहाव बाधित हो रहा है। उनका कहना है कि जब तक रास्ते से अवरोध हटाकर जल निकासी बहाल नहीं की जाएगी, तब तक समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत सिंह और आंगनबाड़ी केंद्रों की संचालिकाओं माला सिंह तथा शांति देवी के अनुसार, इस समस्या को लेकर खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) को लिखित शिकायत भी दी गई है। इसके बावजूद अब तक ऐसी ठोस व्यवस्था नहीं हो सकी है, जिससे विद्यालय परिसर को जलभराव से स्थायी राहत मिल सके।
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण करें, निकासी मार्ग की स्थिति की जांच कराएं और यदि अतिक्रमण के कारण पानी का बहाव बाधित है, तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए रास्ता खुलवाएं।
अधिकारियों ने दिए निर्देश, लेकिन स्थायी समाधान का इंतजार
इस मामले में तहसीलदार अभिनव चंद्रा ने बताया कि खंड विकास अधिकारी को जल निकासी का अवरुद्ध मार्ग खुलवाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, खंड विकास अधिकारी नेमचंद्र के अनुसार, ग्राम प्रधान राजू स्वर्णकार और पंचायत सचिव बाबू सिंह को पानी निकलवाने तथा परिसर की सफाई कराने के लिए कहा गया है।
दूसरी ओर, ग्राम प्रधान राजू स्वर्णकार ने बताया कि नाले पर निर्माण कर अवैध अतिक्रमण किए जाने के कारण जलभराव की समस्या बार-बार उत्पन्न हो रही है। उन्होंने इस संबंध में एसडीएम से शिकायत कर अतिक्रमण हटवाने की मांग किए जाने की जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने बताया कि फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर इंजन लगवाकर पानी निकलवाने का काम शुरू कराया जाएगा।
पंचायत सचिव की ओर से भी जल निकासी के लिए निर्देश मिलने और इंजन की व्यवस्था किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, विद्यालय परिसर में जमा पानी की पूरी निकासी और अवरुद्ध मार्ग को स्थायी रूप से खुलवाने का इंतजार बना हुआ है।
कब बहाल होगी बच्चों की नियमित पढ़ाई?
ककवन के उच्च प्राथमिक विद्यालय और दोनों आंगनबाड़ी केंद्रों में जलभराव का मामला केवल पानी जमा होने तक सीमित नहीं है। इससे 180 बच्चों की नियमित पढ़ाई और गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में जरूरी है कि संबंधित विभाग आपसी समन्वय से समस्या का स्थायी समाधान निकालें।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित कर्मचारियों को समस्या की जानकारी है, तो जल निकासी का रास्ता खुलवाने में देरी क्यों हो रही है? आखिर बच्चों को कब तक दूसरे स्थानों पर पढ़ाई करनी पड़ेगी?
अब स्थानीय लोगों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। जरूरत इस बात की है कि अस्थायी रूप से पानी निकलवाने के साथ-साथ निकासी मार्ग की समस्या का भी समाधान किया जाए, ताकि विद्यालय परिसर में दोबारा जलभराव न हो और बच्चों को सुरक्षित एवं नियमित शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

