मेरठ में MDA के खिलाफ किसानों का आंदोलन तेज, मुआवजा और प्लॉट की मांग पर धरना जारी
रिपोर्ट – मनीष पराशर
मेरठ। मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) की योजनाओं से प्रभावित किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। लोहिया नगर, गंगानगर और वेदव्यासपुरी योजना से जुड़े किसान बकाया प्रतिकर (मुआवजा) और प्लॉट आवंटन की मांग को लेकर पिछले 26 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। युवा किसान संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा।
किसानों का आरोप है कि उनकी जमीनों का अधिग्रहण वर्षों पहले कर लिया गया, लेकिन तय समझौते के अनुसार सभी प्रभावित किसानों को अब तक पूरा प्रतिकर और प्लॉट का लाभ नहीं मिल पाया है। किसानों का कहना है कि जमीन जाने के बाद कई परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में वे अब अपने अधिकारों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं।
26 दिनों से जारी है किसानों का धरना
काजीपुर निवासी और युवा किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष गौरव गुर्जर के अनुसार, लोहिया नगर, गंगानगर और वेदव्यासपुरी योजना के किसान पिछले 26 दिनों से लगातार धरने पर बैठे हैं। उनका दावा है कि वर्ष 2011 की बोर्ड बैठक में किसानों के प्रतिकर और प्लॉट से संबंधित प्रस्ताव रखा गया था। इसके बाद वर्ष 2015 में प्रस्ताव को मंजूरी मिली और 2017-18 के दौरान कुछ किसानों को इसका लाभ मिलना शुरू हुआ।
किसान प्रतिनिधियों का आरोप है कि कोरोना महामारी के दौरान प्रतिकर वितरण की प्रक्रिया रोक दी गई थी। उनका कहना है कि इसके बाद कई वर्ष बीत जाने के बावजूद प्रक्रिया को पूरी तरह दोबारा शुरू नहीं किया गया। किसानों के अनुसार, करीब तीन करोड़ रुपये का वितरण होने के बाद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
गौरव गुर्जर का कहना है कि बड़ी संख्या में किसान अभी भी अपने हक के इंतजार में हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के स्तर पर समस्याओं को शासन तक पहुंचाने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन धरने पर बैठे किसानों को अपेक्षित समाधान नहीं मिला है।
बुजुर्ग किसान ने बताया जमीन जाने के बाद का दर्द
आंदोलन में शामिल बुजुर्ग किसान मनीराम ने कहा कि किसान लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके मुताबिक, उनकी करीब 45-50 बीघा जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में गई थी और उन्हें कथित तौर पर 68 रुपये प्रति गज के हिसाब से मुआवजा मिला।
मनीराम का आरोप है कि जिस जमीन का अधिग्रहण किया गया, उसकी मौजूदा कीमत काफी अधिक है। उन्होंने कहा कि जमीन चली जाने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है। बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च और बेटियों की शादी जैसे जरूरी कार्यों के लिए भी परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि किसान अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे और जब तक मुआवजा तथा अन्य अधिकारों से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं होता, तब तक धरने से पीछे नहीं हटेंगे।
2015 के समझौते के पालन की मांग
किसान प्रतिनिधि रोबिन चौधरी ने कहा कि किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन उनके अनुसार मुआवजा अपेक्षाकृत कम दिया गया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2015 में किसानों और प्राधिकरण के बीच हुए समझौते के मुताबिक जो लाभ किसानों को मिलने थे, वे अभी तक पूरी तरह नहीं मिले हैं।
रोबिन चौधरी के मुताबिक, कोरोना काल में मुआवजा वितरण की प्रक्रिया रुक गई थी। इसके बाद कई साल गुजर चुके हैं, लेकिन किसानों को अब भी अपने बकाया भुगतान और प्लॉट आवंटन का इंतजार है। उन्होंने कहा कि इससे प्रभावित परिवारों के कई जरूरी काम अटके हुए हैं।
खाली जमीन पर जुताई अभियान की चेतावनी
आंदोलनकारी किसानों ने अब आंदोलन को और व्यापक करने की चेतावनी दी है। किसान नेताओं का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो तीनों योजनाओं के किसानों को एकजुट कर मेरठ विकास प्राधिकरण में बड़ा धरना दिया जाएगा।
किसानों ने यह भी कहा है कि योजना क्षेत्रों में प्राधिकरण की खाली पड़ी अधिग्रहित जमीन पर जुताई अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने गंगानगर क्षेत्र में प्रस्तावित रोडवेज बस अड्डे समेत अन्य विकास कार्यों को लेकर भी विरोध जताया है। किसानों का कहना है कि पहले उनके मुआवजे और प्लॉट से संबंधित मांगों का समाधान किया जाए, उसके बाद विकास कार्यों को लेकर आगे की प्रक्रिया हो।
जमीन अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर सवाल
किसानों का मुख्य आरोप जमीन अधिग्रहण के दौरान मिलने वाले मुआवजे और बाद में विकसित योजनाओं में जमीन की कीमत के अंतर को लेकर है। किसानों का कहना है कि प्राधिकरण द्वारा जमीन अधिग्रहण के समय उन्हें अपेक्षाकृत कम राशि मिलती है, जबकि विकसित योजनाओं में जमीन और प्लॉट अधिक कीमत पर बेचे जाते हैं।
हालांकि, इन आरोपों पर मेरठ विकास प्राधिकरण का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल किसान अपने बकाया प्रतिकर और प्लॉट आवंटन की मांग पर आंदोलन जारी रखे हुए हैं।
किसानों ने कहा है कि उनकी मांगें पूरी होने तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए प्रभावित गांवों और योजना क्षेत्रों के अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने की तैयारी की जा रही है। अब देखना होगा कि किसानों और मेरठ विकास प्राधिकरण के बीच इस विवाद का समाधान किस स्तर पर और कब तक निकलता है।

