सोनभद्र में पैसा लेते वीडियो वायरल, सर्वे कानूनगो निलंबित; ADM न्यायिक को सौंपी जांच

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रिपोर्ट – ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी 

सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में शासकीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर जिला प्रशासन ने कार्रवाई की है। तहसील ओबरा में तैनात सर्वे कानूनगो एवं प्रभारी पेशकार सूबेदार सिंह का एक व्यक्ति से कथित तौर पर पैसा लेते हुए वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने उन्हें निलंबित कर दिया है। वीडियो सामने आने के बाद मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी एवं अभिलेख अधिकारी चर्चित गौड़ ने प्रारंभिक जांच कराई। जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई।

प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच की जिम्मेदारी अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) को सौंपी है। जांच अधिकारी प्रकरण से जुड़े सभी तथ्यों की पड़ताल कर नियमानुसार अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

पैसा लेते वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने लिया संज्ञान

जानकारी के अनुसार, सर्वे कानूनगो सूबेदार सिंह का एक व्यक्ति से पैसा लेने संबंधी वीडियो सामने आया था। इसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामला प्रशासन के संज्ञान में पहुंचने के बाद इसकी गंभीरता को देखते हुए प्रारंभिक स्तर पर जांच कराई गई।

जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने प्रकरण का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारी की भूमिका की जांच कराई। प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया दोष सामने आने के बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की।

हालांकि, वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधि के पीछे पूरा मामला क्या है और पैसा किस उद्देश्य से लिया गया था, इसकी विस्तृत जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। इसी वजह से प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच के लिए सक्षम अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी है।

ओबरा तहसील में तैनात थे सूबेदार सिंह

सूबेदार सिंह तहसील ओबरा में सर्वे कानूनगो के पद पर तैनात थे। इसके साथ ही वह प्रभारी पेशकार और कार्यालय सहायक अभिलेख अधिकारी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया है।

निलंबन अवधि के दौरान उन्हें तहसील घोरावल से संबद्ध किया गया है। प्रशासन की ओर से उन्हें संबद्ध कार्यालय में उपस्थित रहकर अपने निर्धारित दायित्वों का निर्वहन करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा, निलंबन अवधि में सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना अनुपस्थित नहीं रहने का भी निर्देश दिया गया है। इस तरह प्रशासन ने निलंबन के साथ-साथ उनके संबद्धीकरण और उपस्थिति को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

अपर जिलाधिकारी न्यायिक करेंगे विस्तृत जांच

मामले की पूरी तस्वीर सामने लाने के लिए अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) को जांच अधिकारी नामित किया गया है। जांच अधिकारी वीडियो से जुड़े तथ्यों के साथ-साथ संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध दस्तावेजों की पड़ताल कर सकते हैं।

इसके अलावा, यह भी देखा जाएगा कि कथित तौर पर पैसा लेने की घटना किस परिस्थिति में हुई और क्या इसमें किसी सरकारी कार्य या प्रक्रिया से संबंधित अनियमितता शामिल थी। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

प्रशासन ने जांच अधिकारी को नियमानुसार विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की विभागीय कार्रवाई निर्धारित की जाएगी।

प्रशासन ने पारदर्शिता को लेकर दिया स्पष्ट संदेश

जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने कहा है कि शासकीय कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी कार्यों में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

प्रशासन की इस कार्रवाई को सरकारी कार्यालयों में कार्यप्रणाली और जवाबदेही सुनिश्चित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, मामले में अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

वायरल वीडियो की जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति

सोशल मीडिया पर किसी वीडियो के वायरल होने के बाद उससे जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि जरूरी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने प्रारंभिक स्तर पर मामले का संज्ञान लिया और अब विस्तृत जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

फिलहाल सूबेदार सिंह निलंबित हैं और उन्हें तहसील घोरावल से संबद्ध किया गया है। वहीं, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि पूरे प्रकरण में किन परिस्थितियों में पैसा लेने का आरोप सामने आया और इसमें किसी तरह की विभागीय अनियमितता हुई या नहीं।

जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

सोनभद्र में सामने आए इस मामले में प्रशासन ने प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए निलंबन कर दिया है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है। जांच अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।

जिला प्रशासन ने साफ किया है कि सरकारी कार्यों में नियमों का पालन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। ऐसे में जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही मामले में अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

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