स्कूल में शिक्षक बने DM अंजनी कुमार सिंह, बच्चों को समझाए अंग्रेजी के टेंस और गणित के सवाल
रिपोर्ट – शरद अवस्थी
लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह का एक अलग अंदाज देखने को मिला। परिषदीय विद्यालय के औचक निरीक्षण के दौरान डीएम केवल व्यवस्थाओं का जायजा लेने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि कक्षा में पहुंचकर बच्चों को पढ़ाते और उनसे सवाल-जवाब करते भी नजर आए। कभी उन्होंने विद्यार्थियों को अंग्रेजी के टेंस समझाए, तो कभी गणित के सवाल पूछकर उनकी शैक्षिक समझ को परखा। सही जवाब देने वाले विद्यार्थियों के लिए उन्होंने तालियां बजवाईं और उनकी सराहना कर उनका उत्साह बढ़ाया।
डीएम का यह संवादात्मक अंदाज विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई को रोचक बनाने वाला रहा। साथ ही, उन्होंने शिक्षकों को भी यह संदेश दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चों को विषय की बुनियादी अवधारणाएं अच्छी तरह समझाना होना चाहिए।
पिपरिया राजापुर स्कूल में डीएम ने परखा बच्चों का शैक्षिक स्तर
लखीमपुर खीरी के विकास क्षेत्र लखीमपुर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय पिपरिया राजापुर में शुक्रवार को जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह औचक निरीक्षण के लिए पहुंचे। विद्यालय में पहुंचने के बाद उन्होंने कक्षाओं का रुख किया और विद्यार्थियों से सीधे संवाद स्थापित किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों की पढ़ाई, विषयों की समझ और सवालों को हल करने की क्षमता का आकलन किया।
सबसे पहले डीएम कक्षा छह में पहुंचे, जहां अंग्रेजी की पढ़ाई चल रही थी। उन्होंने विद्यार्थियों से अंग्रेजी अनुवाद से जुड़े कई सवाल पूछे। इसके बाद अंग्रेजी व्याकरण के टेंस यानी काल की अवधारणा को समझाते हुए बच्चों की विषय पर पकड़ जानने का प्रयास किया।
डीएम ने विद्यार्थियों से सवाल पूछकर यह जानने की कोशिश की कि वे पढ़ाए गए विषय को कितनी अच्छी तरह समझ रहे हैं। बच्चों ने जब सवालों के सही जवाब दिए, तो उन्होंने तालियां बजवाकर उनकी सराहना की। इससे विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ा और कक्षा का माहौल भी अधिक संवादात्मक बन गया।
आशु, संध्या और दिव्यांश ने दिए सही जवाब
अंग्रेजी के बाद जिलाधिकारी ने गणित में विद्यार्थियों की समझ परखी। उन्होंने बच्चों से भाग और गुणा से संबंधित सवाल पूछे, ताकि यह पता चल सके कि विद्यार्थी गणितीय क्रियाओं को समझकर हल कर पा रहे हैं या नहीं।
इस दौरान छात्र आशु गुप्ता ने भाग का सवाल सही हल किया। उसके सही जवाब पर डीएम ने तालियां बजवाईं और उसकी प्रशंसा की। इसी तरह छात्रा संध्या ने गुणा से संबंधित सवाल का सही उत्तर दिया। जिलाधिकारी ने उसकी भी सराहना करते हुए दूसरे विद्यार्थियों को अभ्यास करने और पूरे आत्मविश्वास के साथ सवालों के जवाब देने के लिए प्रोत्साहित किया।
इसके बाद डीएम कक्षा सात में पहुंचे। यहां उन्होंने विद्यार्थियों से अंग्रेजी अनुवाद के प्रश्न पूछे और उनकी भाषा संबंधी समझ को परखा। इसी दौरान छात्र दिव्यांश ने भाग का सवाल हल करके अपनी गणितीय समझ का परिचय दिया। उसके सही जवाब पर भी डीएम ने उत्साहवर्धन किया।
वहीं, कक्षा आठ में पहुंचकर जिलाधिकारी ने गणित के सवाल पूछे और विद्यार्थियों के अधिगम स्तर का आकलन किया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उनका जोर बच्चों की वास्तविक समझ जानने पर रहा। उन्होंने सही जवाब देने वाले विद्यार्थियों की सराहना की, जिससे बच्चों को अपनी क्षमता पहचानने और आगे बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिली।
डीएम ने शिक्षकों को दिया पढ़ाई का महत्वपूर्ण मंत्र
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने शिक्षकों को पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर बनाने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को पूरे मनोयोग से पढ़ाया जाए और प्रत्येक विषय के मूल कॉन्सेप्ट को स्पष्ट किया जाए। इससे विद्यार्थी किसी सवाल का जवाब केवल याद करके देने के बजाय विषय को समझकर उसे हल करने में सक्षम बनेंगे।
उन्होंने शिक्षकों को यह भी समझाया कि कक्षा में किसी अध्याय या टॉपिक को पढ़ा देना ही पर्याप्त नहीं है। यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि विद्यार्थियों ने उस विषय को वास्तव में समझा है या नहीं। इसलिए पढ़ाने के बाद बच्चों से सवाल पूछना, उनकी शंकाओं का समाधान करना और अभ्यास कराना शिक्षण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
डीएम ने विशेष रूप से कहा कि किसी भी टॉपिक को पढ़ाने के बाद उससे संबंधित एक्सरसाइज अवश्य कराई जाए। नियमित अभ्यास से विद्यार्थियों की समझ मजबूत होती है। इसके अलावा, उन्हें अपनी गलतियों को पहचानने और उन्हें सुधारने का अवसर भी मिलता है। परिणामस्वरूप, बच्चों में स्वयं सवाल हल करने का आत्मविश्वास विकसित होता है।
रटने के बजाय समझकर पढ़ने पर जोर
आज के समय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए यह आवश्यक है कि विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखा जाए। उन्हें विषयों की बुनियादी अवधारणाओं को समझने, सवाल पूछने और स्वयं उत्तर खोजने के लिए भी प्रेरित किया जाए। डीएम का निरीक्षण इसी दिशा में शिक्षकों को प्रोत्साहित करने वाला रहा।
अंग्रेजी के टेंस समझाने से लेकर गणित के सवाल पूछने तक, जिलाधिकारी ने विद्यार्थियों के साथ सीधे संवाद के माध्यम से उनकी सीखने की क्षमता को परखा। वहीं, सही उत्तर देने पर तालियां बजवाने से बच्चों को प्रोत्साहन मिला। इस तरह की गतिविधियां कक्षा में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने और पढ़ाई के प्रति रुचि विकसित करने में सहायक हो सकती हैं।
इसके साथ ही, शिक्षकों के लिए भी यह संदेश स्पष्ट रहा कि बच्चों की प्रगति का आकलन केवल परीक्षा के अंकों से नहीं, बल्कि उनकी अवधारणाओं की समझ और सवाल हल करने की क्षमता से भी किया जाना चाहिए।
बेहतर शिक्षा के लिए जरूरी है नियमित अभ्यास
उच्च प्राथमिक विद्यालय पिपरिया राजापुर में डीएम अंजनी कुमार सिंह का निरीक्षण केवल एक औपचारिक प्रशासनिक दौरा नहीं रहा। उन्होंने कक्षा में पहुंचकर बच्चों की पढ़ाई को समझने और शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों को पढ़ाते समय विषय की बुनियादी बातों पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही, हर पाठ के बाद अभ्यास और सवाल-जवाब के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि बच्चों ने क्या सीखा है।

