कानपुर में दो दिवसीय फ्लो साइटोमेट्री वर्कशॉप शुरू, ब्लड कैंसर की जांच में तकनीक के महत्व पर चर्चा
रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा
कानपुर: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर की मेडिकल रिसर्च यूनिट (MRU) के तत्वावधान में बुधवार से दो दिवसीय फ्लो साइटोमेट्री वर्कशॉप का आयोजन शुरू हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली इस आधुनिक तकनीक के अनुसंधान और क्लिनिकल उपयोग से जुड़े पहलुओं की जानकारी देना है। कार्यक्रम में चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने फ्लो साइटोमेट्री की भूमिका, इसके संभावित उपयोग और रक्त संबंधी बीमारियों की जांच में इसकी उपयोगिता पर चर्चा की।
वर्कशॉप का शुभारंभ जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला, उपप्रधानाचार्य डॉ. ऋचा गिरी, मेडिकल रिसर्च यूनिट के सचिव डॉ. सौरभ अग्रवाल तथा अन्य संकाय सदस्यों ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक और संबंधित विभागों के विशेषज्ञ भी मौजूद रहे।
फ्लो साइटोमेट्री के अनुसंधान और क्लिनिकल महत्व पर चर्चा
कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर प्राचार्य डॉ. संजय काला ने फ्लो साइटोमेट्री के अनुसंधान और क्लिनिकल महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह तकनीक रक्त से संबंधित कुछ गंभीर बीमारियों, विशेषकर ब्लड कैंसर यानी ल्यूकीमिया, की जांच में उपयोगी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि फ्लो साइटोमेट्री के माध्यम से बीमारी से जुड़ी कोशिकाओं की पहचान और उनके गुणों का विश्लेषण किया जा सकता है। इसके अलावा उपचार के बाद बीमारी की स्थिति की निगरानी में भी इस तकनीक की भूमिका हो सकती है। प्राचार्य के अनुसार, ब्लड कैंसर के मामलों में बीमारी के दोबारा लौटने यानी रिलैप्स की पहचान में भी यह तकनीक चिकित्सकों को महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा सकती है।
रक्त और बोन मैरो की कोशिकाओं का विश्लेषण
वर्कशॉप के दौरान डॉ. सोनल अमित ने फ्लो साइटोमेट्री तकनीक से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस तकनीक के माध्यम से रक्त और बोन मैरो की कोशिकाओं का बहु-पैरामीटर स्तर पर विश्लेषण किया जा सकता है।
फ्लो साइटोमेट्री में अलग-अलग कोशिकाओं की विशेषताओं का एक साथ अध्ययन किया जाता है। इससे चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को कोशिकाओं की प्रकृति तथा उनमें मौजूद विभिन्न मार्करों के बारे में जानकारी प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
इस तकनीक का इस्तेमाल विशेष रूप से उन स्थितियों में महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां अलग-अलग प्रकार की रक्त संबंधी बीमारियों के बीच अंतर करना आवश्यक होता है। इसी वजह से मेडिकल रिसर्च और पैथोलॉजी के क्षेत्र में फ्लो साइटोमेट्री का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
ल्यूकेमिया और लिम्फोमा की पहचान में उपयोग
डॉ. सोनल अमित के अनुसार, फ्लो साइटोमेट्री के जरिए विभिन्न प्रकार के ल्यूकेमिया और लिम्फोमा के बीच अंतर करने में सहायता मिल सकती है। साथ ही इससे बीमारी की सही श्रेणी निर्धारित करने और रोगी की स्थिति को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है।
किसी मरीज में बीमारी की प्रकृति और प्रकार की सही जानकारी उपचार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में आधुनिक जांच तकनीकों के प्रशिक्षण से चिकित्सा संस्थानों में कार्यरत डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को जांच प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलता है।
इसके अलावा, उपचार के दौरान मरीज की प्रतिक्रिया की निगरानी में भी फ्लो साइटोमेट्री उपयोगी हो सकती है। इससे चिकित्सकों को बीमारी की स्थिति के संबंध में अतिरिक्त जानकारी मिल सकती है।
विशेषज्ञ दे रहे हैं तकनीकी प्रशिक्षण
दो दिवसीय वर्कशॉप में फ्लो साइटोमेट्री से जुड़े तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण डॉ. सोनल अमित, आचार्य एवं विभागाध्यक्ष, पैथोलॉजी विभाग, एएसएमसी कानपुर देहात तथा वरिष्ठ साइंटिस्ट डॉ. शिव कुमार त्रिपाठी द्वारा दिया जा रहा है।
वर्कशॉप में प्रतिभागियों को फ्लो साइटोमेट्री के सिद्धांतों के साथ-साथ इसके अनुसंधान और क्लिनिकल उपयोग से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। इस दौरान तकनीक के माध्यम से कोशिकाओं की पहचान और विश्लेषण की प्रक्रिया को समझाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
इस तरह की कार्यशालाएं चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ रिसर्च के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। खासकर आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों की जानकारी चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को नई जांच पद्धतियों से परिचित कराने में मदद करती है।
मेडिकल रिसर्च यूनिट की पहल
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की मेडिकल रिसर्च यूनिट की ओर से आयोजित इस वर्कशॉप को चिकित्सा अनुसंधान और प्रशिक्षण से जोड़कर देखा जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में आधुनिक तकनीकों के संबंध में नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होने से चिकित्सकों और संकाय सदस्यों को नई तकनीकों के बारे में व्यावहारिक जानकारी हासिल करने का अवसर मिलता है।
फ्लो साइटोमेट्री जैसी तकनीक का उपयोग पैथोलॉजी और हेमेटोलॉजी से जुड़े कई शोध और जांच कार्यों में किया जाता है। इसलिए इस विषय पर विशेषज्ञ प्रशिक्षण मेडिकल रिसर्च को बढ़ावा देने की दिशा में उपयोगी कदम माना जा सकता है।
वरिष्ठ डॉक्टर और विशेषज्ञ रहे मौजूद
वर्कशॉप के शुभारंभ अवसर पर डॉ. एमपीसी सिंह, पीएमएसएसवाई के नोडल अधिकारी डॉ. मनीष सिंह, ट्रांसफ्यूजन विभाग की नोडल डॉ. लुबना खान समेत कई वरिष्ठ डॉक्टर और संकाय सदस्य मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने चिकित्सा अनुसंधान में आधुनिक तकनीकों के महत्व पर चर्चा की। साथ ही प्रतिभागियों को फ्लो साइटोमेट्री की कार्यप्रणाली और इसके संभावित क्लिनिकल उपयोग के बारे में जानकारी दी गई।
आधुनिक तकनीक से मेडिकल रिसर्च को मिलेगा प्रशिक्षण
दो दिवसीय फ्लो साइटोमेट्री वर्कशॉप का मुख्य फोकस आधुनिक जांच तकनीक के बारे में चिकित्सकीय और शोध संबंधी समझ विकसित करना है। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को रक्त और बोन मैरो से जुड़ी कोशिकाओं के विश्लेषण की आधुनिक पद्धति को समझने का अवसर मिल रहा है।
कुल मिलाकर, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में शुरू हुई यह कार्यशाला चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों के प्रशिक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विशेषज्ञों द्वारा दिए जा रहे प्रशिक्षण से प्रतिभागियों को फ्लो साइटोमेट्री के वैज्ञानिक और क्लिनिकल पहलुओं की जानकारी मिल रही है। कार्यशाला के दूसरे दिन भी तकनीक से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण और चर्चा जारी रहेगी।

