मेरठ में दो सिपाही समेत 5 गिरफ्तार, हिस्ट्रीशीटर के साथ मिलकर नोट की गद्दी में लगा रहे थे कोरा कागज
रिपोर्ट – मनीष पाराशर
मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पुलिस विभाग की साख से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। भावनपुर थाना क्षेत्र में लोगों को तीन गुना रकम देने का लालच देकर कथित तौर पर ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह में भावनपुर थाने में तैनात दो सिपाही भी शामिल थे। मामले में हिस्ट्रीशीटर समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी लोगों को असली नोटों के बदले तीन गुना रकम देने का झांसा देते थे। इसके बाद तय स्थान पर बुलाकर कथित रूप से उनकी रकम हड़पने की योजना बनाई जाती थी। इस पूरी कार्रवाई में पुलिसकर्मियों पर भी आरोपियों का साथ देने का आरोप है। मामला सामने आने के बाद दोनों सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है।
नोटों की गड्डियों में बीच में लगाए जाते थे कागज
पुलिस के मुताबिक, गिरोह लोगों को भरोसे में लेने के लिए नोटों जैसी दिखाई देने वाली गड्डियों का इस्तेमाल करता था। इन गड्डियों के ऊपर और नीचे असली नोट लगाए जाते थे, जबकि बीच में उसी आकार के कटे हुए सफेद कागज रखे जाते थे।
इस तरह तैयार की गई गड्डियों को देखकर पहली नजर में उनके असली नोट होने का भ्रम पैदा किया जाता था। आरोप है कि इसी तरीके से लोगों को कम रकम के बदले तीन गुना अधिक रकम मिलने का लालच दिया जाता था।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ऐसी 33 गड्डियां बरामद किए जाने की जानकारी दी है। इसके अलावा 25 हजार रुपये नकद, एक मोटरसाइकिल और एक तमंचा भी बरामद किया गया है।
हिस्ट्रीशीटर साजिद पर गिरोह चलाने का आरोप
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में साजिद भावनपुर थाने का हिस्ट्रीशीटर है। उस पर पहले से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। आरोप है कि साजिद अपने साथियों के साथ मिलकर लोगों को कथित तौर पर कम कीमत में असली नोट देकर तीन गुना रकम प्राप्त करने का लालच देता था।
डील तय होने के बाद पीड़ित पक्ष को एक निर्धारित स्थान पर बुलाया जाता था। इसके बाद वहां मौजूद आरोपी कथित तौर पर नोटों की गड्डियां दिखाकर भरोसा कायम करने की कोशिश करते थे।
पुलिस की जांच में आरोप है कि इसी दौरान भावनपुर थाने में तैनात दो सिपाही मौके पर पहुंचते थे और रेड या जांच का नाटक करते थे। इसके बाद पीड़ित की असली रकम अपने कब्जे में लेकर उसे वहां से हटाने की योजना बनाई जाती थी।
डायल 112 पर मिली लूट की सूचना से खुला मामला
एसपी देहात अभिजीत कुमार के अनुसार, भावनपुर थाना क्षेत्र में शाम के समय डायल 112 के माध्यम से लूट की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए साजिद, अभिषेक और फैजान को हिरासत में लिया। इसके बाद आरोपियों से पूछताछ की गई और तकनीकी जांच के आधार पर मामले की आगे की कड़ियां जोड़ी गईं।
पूछताछ और जांच के दौरान पुलिस को कथित ठगी के तरीके की जानकारी मिली। इसके बाद भावनपुर थाने में तैनात दो सिपाहियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। पुलिस के अनुसार, दोनों सिपाहियों के नाम सामने आने के बाद उन्हें भी आरोपी बनाया गया।
दो सिपाहियों पर भी हुई कार्रवाई
मामले में पुलिसकर्मियों की कथित संलिप्तता सामने आने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सख्त कार्रवाई की। एसएसपी मेरठ के निर्देश पर भावनपुर थाने में तैनात दोनों सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है।
पुलिस के मुताबिक, पांचों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके साथ ही सभी आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस विभाग के भीतर तैनात कर्मचारियों की भूमिका सामने आने के कारण यह मामला और गंभीर माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गिरोह के पास से क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस की कार्रवाई में आरोपियों के कब्जे से कई सामान बरामद किए गए हैं। इनमें 25 हजार रुपये नकद, एक मोटरसाइकिल, एक तमंचा और नोटों जैसी दिखाई देने वाली 33 गड्डियां शामिल हैं।
पुलिस का कहना है कि इन गड्डियों का इस्तेमाल लोगों को धोखे में रखने के लिए किया जाता था। ऊपर और नीचे असली नोट तथा बीच में कागज रखने से गड्डी पहली नजर में वास्तविक नोटों की गड्डी जैसी दिखाई देती थी।
लोगों को लालच से बचने की जरूरत
इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि कम समय में अधिक रकम हासिल करने का लालच लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बना सकता है। किसी भी व्यक्ति को यदि असली रकम के बदले कई गुना रकम देने का प्रस्ताव मिलता है तो उसे सावधानी बरतनी चाहिए।
ऐसी किसी डील में शामिल होने से पहले उसकी वैधता और वास्तविकता की जांच करना जरूरी है। संदिग्ध परिस्थितियों में पुलिस या संबंधित अधिकारियों को सूचना देना बेहतर विकल्प है।
पुलिस की साख से जुड़ा गंभीर मामला
मेरठ में सामने आया यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कथित गिरोह में पुलिस विभाग के दो कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारियों पर ही अपराध में शामिल होने के आरोप लगने से विभाग के सामने भी जवाबदेही का सवाल खड़ा हुआ है।
फिलहाल पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों सिपाहियों को निलंबित किया जा चुका है और सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है। आगे की जांच में यह स्पष्ट होगा कि इस गिरोह ने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और इस कथित ठगी के नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं।

