कानपुर में फंगल इंफेक्शन पर सर्वे: 114 मरीजों ने बिना सलाह लगाई स्टेरॉयड क्रीम, दिखे साइड इफेक्ट

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रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा 

कानपुर: फंगल इंफेक्शन यानी दाद-खाज जैसी त्वचा संबंधी समस्या में बिना विशेषज्ञ की सलाह के क्रीम का इस्तेमाल करना परेशानी बढ़ा सकता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के चर्म रोग विभाग की ओर से किए गए एक सर्वे में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें मरीजों ने मेडिकल स्टोर संचालकों, रिश्तेदारों या अप्रशिक्षित लोगों की सलाह पर स्टेरॉयड युक्त क्रीम का इस्तेमाल किया। शुरुआत में राहत मिलने के बावजूद बाद में कई मरीजों में त्वचा संबंधी अलग-अलग समस्याएं देखने को मिलीं।

चर्म रोग विभाग ने छह सप्ताह से अधिक पुराने फंगल इंफेक्शन से पीड़ित 200 मरीजों को सर्वे में शामिल किया। इनमें से 114 मरीज ऐसे पाए गए, जो विशेषज्ञ की सलाह के बिना स्टेरॉयड युक्त क्रीम का इस्तेमाल कर रहे थे। विभाग के अनुसार, इन मरीजों में क्रीम के इस्तेमाल से जुड़े विभिन्न दुष्प्रभाव भी सामने आए।

200 मरीजों पर किया गया सर्वे

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के चर्म रोग विभाग ने फंगल इंफेक्शन से जूझ रहे मरीजों की स्थिति और उनके उपचार के तरीके को समझने के लिए यह सर्वे किया। इसमें छह सप्ताह से अधिक समय से इंफेक्शन से पीड़ित 200 मरीजों को शामिल किया गया।

सर्वे के दौरान मरीजों से यह जानकारी ली गई कि उन्होंने फंगल इंफेक्शन के लिए किस तरह की दवाओं या क्रीम का इस्तेमाल किया और उन्हें उपचार की सलाह किसने दी थी। इस दौरान बड़ी संख्या में मरीजों के बिना चिकित्सकीय परामर्श के स्टेरॉयड युक्त क्रीम लगाने की जानकारी सामने आई।

विभाग के अनुसार, 114 मरीजों ने बिना विशेषज्ञ की सलाह के ऐसी क्रीमों का इस्तेमाल किया था। इनमें लोबेट जीएम, सल्फाज एसएन, पैंडर्म, क्वाड्रिडर्म, केटी 5 और बेटनोवेट जैसी क्रीमों के इस्तेमाल की जानकारी मिली।

मेडिकल स्टोर और अप्रशिक्षित लोगों की सलाह पर इस्तेमाल

सर्वे में शामिल मरीजों ने बताया कि उन्होंने कई बार मेडिकल स्टोर संचालकों, रिश्तेदारों या अप्रशिक्षित व्यक्ति की सलाह पर क्रीम खरीदी थी। कुछ मरीजों को शुरुआत में क्रीम लगाने के बाद खुजली या अन्य लक्षणों में राहत महसूस हुई।

हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार यह राहत बीमारी के पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं मानी जानी चाहिए। कई मरीजों ने बताया कि क्रीम बंद करने के बाद समस्या दोबारा सामने आती थी और कुछ मामलों में लक्षण पहले की तुलना में अधिक परेशान करने वाले महसूस हुए।

इस वजह से चर्म रोग विशेषज्ञों ने फंगल इंफेक्शन के उपचार में स्वयं दवा लेने या बिना चिकित्सकीय सलाह के क्रीम लगाने से बचने की सलाह दी है।

26 मरीजों में त्वचा पर स्ट्रैच मार्क्स

चर्म रोग विभागाध्यक्ष डॉ. डी. पी. शिवहरे के अनुसार, सर्वे में स्टेरॉयड युक्त क्रीम इस्तेमाल करने वाले मरीजों में कई तरह के त्वचा संबंधी दुष्प्रभाव सामने आए।

विभाग के मुताबिक, 26 मरीजों की त्वचा पर गहरे स्ट्रैच मार्क्स पाए गए। वहीं, 57 मरीजों की त्वचा अत्यधिक संवेदनशील हो गई थी। इन मरीजों में लालिमा और तेज खुजली जैसी शिकायतें भी सामने आईं।

