कानपुर में नवाचार प्रदर्शनी: बच्चों के उत्पादों की मार्केटिंग के लिए बनेगा बाजार, एकीकृत कृषि मॉडल पर भी पहल

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रिपोर्ट- हनुमंत सिंह पिंटू

कानपुर नगर। कानपुर में बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा, वैज्ञानिक सोच और उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जिला स्तरीय नव प्रवर्तन प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, चुन्नीगंज में आयोजित इस प्रदर्शनी में स्कूली बच्चों और नव प्रवर्तकों ने अपने विभिन्न नवाचारों, हस्तनिर्मित वस्तुओं तथा उपयोगी मॉडलों का प्रदर्शन किया। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर और मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन ने प्रदर्शनी का शुभारंभ किया और विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण कर प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की।

प्रदर्शनी के दौरान जिलाधिकारी ने बच्चों की प्रतिभा को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने, उनके उत्पादों को बाजार से जोड़ने और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की सामूहिक मार्केटिंग के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही, किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं को देखते हुए एकीकृत कृषि प्रणाली के मॉडल को जनपद के किसी एक ब्लॉक में लागू करने की दिशा में भी पहल करने को कहा गया।

बच्चों के नवाचारों को मिलेगा बाजार, सामूहिक मार्केटिंग पर जोर

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के अंतर्गत जिला विज्ञान क्लब, कानपुर नगर ने इस प्रदर्शनी का आयोजन किया। इसमें बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता और कौशल के आधार पर तैयार किए गए उत्पादों को प्रदर्शित किया। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने इन उत्पादों का अवलोकन करते हुए कहा कि बच्चों में रचनात्मकता और नए विचारों को साकार करने की अपार क्षमता है। जरूरत इस बात की है कि उन्हें सही मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

उन्होंने कहा कि बच्चों द्वारा तैयार किए गए उत्पाद केवल उनकी शैक्षिक गतिविधियों का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि उनमें उद्यमशीलता और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने की संभावनाएं भी मौजूद हैं। प्रदर्शनी में कुछ बच्चे अपने उत्पाद बेचकर पॉकेट मनी भी अर्जित कर रहे हैं। इससे उनके व्यावहारिक ज्ञान, आत्मविश्वास और आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी को बढ़ावा मिल रहा है।

हालांकि, प्रत्येक बच्चे और स्वयं सहायता समूह के लिए अलग-अलग ब्रांडिंग, प्रचार-प्रसार और मार्केटिंग की व्यवस्था करना आर्थिक एवं व्यावहारिक रूप से कठिन हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन को निर्देश दिया कि जनपद में बच्चों और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की सामूहिक मार्केटिंग के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की कार्ययोजना तैयार की जाए।

इस योजना का उद्देश्य ऐसा बाजार विकसित करना है, जहां स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए उत्पादों को उचित मंच मिल सके। इससे उत्पादों की पहचान बढ़ाने, संभावित ग्राहकों तक पहुंच बनाने और उत्पाद तैयार करने वाले बच्चों एवं समूहों को बिक्री के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

एकीकृत कृषि प्रणाली से किसानों की आय बढ़ाने की पहल

प्रदर्शनी में कानपुर विद्या मंदिर के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत एकीकृत कृषि प्रणाली के मॉडल ने भी जिलाधिकारी का ध्यान आकर्षित किया। इस मॉडल में कृषि से जुड़ी कई गतिविधियों को एक साथ जोड़कर संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की संभावनाएं दिखाई गईं।

मॉडल के अंतर्गत फसल उत्पादन, तालाब आधारित मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, बागवानी और वर्षा जल संचयन जैसे घटकों को शामिल किया गया। इन गतिविधियों को एकीकृत करने का उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना, उत्पादन लागत को कम करने की संभावनाएं तलाशना और किसानों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करना है।

जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को निर्देशित किया कि इस मॉडल को जनपद के किसी एक ब्लॉक में प्रारंभ करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाए। इसके माध्यम से कृषि से संबंधित विभिन्न गतिविधियों को एक-दूसरे का पूरक बनाकर किसानों को अतिरिक्त रोजगार और आय के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा सकता है।

एकीकृत कृषि प्रणाली में फसल उत्पादन के साथ मत्स्य पालन, पशुपालन या बागवानी जैसी गतिविधियां अपनाने से किसान अपने उपलब्ध संसाधनों का विविध उपयोग कर सकते हैं। वहीं, वर्षा जल संचयन जैसी व्यवस्थाएं पानी के बेहतर प्रबंधन में सहायक हो सकती हैं। हालांकि, किसी क्षेत्र में इस मॉडल को लागू करने से पहले वहां की भौगोलिक परिस्थितियों, पानी की उपलब्धता, किसानों की जरूरतों और संसाधनों का आकलन करना आवश्यक होगा।

बच्चों के मॉडल से समाज की समस्याओं के समाधान की उम्मीद

जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों द्वारा तैयार किए गए मॉडल केवल विद्यालयों तक सीमित रहने वाले प्रोजेक्ट नहीं हैं। इनमें कृषि, पर्यावरण, उत्पादन और आजीविका से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं के समाधान की संभावनाएं भी हैं। यदि ऐसे नवाचारों को उचित मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन मिलें, तो उन्हें उपयोगी परियोजनाओं के रूप में विकसित किया जा सकता है।

उन्होंने बच्चों की रचनात्मकता को बाजार और उद्यमशीलता से जोड़ने पर जोर दिया। इससे विद्यार्थियों को अपने विचारों को उत्पाद में बदलने, उसकी उपयोगिता समझने और ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप काम करने का अनुभव मिल सकता है। साथ ही, उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण और व्यावहारिक कौशल का विकास भी होगा।

प्रदर्शनी में इन प्रतिभागियों ने प्रदर्शित किए उत्पाद

जिला स्तरीय नव प्रवर्तन प्रदर्शनी में विभिन्न प्रतिभागियों ने हस्तनिर्मित वस्तुओं, सजावटी उत्पादों, कपड़ों, कॉस्मेटिक सामग्री और खाद्य पदार्थों से जुड़े उत्पादों का प्रदर्शन किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रमुख प्रतिभागियों और उनके उत्पादों का विवरण इस प्रकार है:

  1. कविता गुप्ता: त्योहारों की सजावट से संबंधित उत्पाद।
  2. फलक़: हस्तशिल्प, दुपट्टे एवं कॉस्मेटिक सामग्री।
  3. गौरी तिवारी: हस्तनिर्मित वस्तुएं।
  4. आवनी: फूलों के गमले।
  5. नूर फातमा: महिला ग्रामोद्योग से संबंधित उत्पाद।
  6. रिया एवं प्रो. किरण मिश्रा: खाद्य पदार्थ एवं हस्तशिल्प।
  7. तस्मिया अंसारी: कपड़े एवं वस्त्र सामग्री।
  8. इकरा फातिमा: कपड़े एवं वस्त्र सामग्री।

प्रदर्शनी में प्रतिभागियों के उत्पादों को देखने के साथ उनके प्रयासों को प्रोत्साहित किया गया। आयोजकों का उद्देश्य बच्चों और नव प्रवर्तकों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराना है।

स्थानीय उत्पादों और नवाचारों को बढ़ावा देने की दिशा में कदम

कानपुर में आयोजित यह प्रदर्शनी शिक्षा, उद्यमशीलता और कृषि नवाचार को एक साथ जोड़ने की संभावनाओं को सामने लाती है। बच्चों एवं स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के लिए सामूहिक मार्केटिंग की व्यवस्था विकसित होने पर स्थानीय उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने में मदद मिल सकती है। वहीं, एकीकृत कृषि प्रणाली को किसी एक ब्लॉक में लागू करने की कार्ययोजना किसानों के लिए आय के विविध विकल्प तलाशने का माध्यम बन सकती है।

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