सोनिया आर्या मामले में जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई का सवाल, पुलिस अधिकारियों से मांगा जा रहा जवाब

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रिपोर्ट – शरद अवस्थी 

उत्तर प्रदेश: एक महिला की शिकायत पर दर्ज मामले में पुलिस की कार्रवाई और बाद में हुई विभागीय जांच को लेकर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि मामले में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर जांच कराई गई थी और क्षेत्राधिकारी नगर ने अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी थी। इसके बावजूद जांच रिपोर्ट पर आगे क्या कार्रवाई हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है। अब इस प्रकरण में शिकायत और जांच रिपोर्ट के पुलिस अधीक्षक कार्यालय से गायब होने का आरोप भी सामने आया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

यह मामला सोनिया आर्या से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायत में तत्कालीन सदर कोतवाली पुलिस की कार्रवाई, विवेचक की भूमिका और जांच रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में अब यह जानना महत्वपूर्ण हो गया है कि जांच रिपोर्ट की वर्तमान स्थिति क्या है और यदि रिपोर्ट में किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही सामने आई थी, तो उस पर विभागीय स्तर पर क्या कदम उठाए गए।

तत्कालीन एसपी ने जांच के दिए थे निर्देश

शिकायत में दिए गए विवरण के अनुसार, तत्कालीन पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सोनिया आर्या को न्याय दिलाने का भरोसा दिया था। इसके बाद उन्होंने प्रकरण की गहराई से जांच कराने के लिए क्षेत्राधिकारी नगर विवेक तिवारी को 17 नवंबर 2025 को निर्देशित किया था।

शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि निर्देश मिलने के बाद क्षेत्राधिकारी नगर ने मामले की जांच की। जांच के दौरान विवेचक की भूमिका पर सवाल उठे और उन्हें दोषी करार दिए जाने की बात कही गई। इसके बाद 28 दिसंबर 2025 को जांच रिपोर्ट पुलिस कार्यालय में प्रस्तुत किए जाने का दावा किया गया है।

अब इस रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता पक्ष जानना चाहता है कि जांच में यदि पुलिसकर्मी की भूमिका पर प्रतिकूल टिप्पणी की गई थी, तो उसके आधार पर विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया कहां तक पहुंची।

28 दिसंबर को रिपोर्ट सौंपने का दावा

शिकायत में उल्लेख किया गया है कि क्षेत्राधिकारी नगर विवेक तिवारी ने 28 दिसंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट शिकायत प्रकोष्ठ की डाकबही के क्रमांक 178 पर सौंप दी थी। दावा है कि जांच रिपोर्ट के साथ संबंधित शिकायत पत्र भी पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आगे की कार्रवाई के लिए भेजा गया था।

आरोप के मुताबिक, इसके बाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय में रिपोर्ट को अग्रिम कार्रवाई के लिए वाचक इंस्पेक्टर हरिकेश राय को सौंपा गया था। हालांकि, शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि रिपोर्ट सौंपे जाने के बावजूद अब तक कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।

यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि यदि रिपोर्ट कार्यालय में प्राप्त हुई थी, तो उस पर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई गई? क्या रिपोर्ट के आधार पर विभागीय जांच या अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई, अथवा किसी अन्य स्तर पर निर्णय लिया गया? इन सवालों के स्पष्ट जवाब सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति साफ हो सकेगी।

एसपी कार्यालय से रिपोर्ट गायब होने का आरोप

शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया है कि अब पुलिस अधीक्षक ख्याति गर्ग और उनके कार्यालय के वाचक इंस्पेक्टर हरिकेश राय से जांच रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई के संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। इसी बीच शिकायत प्रकोष्ठ के प्रभारी की ओर से कथित तौर पर लिखित पत्र देकर अपर पुलिस अधीक्षक को सूचित किया गया कि संबंधित जांच रिपोर्ट उनके कार्यालय में उपलब्ध नहीं है।

इस घटनाक्रम ने मामले को और गंभीर बना दिया है। यदि रिपोर्ट वास्तव में कार्यालय में प्राप्त हुई थी, तो उसके वर्तमान रिकॉर्ड और स्थिति का पता लगाना आवश्यक होगा। वहीं, रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि दस्तावेज किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में अनुपलब्ध हुआ।

हालांकि, रिपोर्ट के गायब होने या जानबूझकर हटाए जाने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले कार्यालयी रिकॉर्ड, डाकबही और संबंधित अधिकारियों के स्पष्टीकरण की जांच जरूरी है।

मानवाधिकार महानिदेशालय की जांच का भी उल्लेख

शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि इसी प्रकरण में मानवाधिकार महानिदेशालय के अधिकारी संदीप सालुंके ने पहले ही इंस्पेक्टर चंद्रशेखर सिंह और दरोगा साधना यादव को दोषी करार दिया था। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित जांच आदेश, रिपोर्ट या आधिकारिक दस्तावेज का उपलब्ध होना आवश्यक है।

यदि किसी सक्षम अधिकारी की जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका पर प्रतिकूल निष्कर्ष सामने आया था, तो उसके बाद की कार्रवाई और वर्तमान विभागीय स्थिति की जानकारी सार्वजनिक होना मामले में पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि अलग-अलग जांचों के निष्कर्ष क्या थे और उनके आधार पर क्या कदम उठाए गए।

अब कार्रवाई और जवाबदेही पर टिकी निगाहें

सोनिया आर्या से जुड़े इस मामले में अब मुख्य सवाल जांच रिपोर्ट की स्थिति, शिकायत के रिकॉर्ड और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर हैं। शिकायतकर्ता पक्ष चाहता है कि रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई का विवरण दिया जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाए।

ऐसे मामलों में शिकायत की प्राप्ति, जांच रिपोर्ट की फाइल मूवमेंट और विभागीय कार्रवाई का रिकॉर्ड सुरक्षित रहना बेहद महत्वपूर्ण है। इससे न केवल शिकायतकर्ता को स्थिति की जानकारी मिलती है, बल्कि पुलिस प्रशासन की जवाबदेही भी सुनिश्चित होती है।

फिलहाल, उपलब्ध विवरण शिकायतकर्ता पक्ष के आरोपों और उसके द्वारा बताए गए घटनाक्रम पर आधारित है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय, संबंधित वाचक और अन्य अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही रिपोर्ट की वास्तविक स्थिति और कार्रवाई में हुई देरी के कारणों पर स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जा सकेगा। अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस मामले में दस्तावेजी रिकॉर्ड की जांच कर स्थिति स्पष्ट करता है या नहीं।

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