कानपुर CSA में 15 से 17 अक्टूबर तक लगेगा उत्तर क्षेत्रीय किसान मेला, आधुनिक कृषि तकनीकों का होगा प्रदर्शन
रिपोर्ट – हनुमंत सिंह पिंटू
कानपुर नगर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (CSA), कानपुर में 15 से 17 अक्टूबर 2026 तक उत्तर क्षेत्रीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। इस तीन दिवसीय मेले में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत कृषि यंत्रों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन तकनीक और सिंचाई के नए तरीकों से परिचित कराया जाएगा। मेले की थीम ‘सशक्त किसान : आत्मनिर्भर भारत’ रखी गई है। इसका उद्देश्य किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों से जोड़ना, खेती की लागत कम करने के उपायों की जानकारी देना और कृषि क्षेत्र में रोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों को बढ़ावा देना है।
आठ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के किसान होंगे शामिल
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के प्रायोजन में आयोजित होने वाले इस मेले में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली के किसान, बागवान, कृषि उद्यमी तथा तकनीकी प्रदाता भाग लेंगे। आयोजकों के अनुसार, मेले में लगभग 25 से 30 हजार किसानों के पहुंचने की संभावना है।
इस आयोजन के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में खेती करने वाले किसानों को अपने अनुभव साझा करने और कृषि विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा, किसान अपनी फसलों से संबंधित समस्याओं, उत्पादन बढ़ाने के उपायों और नई तकनीकों के इस्तेमाल को लेकर भी जानकारी हासिल कर सकेंगे।
100 स्टॉलों पर दिखेंगी आधुनिक कृषि तकनीकें
किसान मेले में लगभग 100 स्टॉल लगाए जाने की योजना है। इन स्टॉलों के माध्यम से कृषि उपकरणों, आधुनिक मशीनों, फसल उत्पादन तकनीकों और कृषि उद्योग से जुड़ी नवीनतम जानकारियों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही किसानों को बताया जाएगा कि बदलती तकनीक के दौर में खेती को अधिक प्रभावी और लाभकारी बनाने के लिए किन उपायों को अपनाया जा सकता है।
विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्रोन तकनीक पर ध्यान दिया जाएगा। आधुनिक कृषि में इन तकनीकों की मदद से फसलों की निगरानी, खेतों की स्थिति का आकलन और कृषि कार्यों को अधिक व्यवस्थित बनाने की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी। वहीं, माइक्रो सिंचाई तकनीकों के माध्यम से पानी के बेहतर उपयोग और सिंचाई प्रबंधन के तरीकों को भी समझाया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, फसल प्रसंस्करण से संबंधित तकनीकों का प्रदर्शन किसानों के लिए उपयोगी रहेगा। प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्योगों की जानकारी से किसान अपनी उपज का बेहतर उपयोग करने तथा खेती से जुड़े दूसरे व्यावसायिक अवसरों को समझने में सक्षम हो सकेंगे।
गेहूं, मक्का, सरसों और दलहनी फसलों पर रहेगा जोर
मेले में प्रमुख फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकों की जानकारी भी दी जाएगी। किसानों को मक्का, गेहूं, सरसों, जौ, चना और मटर जैसी फसलों की खेती के आधुनिक तरीकों से परिचित कराया जाएगा।
इन फसलों की बेहतर पैदावार के लिए उपयुक्त कृषि पद्धतियों, खेती के वैज्ञानिक तरीकों और उपलब्ध तकनीकी विकल्पों पर जानकारी साझा की जाएगी। इसके साथ ही किसानों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि फसल उत्पादन में नई तकनीकों का उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है।
दरअसल, खेती में बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए केवल उन्नत बीजों का उपयोग ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सिंचाई, पोषण प्रबंधन, कृषि यंत्रों और फसल की देखभाल जैसी प्रक्रियाओं का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। ऐसे में यह मेला किसानों को कृषि विशेषज्ञों और तकनीकी प्रदाताओं से सीधे संवाद करने का अवसर उपलब्ध करा सकता है।
पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को भी मिलेगा महत्व
किसान मेले में कृषि के साथ-साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से संबंधित विषयों को भी प्रमुखता दी जाएगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए किसानों को इससे जुड़ी जानकारियां उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।
इसके अलावा, महिला किसानों की भागीदारी और कृषि आधारित रोजगार के अवसर भी आयोजन के महत्वपूर्ण विषय होंगे। महिलाओं की कृषि कार्यों में भूमिका, कृषि उद्यमिता और ग्रामीण स्तर पर रोजगार की संभावनाओं से संबंधित जानकारियां किसानों के लिए उपयोगी हो सकती हैं।
वर्तमान समय में खेती के साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और कृषि प्रसंस्करण जैसे कार्य किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत बन सकते हैं। इसलिए मेले में इन क्षेत्रों से संबंधित तकनीकों और संभावनाओं की जानकारी किसानों को कृषि आधारित आजीविका के विविध विकल्पों को समझने में मदद करेगी।
लोकगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे आकर्षण
तीन दिवसीय किसान मेले में कृषि तकनीकों के प्रदर्शन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। किसानों के मनोरंजन के लिए लोकगीत, लोक संगीत और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां कार्यक्रम का हिस्सा होंगी।
इससे मेले में कृषि संबंधी जानकारी के साथ क्षेत्रीय संस्कृति और ग्रामीण परंपराओं को भी स्थान मिलेगा। किसान परिवारों तथा विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले प्रतिभागियों को एक साझा मंच पर मिलने और अनुभवों का आदान-प्रदान करने का अवसर मिलेगा।
किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की पहल
CSA कानपुर में आयोजित होने वाला उत्तर क्षेत्रीय किसान मेला किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, उद्यमियों और तकनीकी प्रदाताओं के बीच संवाद को बढ़ावा देने का माध्यम बनेगा। आधुनिक कृषि उपकरणों, वैज्ञानिक खेती, जल प्रबंधन, फसल प्रसंस्करण और कृषि आधारित रोजगार पर केंद्रित यह आयोजन खेती से जुड़े नए विकल्पों की जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर देगा।
कुल मिलाकर, 15 से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाला यह किसान मेला कृषि क्षेत्र में तकनीकी जागरूकता बढ़ाने और किसानों को नवाचारों से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर होगा। मेले के माध्यम से किसानों को अपनी खेती की जरूरतों के अनुरूप तकनीकों को समझने, विशेषज्ञों से संवाद करने और कृषि को अधिक व्यवस्थित एवं आत्मनिर्भर बनाने के उपायों की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

