जुगैल में मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन धरना
रिपोर्टर- ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी
सोनभद्र। जिले के जुगैल क्षेत्र में लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे आदिवासी और ग्रामीण परिवारों ने अब अपनी मांगों को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों ने बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, पेयजल और मोबाइल नेटवर्क जैसी जरूरी सुविधाओं की मांग को लेकर जिलाधिकारी को प्रार्थना-पत्र सौंपा है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं के समाधान के लिए जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो 21 अक्टूबर 2026 से कलेक्ट्रेट परिसर में शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि जुगैल क्षेत्र के कई आदिवासी टोलों में आज भी विकास की बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं। गर्दा, गर्दी, सलैयापान, बगडेवा, घोड़ाचाट, कसनार और बुट्टी समेत कई इलाकों में रहने वाले परिवारों को बिजली, सड़क, पेयजल और संचार सुविधाओं के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, इन समस्याओं के संबंध में पहले भी संबंधित अधिकारियों और शासन स्तर पर शिकायतें तथा ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं हो सका है।
बिजली व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
जुगैल क्षेत्र के ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में सभी छूटे हुए आदिवासी टोलों में विद्युत व्यवस्था उपलब्ध कराना शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ स्थानों पर विद्युत पोल तो लगाए गए हैं, लेकिन अब तक तार नहीं खींचे गए हैं। वहीं, कुछ क्षेत्रों में विद्युत लाइन बिछाए जाने के बावजूद आपूर्ति शुरू नहीं होने की शिकायत सामने आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की नियमित सुविधा नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई, घरेलू कामकाज और अन्य दैनिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। इसके अलावा, बिजली की अनुपलब्धता के कारण ग्रामीण परिवारों को अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए उन्होंने संबंधित विभाग से अधूरे विद्युत कार्यों को जल्द पूरा कर आपूर्ति शुरू कराने की मांग की है।
थारी घाटी से मध्य प्रदेश सीमा तक सड़क की मांग
ग्रामीणों ने क्षेत्र की जर्जर सड़क व्यवस्था को भी प्रमुख मुद्दा बनाया है। उनकी मांग है कि थारी घाटी से मध्य प्रदेश सीमा तक पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए। इसके साथ ही रास्ते में जर्जर हो चुकी पुलियों की मरम्मत अथवा आवश्यकता के अनुसार उनका पुनर्निर्माण कराया जाए।
ग्रामीणों के अनुसार, खराब सड़क और पुलियों के कारण आवागमन में परेशानी होती है। इसका असर विद्यार्थियों, किसानों, श्रमिकों और मरीजों सहित आम ग्रामीणों पर पड़ता है। विशेष रूप से बारिश के दौरान रास्तों की स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऐसे में ग्रामीणों ने सड़क एवं पुलिया निर्माण को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने की मांग की है।
स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की मांग
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। विद्युत दुर्घटना में दिव्यांग हुई एक आदिवासी युवती के तत्काल उपचार की व्यवस्था कराने की मांग की गई है। इसके अलावा सलैयापान-गर्दा-गर्दी क्षेत्र में उप-सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की मांग भी की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने के कारण मरीजों को उपचार के लिए दूर जाना पड़ता है। आपात स्थिति में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। इसलिए उन्होंने क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
मोबाइल नेटवर्क और संचार सुविधा भी प्रमुख मुद्दा
जुगैल क्षेत्र के ग्रामीणों ने मोबाइल नेटवर्क और संचार सुविधाओं के विस्तार की मांग भी उठाई है। ग्रामीणों के मुताबिक, कई इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या बनी हुई है, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में परिवारों को परेशानी होती है। इसके अलावा शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी सुविधाओं का लाभ लेने में भी नेटवर्क की कमी बाधा बनती है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जुगैल क्षेत्र के कमजोर नेटवर्क वाले इलाकों को चिह्नित कर वहां बेहतर मोबाइल और संचार सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संबंधित विभाग एवं सेवा प्रदाता कंपनियां आवश्यक कदम उठाएं।
निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच की मांग
मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ ग्रामीणों ने क्षेत्र में कराए गए सरकारी निर्माण कार्यों की तकनीकी और निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की है। उनका आरोप है कि कई स्थानों पर सड़क और पुलिया निर्माण के कुछ समय बाद ही क्षतिग्रस्त होने की स्थिति सामने आती है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जिन कार्यों में सरकारी बजट खर्च हुआ है, उनकी गुणवत्ता की जांच कराई जाए। साथ ही स्वीकृत बजट, निर्माण सामग्री और कार्य की वास्तविक स्थिति का परीक्षण किया जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
21 अक्टूबर से कलेक्ट्रेट में धरने का ऐलान
युवा जनसेवक एवं व्यापार मंच अध्यक्ष, अपना दल (एस), जुगैल क्षेत्र राहुल पाण्डेय ने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर पहले भी अधिकारियों और शासन को कई बार अवगत कराया गया है। इसके बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि अब ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाएंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा। ग्रामीणों का उद्देश्य क्षेत्र में बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, पेयजल और संचार जैसी आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराना है। राहुल पाण्डेय के अनुसार, यदि प्रशासन की ओर से मांगों पर ठोस कार्रवाई शुरू नहीं की जाती है तो 21 अक्टूबर 2026 से सोनभद्र कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।

