बदायूं के कासू नगला में स्कूल के लिए नहर पार करते हैं बच्चे, 200 से ज्यादा छात्रों का भविष्य अधर में

674210cc-68b6-44bc-9ac1-fc477a305787

रिपोर्ट – विपिन यादव 

बदायूं: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के दातागंज विकास क्षेत्र का कासू नगला गांव आज भी बुनियादी शिक्षा की सुविधा के लिए इंतजार कर रहा है। गांव में स्कूल नहीं होने के कारण यहां के बच्चों को करीब दो किलोमीटर दूर दूसरे गांव स्थित स्कूल जाना पड़ता है। इस सफर में बच्चों और ग्रामीणों के सामने दो गहरी नहरें पड़ती हैं। इन नहरों पर सुरक्षित पुल या आवागमन का उचित रास्ता नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में ग्रामीणों को बच्चों को कंधों पर बैठाकर पानी पार कराना पड़ता है।

कासू नगला की यह स्थिति ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों के मुताबिक गांव की आबादी करीब 750 से 800 है, जबकि 200 से अधिक बच्चे स्कूल जाने की उम्र के हैं। इसके बावजूद गांव में अब तक प्राथमिक स्तर का विद्यालय नहीं बन सका है।

स्कूल जाने के लिए दो नहरें पार करने की मजबूरी

कासू नगला के बच्चों के लिए स्कूल तक पहुंचना रोजमर्रा की चुनौती है। गांव में विद्यालय नहीं होने के कारण उन्हें दूसरे गांव जाना पड़ता है। रास्ते में दो गहरी नहरें पड़ती हैं। सामान्य दिनों में भी यह रास्ता आसान नहीं है, लेकिन बारिश के मौसम में नहरों में पानी बढ़ जाने के कारण परेशानी और बढ़ जाती है।

ऐसे समय में ग्रामीण बच्चों को अपने कंधों पर बैठाकर नहर पार कराते हैं। इस दौरान बच्चों के साथ-साथ उन्हें पानी के बीच से ले जाने वाले ग्रामीणों को भी काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षित पुल या पक्के रास्ते की व्यवस्था होने पर बच्चों को इस तरह नहर पार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

खेतों की मेड़ और झाड़ियों से होकर गुजरते हैं बच्चे

नहरों की समस्या के साथ-साथ स्कूल तक पहुंचने वाला रास्ता भी बच्चों के लिए आसान नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार बच्चों को खेतों की मेड़ और झाड़ियों के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। कई स्थानों पर खेतों की मेड़ के आसपास तार भी लगे हैं, जिससे बच्चों के आवागमन में अतिरिक्त परेशानी होती है।

ऐसे रास्ते से होकर रोज स्कूल जाना छोटे बच्चों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव में ही स्कूल की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो बच्चों को रोजाना लंबी दूरी तय करने और असुरक्षित रास्तों से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

ग्रामीण बोले- पीढ़ियां शिक्षा से वंचित रहीं

कासू नगला के ग्रामीणों का कहना है कि गांव में विद्यालय नहीं होने का असर कई वर्षों से बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। गांव के बुजुर्गों के मुताबिक उन्होंने स्वयं पर्याप्त शिक्षा हासिल नहीं की और उनके बच्चों को भी बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं नहीं मिल सकीं।

अब ग्रामीण चाहते हैं कि अगली पीढ़ी को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। 70 से 80 वर्ष की उम्र पार कर चुके बुजुर्गों का कहना है कि वे अपने बच्चों और पोते-पोतियों के लिए बेहतर भविष्य चाहते हैं। उनका कहना है कि गांव में स्कूल बनने से बच्चों को न केवल सुरक्षित रास्ता मिलेगा, बल्कि शिक्षा हासिल करना भी आसान होगा।

स्कूल निर्माण के लिए हो चुकी है जांच और संस्तुति

ग्रामीणों के अनुसार, कासू नगला में स्कूल निर्माण के लिए स्थानीय स्तर पर कई बार मांग उठाई गई। इस मामले में क्षेत्रीय भाजपा विधायक राजीव कुमार सिंह से भी ग्रामीणों ने स्कूल बनवाने की मांग की थी।

बताया गया कि विधायक के निर्देश के बाद एसडीएम स्तर से खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से मामले की जांच कराई गई। इसके बाद जांच रिपोर्ट बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिलाधिकारी को भेजे जाने की बात सामने आई। ग्रामीणों का दावा है कि जिलाधिकारी स्तर से भी गांव में स्कूल के लिए संस्तुति की गई थी। हालांकि, इसके बावजूद अभी तक विद्यालय भवन का निर्माण नहीं हो सका है।

बरसात में सामने आई शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर

बरसात के दौरान कासू नगला में पहुंचने पर बच्चों और ग्रामीणों की स्थिति कैमरे में भी सामने आई। ग्रामीण बच्चों को कंधों पर बैठाकर नहर के पानी से दूसरी ओर ले जाते दिखाई दिए। यह तस्वीर बताती है कि गांव के बच्चों के लिए स्कूल तक पहुंचना सिर्फ पढ़ाई का विषय नहीं, बल्कि सुरक्षित आवागमन से भी जुड़ा हुआ है।

एक ओर जहां शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल माध्यम, स्मार्ट क्लास और आधुनिक विद्यालयों की सुविधाओं पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कासू नगला जैसे गांवों में बच्चे आज भी स्कूल पहुंचने के लिए बुनियादी रास्ते का इंतजार कर रहे हैं।

200 से ज्यादा बच्चों के लिए स्कूल की जरूरत

ग्रामीणों के मुताबिक करीब 750 से 800 की आबादी वाले गांव में 200 से अधिक बच्चे पढ़ने की उम्र के हैं। ऐसे में गांव में विद्यालय की स्थापना से बड़ी संख्या में बच्चों को सीधे लाभ मिल सकता है। इससे अभिभावकों को भी अपने बच्चों को दूर स्थित स्कूल भेजने की चिंता कम होगी।

इसके अलावा गांव में स्कूल होने से बच्चों के समय की बचत होगी और उनकी नियमित पढ़ाई भी बेहतर तरीके से हो सकेगी। खासकर छोटे बच्चों के लिए यह सुविधा काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

अब ग्रामीणों को प्रशासन के फैसले का इंतजार

कासू नगला के ग्रामीणों की मांग साफ है कि गांव में जल्द से जल्द स्कूल की व्यवस्था की जाए और बच्चों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच और संस्तुति की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो अब निर्माण की दिशा में भी ठोस कदम उठाया जाना चाहिए।

फिलहाल कासू नगला के बच्चों और उनके अभिभावकों की नजर प्रशासन पर है। सवाल यह है कि गांव में स्कूल कब बनेगा और बच्चों को नहर, खेतों की मेड़ और असुरक्षित रास्तों से होकर स्कूल जाने की मजबूरी से कब राहत मिलेगी। शिक्षा हर बच्चे के भविष्य की नींव है, इसलिए कासू नगला में विद्यालय और सुरक्षित रास्ते की मांग को लेकर ग्रामीणों की उम्मीदें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।