इसके अलावा 15 मरीजों में बैक्टीरियल इंफेक्शन से जुड़े लक्षण मिले। इन मरीजों की त्वचा पर मवाद वाले छोटे-छोटे दाने होने की जानकारी सामने आई।

36 मरीज क्रीम छोड़ना चाहते थे

सर्वे में एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि 36 मरीजों ने क्रीम छोड़ने में परेशानी की बात कही। मरीजों के अनुसार, क्रीम बंद करने पर खुजली और जलन बढ़ जाती थी, जिसके कारण वे दोबारा उसका इस्तेमाल करने लगते थे।

डॉ. शिवहरे के अनुसार, फंगल इंफेक्शन के मामले में स्टेरॉयड युक्त क्रीम का अनुचित इस्तेमाल बीमारी की स्थिति को जटिल बना सकता है। इसलिए मरीजों को उपचार शुरू करने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

सर्वे में विभाग को ऐसा कोई मरीज नहीं मिला, जिसका फंगल इंफेक्शन इन क्रीमों के इस्तेमाल से पूरी तरह ठीक हुआ हो। हालांकि, इस निष्कर्ष को इसी सर्वे में शामिल मरीजों के संदर्भ में समझना चाहिए।

बिना स्टेरॉयड क्रीम वाले मरीजों ने भी की गलती

सर्वे में केवल स्टेरॉयड क्रीम इस्तेमाल करने वाले मरीजों की समस्या ही सामने नहीं आई। ऐसे कुछ मरीज भी मिले, जिन्होंने स्टेरॉयड का इस्तेमाल नहीं किया था, लेकिन उन्होंने फंगल इंफेक्शन का उपचार निर्धारित अवधि तक पूरा नहीं किया।

जानकारी के अनुसार, कुछ मरीजों ने लक्षणों में थोड़ा सुधार होने के बाद दवाएं बीच में ही बंद कर दी थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संक्रमण के उपचार में चिकित्सक द्वारा बताई गई अवधि और तरीके का पालन करना जरूरी है।

इसलिए केवल क्रीम का चयन ही नहीं, बल्कि इलाज को समय से पहले रोक देना भी समस्या को दोबारा बढ़ा सकता है।

फंगल इंफेक्शन में विशेषज्ञ की सलाह जरूरी

डॉ. डी. पी. शिवहरे ने बताया कि सर्वे का उद्देश्य लोगों को त्वचा संबंधी संक्रमण के उपचार को लेकर जागरूक करना था। उन्होंने मरीजों से अपील की कि फंगल इंफेक्शन होने पर अपनी मर्जी से कोई क्रीम न लगाएं।

विशेषज्ञ के अनुसार, स्टेरॉयड युक्त क्रीम के अनुचित इस्तेमाल से त्वचा पतली और संवेदनशील हो सकती है। इसके कारण फंगल इंफेक्शन के उपचार में भी परेशानी बढ़ सकती है।

ऐसे में मरीजों को चाहिए कि त्वचा पर दाद, खुजली, लालिमा या अन्य लक्षण दिखाई देने पर पहले चर्म रोग विशेषज्ञ से जांच और सलाह लें। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा का इस्तेमाल निर्धारित तरीके से करें और उपचार बीच में बंद करने से पहले चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।

मरीज इन बातों का रखें ध्यान

फंगल इंफेक्शन के लक्षण दिखाई देने पर किसी परिचित, मेडिकल स्टोर या अप्रशिक्षित व्यक्ति की सलाह पर क्रीम खरीदने से बचना चाहिए। खासतौर पर ऐसी क्रीमों का इस्तेमाल बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए, जिनमें स्टेरॉयड मौजूद हो सकता है।

इसके अलावा, इलाज शुरू होने के बाद केवल लक्षण कम होने को बीमारी पूरी तरह खत्म होने का संकेत मानकर दवा बंद नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर से दोबारा सलाह लेकर ही उपचार में बदलाव करना बेहतर है।

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के चर्म रोग विभाग का यह सर्वे त्वचा संबंधी समस्याओं में स्वयं दवा लेने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेने की जरूरत पर जोर देता है। समय पर सही जांच और चिकित्सकीय सलाह से मरीज अनावश्यक दवाओं के इस्तेमाल और उनसे जुड़ी संभावित परेशानियों से बच सकते हैं।

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