ठाकुर चंद्रपाल सिंह की 108वीं जयंती पर विचार गोष्ठी और कवि सम्मेलन

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रिपोर्ट – अशोक सिंह

फतेहपुर। अमर शहीद ठाकुर दरियाव सिंह स्मारक स्थल, खागा में शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को इतिहास पुरुष ठाकुर चंद्रपाल सिंह की 108वीं जयंती के अवसर पर विचार गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उनके सामाजिक, शैक्षिक, साहित्यिक और संगठनात्मक योगदान को याद करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला। इस दौरान कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री शिव शरण सिंह चौहान ‘अंशुमाली’ ने की। मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री पशुधन एवं दुग्ध विकास श्रीमती कृष्णा पासवान मौजूद रहीं। वहीं विशिष्ट अतिथियों में जिला पंचायत फतेहपुर के अध्यक्ष श्री अभय प्रताप सिंह और नगर पंचायत खागा की अध्यक्ष श्रीमती गीता सिंह शामिल रहीं। कार्यक्रम में समिति के मंत्री रामप्रताप सिंह तथा उनके पुत्र अशोक सिंह ने ठाकुर चंद्रपाल सिंह के जीवन और समाज के लिए किए गए कार्यों की जानकारी साझा की।

शिक्षा और संघर्ष से बना व्यक्तित्व

ठाकुर चंद्रपाल सिंह का जन्म 3 अक्टूबर 1919 को गढ़ी खागा में हुआ था। उनके पिता का नाम ठाकुर जगमोहन सिंह और माता का नाम यशोदा कुँवर था। बचपन में ही उनकी माता का निधन हो गया था। इसके बाद उनके दादा ठाकुर बद्री सिंह ने उनकी शिक्षा-दीक्षा में महत्वपूर्ण सहयोग किया।

उन्होंने 1934-35 में हिंदी-उर्दू वर्नाकुलर फाइनल, 1939-40 में हिंदी-उर्दू एडवांस लैंग्वेज तथा वर्ष 1942 में हाईस्कूल की शिक्षा पूरी की। प्रारंभ में उनका लक्ष्य अध्यापक बनने का था, लेकिन पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों के कारण वह आगे की शिक्षा जारी नहीं रख सके।

परिवार की जमींदारी भी जमींदारी उन्मूलन के बाद समाप्त हो गई और परिवार सामान्य कृषक परिवार की स्थिति में आ गया। इसके बावजूद चंद्रपाल सिंह ने सामाजिक सरोकारों और जनसेवा के कार्यों को अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।

सरकारी सेवा के साथ संगठन निर्माण

वर्ष 1942 में उन्होंने अंग्रेजी शासन के दौरान ग्राम रक्षा समिति के गठन के माध्यम से लोगों को संगठित करने का प्रयास किया। इसके बाद 1943 से 1949 तक राजस्व विभाग में सीजनल अमीन के रूप में कार्य किया। गल्ला वसूली के दौरान अधिकारियों से विवाद के बाद उन्होंने यह नौकरी छोड़ दी और कुछ समय तक कपड़े की दुकान चलाकर जीवन-यापन किया।

वर्ष 1952 में उत्तर प्रदेश राजस्व संग्रह अमीन संघ में उनकी स्थायी नियुक्ति हुई। इसके बाद वर्ष 1977 में वह सेवानिवृत्त हुए। नौकरी के दौरान उन्होंने कर्मचारियों के संगठन के लिए भी उल्लेखनीय प्रयास किए। वर्ष 1959 में उत्तर प्रदेश राज्य संग्रह अमीन संघ, लखनऊ के गठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। सेवानिवृत्ति के बाद भी वह वर्ष 1982 तक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रहे।

आर्य समाज और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान

ठाकुर चंद्रपाल सिंह को समाजसेवा की प्रेरणा आर्य समाज से मिली। वर्ष 1939 से 1947 के बीच उन्होंने आर्य कुँवर सभा के गठन और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1950 से 1952 तक वह आर्य समाज खागा के अध्यक्ष रहे। इसके बाद भी उन्होंने संगठन में मंत्री और उपाध्यक्ष जैसे दायित्व निभाए।

शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा। वर्ष 1952 में बाबा शुकदेव सिंह के साथ शुकदेव इंटर कॉलेज खागा की नींव रखने और विद्यालय निर्माण में उन्होंने सहयोग किया। वह विद्यालय के सह प्रबंधक रहे और अंतिम समय तक उपाध्यक्ष के दायित्व से जुड़े रहे।

