मथुरा में हुआ रामजन्म लीला का भव्य मंचन, छप्पन भोग के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु – झूम-झूम कर लगाए जयकारे

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज 

मथुरा: श्री रामलीला सभा (रजि.) मथुरा के तत्वावधान में रामलीला आयोजन के अंतर्गत श्रीराम जन्म लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। असकुंडा बाजार में शाम 5 बजे आकाशवाणी प्रसंग और इसके बाद श्रीकृष्ण जन्मस्थान लीला मंच पर रात 8 बजे से श्रीराम जन्म, बधाई गायन तथा मनभावन छप्पन भोग का आयोजन हुआ। धार्मिक वातावरण में हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और श्रीराम जन्म लीला के दर्शन किए।

कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रीराम के जन्म से जुड़े प्रसंगों का मंचन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया। वहीं, लीला मंच पर सजाए गए छप्पन भोग ने श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के बाल स्वरूपों को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया। इसके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

असकुंडा बाजार में हुआ आकाशवाणी प्रसंग

रामलीला आयोजन की शुरुआत असकुंडा बाजार में आकाशवाणी प्रसंग से हुई। मंचन के दौरान धार्मिक कथा के अनुसार पृथ्वी पर असुरों के अत्याचार बढ़ने और साधु-संतों, ऋषि-मुनियों के यज्ञ एवं धार्मिक अनुष्ठानों में बाधा उत्पन्न होने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया।

कथा के अनुसार, पृथ्वी इन परिस्थितियों से व्यथित होकर गाय का रूप धारण कर ब्रह्मा सहित अन्य देवताओं के पास पहुंची। इसके बाद देवताओं ने भगवान श्रीविष्णु की आराधना कर पृथ्वी के कष्टों को दूर करने की प्रार्थना की। इसी क्रम में भगवान श्रीविष्णु की ओर से आकाशवाणी होने का प्रसंग मंचित किया गया, जिसमें पृथ्वी पर अवतार लेकर अधर्म का नाश करने और पृथ्वी के भार को कम करने का संदेश दिया गया।

आकाशवाणी प्रसंग के दौरान भगवान श्रीविष्णु के चतुर्भुज स्वरूप के मनोहारी दर्शन भी कराए गए। इस अवसर पर नया बाजार व्यवसायी समिति और पं. पांचालाल विसंबर दयाल परिवार की ओर से सेवा की गई।

जन्मस्थान लीला मंच पर हुआ श्रीराम जन्म

इसके बाद श्रीकृष्ण जन्मस्थान लीला मंच पर श्रीराम जन्म लीला का मंचन हुआ। कथा के अनुसार अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ ने कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ के परामर्श पर पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी यज्ञ के फलस्वरूप महारानी कौशल्या के यहां भगवान श्रीराम का जन्म हुआ।

इसी क्रम में कैकेयी के यहां भरत और सुमित्रा के यहां लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न के जन्म का प्रसंग भी प्रस्तुत किया गया। चारों राजकुमारों के जन्म से अयोध्या में उत्सव का वातावरण बन गया। राजा दशरथ की ओर से राजकोष से धन और उपहार बांटे जाने का प्रसंग भी लीला में दिखाया गया।

बधाई गायन और नृत्य ने बांधा समां

श्रीराम जन्म की खुशी में अयोध्यावासियों के आनंद और उत्सव का दृश्य मंचन का प्रमुख आकर्षण रहा। श्रद्धालुओं ने बधाई गायन के माध्यम से भगवान श्रीराम के जन्म की खुशी मनाई। वहीं, राजमहल के प्रसंग में ढाढ़ी, ढाढ़िन और भांडों द्वारा बधाई गीत एवं नृत्य प्रस्तुत किए गए।

इसके बाद गुरु वशिष्ठ द्वारा चारों भाइयों के नामकरण संस्कार का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। लीला के दौरान कलाकारों ने धार्मिक प्रसंगों को संवाद और अभिनय के माध्यम से जीवंत किया।

छप्पन भोग रहा विशेष आकर्षण

श्रीराम जन्म के अवसर पर लीला मंच पर मनभावन छप्पन भोग का आयोजन भी किया गया। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के बाल स्वरूपों को छप्पन प्रकार के भोग अर्पित किए गए। भव्य रूप से सजाए गए छप्पन भोग को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।

श्रद्धालुओं ने छप्पन भोग के दर्शन किए और धार्मिक आयोजन में भाग लेकर पुण्य लाभ प्राप्त किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्ति और उत्सव का माहौल बना रहा।

आयोजन में इन लोगों का रहा सहयोग

प्रसाद व्यवस्था में मुख्य संयोजक प्रदीप अग्रवाल पोशाक वाले और अनिल अग्रवाल नोहझील के साथ दिनेश सदर तथा रवि प्रकाश साड़ी का विशेष योगदान रहा। आयोजन में रामलीला सभा से जुड़े पदाधिकारियों और सहयोगियों ने भी व्यवस्थाओं में अपनी भूमिका निभाई।

लीला प्रदर्शन के दौरान सभा के नीति निदेशक गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, जयन्ती प्रसाद अग्रवाल, जुगल किशोर अग्रवाल, नंदकिशोर अग्रवाल, मूलचंद गर्ग, प्रदीप सर्राफ पी.के., विजय सर्राफ किरोड़ी, शैलेश अग्रवाल सर्राफ, अजय मास्टर, पं. शशांक पाठक, संजय बिजली, विनोद सर्राफ, नगेन्द्रमोहन मित्तल, अनूप टेंट, मोहित अग्रवाल, हिमांशू सूतिया, उमेश बिजली, विष्णु शर्मा, गौरव अग्रवाल, अमन कुमार, चरत लाल सर्राफ, अंशुमान गोयल, रासबिहारी, मदन मोहन, रवि मंगलम, विवेक सूतिया, बिशन सूतिया, रवि मास्टर, डॉ. कुलदीप अग्रवाल, अंकुर गर्ग, शुभम बिजली और कुशाग्र सहित अन्य लोग प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

8 अक्टूबर को ताड़का वध लीला का आयोजन

रामलीला सभा की ओर से आगामी कार्यक्रम की भी जानकारी दी गई। 8 अक्टूबर को शाम 5 बजे श्रीकृष्ण जन्मस्थान से ताड़का वध के लिए भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की सवारी महर्षि विश्वामित्र के साथ निकलेगी।

यह सवारी डीग गेट, मंडी रामदास, चौक बाजार और स्वामी घाट होते हुए राजाधिराज बाजार पहुंचेगी। यहां ताड़का वध लीला का मंचन किया जाएगा। इसके बाद रात 7 बजे श्रीकृष्ण जन्मस्थान लीला मंच पर जानकी जन्म, ताड़का वध और महर्षि गौतम-अहिल्या चरित्र लीला का मंचन होगा।

इस तरह मथुरा में चल रही रामलीला के माध्यम से धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को मंच पर जीवंत किया जा रहा है। आगामी आयोजनों को लेकर भी श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है।