अमेठी में UPI शुल्क के विरोध में व्यापार मंडल ने सौंपा ज्ञापन, 2000 रुपये से अधिक भुगतान पर राहत की मांग

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रिपोर्ट – अंजनी मिश्रा 

अमेठी: डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के बीच 2,000 से अधिक के UPI लेन-देन पर प्रस्तावित 0.04 प्रतिशत ट्रांजैक्शन शुल्क को लेकर व्यापारियों ने विरोध जताया है। इसी मुद्दे को लेकर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, जनपद अमेठी ने बुधवार को गौरीगंज कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी के माध्यम से उप जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन भारत सरकार के प्रधानमंत्री के नाम संबोधित किया गया।

व्यापार मंडल ने अपने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि 2,000 से अधिक के UPI लेन-देन पर प्रस्तावित शुल्क को वापस लिया जाए। साथ ही, यदि शुल्क व्यवस्था को लागू किया जाता है तो कम से कम व्यापारियों को इससे मुक्त रखा जाए। व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान समय में UPI भुगतान व्यापारिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है और ऐसे में डिजिटल लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से छोटे तथा मध्यम कारोबारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

व्यापारियों ने UPI शुल्क पर जताई चिंता

उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के जिलाध्यक्ष महेश सोनी के नेतृत्व में व्यापारी कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस दौरान उन्होंने व्यापारियों की विभिन्न समस्याओं को प्रशासन के समक्ष रखा। ज्ञापन में मुख्य रूप से 2,000 से अधिक के UPI लेन-देन पर प्रस्तावित 0.04 प्रतिशत शुल्क का मुद्दा उठाया गया।

व्यापार मंडल का कहना है कि व्यापारी पहले से ही अलग-अलग प्रकार के कर, शुल्क और अन्य व्यावसायिक खर्च वहन कर रहे हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त ट्रांजैक्शन शुल्क लगाया जाता है तो इसका सीधा असर व्यापारियों की लागत पर पड़ सकता है। विशेष रूप से छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारी इससे प्रभावित हो सकते हैं।

व्यापारियों के मुताबिक, डिजिटल भुगतान ने कारोबार को काफी आसान बनाया है। ग्राहक और व्यापारी दोनों ही नकद राशि रखने की आवश्यकता के बजाय UPI के माध्यम से भुगतान और लेन-देन कर रहे हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क कारोबार की लागत को बढ़ा सकता है।

2,000 से अधिक के भुगतान पर शुल्क का विरोध

व्यापार मंडल ने ज्ञापन में विशेष रूप से 2,000 से अधिक के UPI लेन-देन पर प्रस्तावित 0.04 प्रतिशत ट्रांजैक्शन शुल्क का उल्लेख किया है। संगठन का कहना है कि बड़े मूल्य के डिजिटल भुगतान व्यापारिक लेन-देन में सामान्य बात हैं। थोक खरीद, सप्लायर को भुगतान, माल की बिक्री और अन्य कारोबारी गतिविधियों में डिजिटल माध्यम का लगातार इस्तेमाल हो रहा है।

ऐसे में यदि प्रत्येक पात्र लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क लागू होता है, तो लंबे समय में इसका प्रभाव व्यापारियों के कुल खर्च पर पड़ सकता है। व्यापार मंडल ने इसी वजह से सरकार से इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

व्यापारियों का यह भी कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए पिछले वर्षों में लोगों और कारोबारियों को UPI सहित विभिन्न डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसलिए अब डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क की व्यवस्था लागू होने से व्यापारियों और ग्राहकों के बीच इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठ सकते हैं।

ग्राहकों पर भी पड़ सकता है असर

व्यापार मंडल ने अपने ज्ञापन में यह तर्क भी रखा कि UPI भुगतान का प्रभाव केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं है। वर्तमान समय में ग्राहक भी बड़ी संख्या में डिजिटल माध्यम से भुगतान करते हैं। यदि व्यापारियों के लिए डिजिटल लेन-देन की लागत बढ़ती है तो अप्रत्यक्ष रूप से इसका प्रभाव ग्राहकों पर भी पड़ने की आशंका है।

हालांकि, इस संबंध में व्यापार मंडल ने सरकार से शुल्क व्यवस्था पर पुनर्विचार करने और व्यापारियों को राहत देने की मांग की है। संगठन का मानना है कि डिजिटल भुगतान को सरल और कम लागत वाला बनाए रखना व्यापारिक गतिविधियों के लिए उपयोगी होगा।

व्यापारियों को शुल्क से मुक्त रखने की मांग

ज्ञापन में व्यापार मंडल ने केंद्र सरकार से मांग की कि यदि प्रस्तावित शुल्क को पूरी तरह वापस लेना संभव नहीं है तो व्यापारियों को इससे अलग रखा जाए। संगठन का कहना है कि कारोबारियों के लिए UPI अब केवल भुगतान का विकल्प नहीं, बल्कि रोजमर्रा के व्यापार का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।

जिलाध्यक्ष महेश सोनी ने कहा कि व्यापारियों की आर्थिक स्थिति और उनकी मौजूदा जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए सरकार को प्रस्तावित शुल्क पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि व्यापारियों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ से बचाने के लिए राहत की व्यवस्था की जानी चाहिए।

सरकार से पुनर्विचार की अपील

उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने प्रधानमंत्री के नाम दिए गए ज्ञापन के माध्यम से सरकार से इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की अपील की है। व्यापारियों का कहना है कि सरकार की नीतियों में व्यापारियों और छोटे कारोबारियों की व्यावहारिक समस्याओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

इसके अलावा, व्यापार मंडल ने उम्मीद जताई कि सरकार व्यापारियों की मांग पर विचार करेगी और UPI लेन-देन से संबंधित प्रस्तावित शुल्क को लेकर उचित निर्णय लेगी। संगठन का कहना है कि इससे कारोबारियों को राहत मिलने के साथ डिजिटल भुगतान व्यवस्था को भी बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल अमेठी में व्यापार मंडल की ओर से सौंपे गए इस ज्ञापन के बाद व्यापारियों की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर है। 2,000 से अधिक के UPI लेन-देन पर प्रस्तावित 0.04 प्रतिशत शुल्क को लेकर व्यापारियों की मांग अब सरकार के समक्ष पहुंच चुकी है। ऐसे में आने वाले समय में इस प्रस्ताव पर सरकार की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, यह महत्वपूर्ण होगा।

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