इसी प्रकार बुदवन इंटर कॉलेज, खागा की स्थापना में भी उनकी भूमिका रही। वह विद्यालय के सचिव पद पर अंतिम समय तक कार्यरत रहे। इससे स्पष्ट होता है कि उन्होंने शिक्षा को सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम माना।

सांस्कृतिक और ऐतिहासिक कार्यों में सक्रिय भूमिका

ठाकुर चंद्रपाल सिंह ने खागा की रामलीला समिति से भी लंबे समय तक जुड़कर कार्य किया। वर्ष 1946 से 1963 तक वह रामलीला कमेटी के मंत्री रहे। इस दौरान उन्होंने समिति की आर्थिक स्थिति और चल-अचल संपत्तियों को मजबूत करने में योगदान दिया। इसके बाद वर्ष 1976 से 1985 तक उन्होंने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली।

उन्होंने अमर शहीद ठाकुर दरियाव सिंह स्मारक समिति, खागा की नींव रखी और अंतिम समय तक समिति के सचिव के रूप में जुड़े रहे। इसके अलावा वह जिला सहकारी विकास संघ के संचालक मंडल के सदस्य भी रहे। आचार्य विनोबा भावे के कार्यक्रमों से भी उनका जुड़ाव रहा।

साहित्य और इतिहास के क्षेत्र में भी उन्होंने शोधपरक कार्य किए। फतेहपुर और बांदा जनपद के इतिहास के साथ खागा के कुकरा-कुकरी, सरसई, एक दल, मुंशी प्रेमचंद की ससुराल सलेमपुर, गोली मंजिल और कुंडेश्वर धाम जैसे स्थानीय ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर उन्होंने शोध किया। डॉ. शिव गोपाल मिश्र और डॉ. ओम प्रकाश अवस्थी के सानिध्य में बाबासाहेब आप्टे स्मारक समिति के गठन तथा उत्तर प्रदेशीय इतिहास संकलन समिति के जनपदीय कार्यों में भी उन्होंने भूमिका निभाई।

कवियों ने काव्यपाठ से बांधा समां

जयंती समारोह के अंतर्गत आयोजित कवि सम्मेलन की अध्यक्षता बाराबंकी के कवि श्री राम किशोर तिवारी ने की, जबकि संचालन रायबरेली के श्री नीरज पांडेय ने किया। कवि सम्मेलन में विभिन्न जनपदों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं का काव्यपाठ किया।

प्रमुख कवियों में श्री रामकिशोर तिवारी, श्री शिव शरण सिंह चौहान ‘अंशुमाली’, श्री नीरज पांडेय, श्री संतोष दीक्षित, श्री हरि बहादुर हर्ष, श्री अभिजीत मिश्र, श्री अमित आभास, श्री अभिषेक अमर, श्री शिवशरण बंधु, श्री समीर शुक्ला, श्री कुमार सौष्ठव, श्री कमलेश सिंह, श्री रामचंद्र सिंह ‘सूरज’ और श्री केपी सिंह कछवाह सहित अन्य कवि शामिल रहे। कवियों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भाव-विभोर कर दिया।

कार्यक्रम में समिति के उपाध्यक्ष एवं कवि सम्मेलन संयोजक महेंद्र नाथ त्रिपाठी सहित मनोज पाल, शिव सागर सिंह, राजकुमार मौर्य, कृष्ण स्वरूप सिंह, उमेश मौर्य, इंद्रजीत सिंह, फूलचंद्र सिंह, हरिश्चंद्र सिंह, चंद्रशेखर सिंह, संदीप सिंह, रमेश सिंह, गुलाब सिंह, प्रदीप सिंह, फूलचंद्र पाल, रामकृष्ण हेगड़े, हजारी प्रसाद, राजेंद्र सिंह, नवनीत सिंह, योगेंद्र कुमार, महेंद्र सिंह, रामचंद्र, कमलेश सिंह, संतराम सिंह, विजय त्रिपाठी, अजय त्रिपाठी, राजकपूर सिंह, परमहंस सिंह, जयकांत सिंह, देवेंद्र सिंह, शिवेश त्रिपाठी, राम अभिलाष मिश्र, सुभाष मौर्य, राम प्रकाश प्रधान, अतुल सिंह प्रधान, आकाश कुमार सिंह और रघुराज मौर्य आदि मौजूद रहे।

ठाकुर चंद्रपाल सिंह का निधन 17 जून 1993 को लंबी बीमारी के बाद हुआ था। उनकी 108वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में उनके सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक योगदान को याद किया गया। आयोजन के माध्यम से नई पीढ़ी को उनके कार्यों और खागा क्षेत्र की सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का प्रयास भी किया गया।