लखनऊ में प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला में बोले सीएम योगी, भारत को विश्वगुरु बनाने में शिक्षक निभाएं भूमिका

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रिपोर्ट – डिजिटल उप्रन्यूज़

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों की भूमिका, भारतीय परिवार व्यवस्था और युवाओं की शिक्षा को लेकर महत्वपूर्ण विचार रखे। कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने समाज और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों को चेतना का आधार बताते हुए कहा कि भारत को श्रेष्ठ भारत और विश्वगुरु बनाने के लिए सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। इस दौरान उन्होंने गायत्री परिवार की स्थापना और उसके सामाजिक जागरण में योगदान का भी उल्लेख किया।

कार्यक्रम की शुरुआत आध्यात्मिक एवं सामाजिक मूल्यों के संदर्भों के साथ हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सच्चिदानंद महाराज की जय का उद्घोष करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी का हमेशा से महत्वपूर्ण स्थान रहा है। उनके अनुसार, समाज को सकारात्मक दिशा देने में ऐसे संगठनों और संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, जो मजबूत विचारधारा और मूल्यों के आधार पर आगे बढ़ते हैं।

विचार और संगठन की शक्ति पर सीएम योगी का जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो संगठन किसी स्पष्ट विचार और उद्देश्य के आधार पर आगे बढ़ता है, वह लंबे समय तक समाज में अपनी भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि केवल संसाधनों के आधार पर कोई संस्था या संगठन लंबे समय तक प्रभावी नहीं रह सकता। इसके लिए विचार, अनुशासन, समर्पण और समाज के प्रति जिम्मेदारी जरूरी है।

उन्होंने गायत्री परिवार के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि 1926 में गायत्री परिवार की स्थापना हुई थी। इसके बाद इस संगठन ने लोगों को जागरूक करने और सामाजिक चेतना को मजबूत करने की दिशा में काम किया। मुख्यमंत्री ने पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के योगदान का भी उल्लेख किया और कहा कि वे देश के स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़े रहे।

सीएम योगी ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी भूमिका समझनी होगी। शिक्षक इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि उनके संपर्क में आने वाली नई पीढ़ी भविष्य के भारत का निर्माण करेगी।

भारतीय परिवार व्यवस्था की विशेषता बताई

कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बदलती सामाजिक परिस्थितियों और परिवार व्यवस्था पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब लोगों के पास संसाधन सीमित थे, लेकिन परिवार एक साथ रहता था। मुश्किल परिस्थितियों में परिवार के सदस्य एक-दूसरे का सहयोग करते थे और संकट के समय पूरा परिवार साथ खड़ा रहता था।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया के अनेक हिस्सों में परिवारों के बिखराव की स्थिति दिखाई दे रही है। इसके विपरीत भारत में संयुक्त परिवार की परंपरा लंबे समय से सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। भारतीय परिवार व्यवस्था केवल साथ रहने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि इसमें सहयोग, जिम्मेदारी, संस्कार और एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता की भावना भी शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक समय में परिवारों के सामने कई नई चुनौतियां हैं। ऐसे में समाज को अपनी सांस्कृतिक और पारिवारिक परंपराओं के सकारात्मक पक्ष को समझने की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षकों से भी आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें संस्कार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का महत्व भी समझाएं।

शिक्षक समाज की चेतना का आधार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों को समाज की चेतना का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को विषयों की जानकारी नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व और सोच को भी प्रभावित करते हैं। इसलिए शिक्षक की जिम्मेदारी कक्षा की चारदीवारी से कहीं अधिक व्यापक है।

उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को बेहतर शिक्षा, सही दिशा और मजबूत संस्कार मिलेंगे तो देश का भविष्य और अधिक मजबूत होगा। युवाओं को बेहतर शिक्षा देना आज की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक है। इसके लिए शिक्षकों, अभिभावकों और समाज को मिलकर काम करना होगा।

सीएम योगी ने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। इसलिए युवाओं में शिक्षा के साथ-साथ आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना आवश्यक है। शिक्षा के माध्यम से युवाओं को बदलती दुनिया की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सकता है।

श्रेष्ठ भारत के निर्माण का आह्वान

मुख्यमंत्री ने कार्यशाला में उपस्थित शिक्षकों और समाज के लोगों से श्रेष्ठ भारत के निर्माण के लिए काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा, संस्कार और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करना होगा।

उन्होंने कहा कि देश आज विकास के नए दौर में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में शिक्षा व्यवस्था की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। शिक्षक नई पीढ़ी को ज्ञान के साथ देश की विरासत और जिम्मेदारियों से परिचित करा सकते हैं।

सीएम योगी ने कहा कि भारत की प्राचीन परंपरा, संस्कृति और ज्ञान की अपनी विशिष्ट पहचान रही है। आज आवश्यकता है कि आधुनिक शिक्षा और भारतीय मूल्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। इससे युवा आधुनिक दुनिया में प्रतिस्पर्धा करने के साथ अपनी जड़ों से भी जुड़े रहेंगे।

भारत को विश्वगुरु बनाने में शिक्षा की अहम भूमिका

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाना केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए शिक्षा के क्षेत्र को मजबूत करना होगा और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करानी होगी।

उन्होंने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया के महत्वपूर्ण भागीदार हैं। उनके मार्गदर्शन से तैयार होने वाली पीढ़ी आने वाले समय में देश के सामाजिक, आर्थिक और वैज्ञानिक विकास में योगदान देगी। इसलिए शिक्षकों को अपनी भूमिका को केवल नौकरी के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के दायित्व के रूप में देखना चाहिए।

अंततः मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत विचार, परिवार की एकजुटता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सामाजिक चेतना के आधार पर ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण संभव है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य के लिए तैयार करने के साथ-साथ उन्हें देश और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा दें। इस दिशा में सामूहिक प्रयास ही भारत को श्रेष्ठ भारत और विश्वगुरु बनाने के लक्ष्य को मजबूत आधार प्रदान कर सकते हैं।