यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले विकास कार्यों में तेजी, निकायों को चार माह में काम शुरू कराने के निर्देश

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Digital UP News

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेजी देने की तैयारी शुरू हो गई है। नगर विकास विभाग ने प्रदेश के नगर निकायों को बचे हुए विकास कार्यों को निर्धारित समय सीमा में आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत निकायों से विकास योजनाओं के प्रस्ताव जल्द तैयार कर शासन को उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि नवंबर तक बजट आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

इसके बाद दिसंबर तक प्रस्तावित विकास कार्यों के टेंडर कराने और टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही जमीन पर काम शुरू कराने की तैयारी है। शासन का उद्देश्य बताया गया है कि चुनावी अधिसूचना जारी होने से पहले अधिक से अधिक जरूरी शहरी विकास कार्यों की शुरुआत हो जाए।

चार महीने में काम शुरू कराने पर जोर

नगर निकायों को बचे हुए कार्यों में तेजी लाने के लिए करीब चार महीने की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए काम करने के निर्देश दिए गए हैं। सबसे पहले निकायों को अपने-अपने क्षेत्र में लंबित और प्रस्तावित विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करनी होगी।

इसके बाद संबंधित योजनाओं के प्रस्ताव शासन को भेजे जाएंगे। नवंबर तक बजट आवंटन का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, दिसंबर तक सभी आवश्यक टेंडर प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दिए गए हैं।

टेंडर जारी होने के बाद केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रहने के बजाय संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को तत्काल निर्माण या विकास कार्य शुरू कराने के लिए कहा गया है। इस तरह शासन स्तर पर योजना बनाने से लेकर काम शुरू होने तक की प्रक्रिया को कम समय में पूरा करने पर जोर है।

नगर विकास विभाग को 16,239 करोड़ के काम कराने हैं

रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष में नगर विकास विभाग को राज्य सेक्टर की योजनाओं के तहत करीब 16,239 करोड़ रुपये के विकास कार्य कराने हैं। इन योजनाओं में अलग-अलग नगर निकायों की स्थानीय जरूरतों के आधार पर बुनियादी सुविधाओं और शहरी ढांचे को बेहतर बनाने वाले कार्य शामिल हैं।

इनमें सड़क, पार्किंग, पार्क और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दिए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में आने वाले महीनों में नगर निकायों के स्तर पर विकास योजनाओं की प्रक्रिया और तेज होने की संभावना है।

सरकार की ओर से पहले भी वित्तीय वर्ष 2026-27 में पूंजीगत और विकास कार्यों को गति देने पर जोर दिया गया है। विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए विभिन्न क्षेत्रों में विकास योजनाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी चल रही है।

वंदन योजना से धार्मिक और ऐतिहासिक शहरों का विकास

नगर विकास विभाग की योजनाओं में वंदन योजना भी महत्वपूर्ण है। इसके तहत धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले शहरों एवं स्थलों पर आवश्यक नागरिक सुविधाओं को विकसित करने की योजना है।

सरकारी जानकारी के मुताबिक वंदन योजना के अंतर्गत पेयजल, सीवरेज, जलनिकासी, सड़क, पथप्रकाश और सौंदर्यीकरण जैसे कार्यों पर ध्यान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व वाले क्षेत्रों में आने वाले लोगों के साथ-साथ स्थानीय निवासियों के लिए भी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना है।

इस योजना के तहत अलग-अलग नगर निकायों में जरूरत के मुताबिक परियोजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। आने वाले महीनों में इन कार्यों में भी तेजी लाने पर जोर रहेगा।

आकांक्षी नगर योजना से पिछड़े शहरों को सुविधाएं

इसके अलावा आकांक्षी नगर योजना के जरिए प्रदेश के अपेक्षाकृत पिछड़े नगर निकायों में बुनियादी शहरी सुविधाओं को मजबूत करने की योजना है।

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य चयनित नगर निकायों में मूलभूत शहरी विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में सुधार करना है। साथ ही आर्थिक अवसरों के सृजन और बेहतर नागरिक सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

इसका मतलब है कि शहरी विकास की मौजूदा रणनीति केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। छोटे और अपेक्षाकृत पिछड़े नगरों में भी जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए योजनाएं लागू की जा रही हैं।

जिला मुख्यालय वाले निकायों को स्मार्ट बनाने की तैयारी

योजना के तहत जिला मुख्यालय वाले नगर निकायों को बेहतर और आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की दिशा में भी काम किया जाना है। इन्हें नवयुग पालिका परिषद के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है।

इसका फोकस शहरों की स्थानीय जरूरतों के अनुसार आधुनिक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर रहेगा। इसमें पार्किंग व्यवस्था, पार्क, सड़क और अन्य आवश्यक शहरी सुविधाओं को विकसित करना शामिल है।

इससे शहरों में यातायात प्रबंधन, सार्वजनिक स्थानों और रोजमर्रा की नागरिक सुविधाओं से जुड़ी जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा करने में मदद मिल सकती है।

टेंडर के बाद तत्काल शुरू होंगे विकास कार्य

शासन के निर्देशों में एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद विकास कार्यों को शुरू कराने में अनावश्यक देरी न हो। निकायों को अपने प्रस्ताव समय से भेजने और बजट आवंटन के बाद परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की तैयारी करनी होगी।

दरअसल, किसी भी विकास परियोजना में प्रस्ताव, वित्तीय स्वीकृति, बजट आवंटन और टेंडर जैसी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू होता है। ऐसे में शासन की कोशिश है कि इन सभी चरणों के बीच अनावश्यक समय न लगे।

जनवरी में चुनाव अधिसूचना की संभावना

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव वर्ष 2027 में प्रस्तावित हैं। मौजूदा रिपोर्टों में जनवरी 2027 के आसपास चुनावी अधिसूचना जारी होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, चुनाव की आधिकारिक तारीख और कार्यक्रम का अंतिम निर्णय निर्वाचन आयोग की ओर से ही किया जाएगा।

इसी संभावित समयसीमा को देखते हुए नगर विकास विभाग के कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी है। सरकार चाहती है कि अधिसूचना से पहले विकास परियोजनाएं जमीन पर शुरू हो जाएं।

शहरों में बढ़ेंगी बुनियादी सुविधाएं

यदि निर्धारित समयसीमा के अनुसार प्रस्ताव, बजट और टेंडर की प्रक्रिया पूरी होती है, तो आने वाले महीनों में नगर निकायों में सड़क, पार्किंग, पार्क और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कई कार्य शुरू हो सकते हैं।

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में 2027 के प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले शहरी विकास कार्यों को गति देने की तैयारी तेज हो गई है। नगर विकास विभाग को 16,239 करोड़ रुपये के कार्य कराने हैं और इसके लिए नवंबर तक बजट आवंटन तथा दिसंबर तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य सामने रखा गया है।

अब देखना होगा कि नगर निकाय इन समयसीमाओं के भीतर प्रस्ताव तैयार करने, बजट प्राप्त करने और टेंडर प्रक्रिया पूरी करने में कितनी तेजी दिखाते हैं। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चुनावी अधिसूचना से पहले कितने विकास कार्य वास्तव में जमीन पर शुरू हो पाते हैं।

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