कानपुर में महा-वृक्षारोपण अभियान: कृषि विभाग और किसानों ने मिलकर लगाए 38 हजार पौधे

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रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा 

कानपुर: पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और जलवायु संतुलन की दिशा में कानपुर जनपद ने एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। वृक्षारोपण कार्यक्रम वर्ष 2026-27 के अंतर्गत रविवार को पूरे जिले में महा-वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान में कृषि विभाग, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के लाभार्थियों, प्रगतिशील किसानों, कृषि अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने मिलकर 38 हजार पौधों का रोपण किया।

विशेष बात यह रही कि अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखकर जनभागीदारी का स्वरूप दिया गया। जिले के सभी विकास खंडों में किसानों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कृषि विभाग के कार्यालयों और राजकीय कृषि प्रक्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया।

कृषि भवन परिसर में आयोजित हुआ मुख्य कार्यक्रम

महा-वृक्षारोपण अभियान का मुख्य आयोजन कृषि भवन परिसर, गुमटी नंबर-9, रावतपुर में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के अपर कृषि निदेशक गोपाल दास रहे। उन्होंने पौधारोपण कर अभियान का शुभारंभ किया और उपस्थित लोगों को अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प दिलाया।

इस अवसर पर कृषि विभाग के जनपद एवं मंडल स्तरीय अधिकारियों, कर्मचारियों और किसानों की बड़ी संख्या मौजूद रही। सभी ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

38 हजार पौधों के साथ हरित भविष्य की ओर कदम

कृषि विभाग के अनुसार पूरे जनपद में आयोजित इस अभियान के दौरान लगभग 38,000 पौधे लगाए गए। इसके लिए पहले से विभिन्न विकास खंडों में स्थानों का चयन किया गया था, ताकि पौधों का बेहतर संरक्षण और रखरखाव सुनिश्चित किया जा सके।

अधिकारियों ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखकर विकसित करना भी है। इसके लिए संबंधित विभागों और स्थानीय स्तर पर निगरानी की व्यवस्था की जाएगी।

किसानों ने निभाई अहम भूमिका

इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता किसानों की सक्रिय भागीदारी रही। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थियों और प्रगतिशील किसानों ने स्वयं पौधे लगाए और दूसरों को भी इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा कि किसानों का प्रकृति से सीधा संबंध होता है। ऐसे में यदि किसान पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आते हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव समाज के अन्य वर्गों पर भी पड़ता है।

कृषि विभाग के सभी कार्यालय बने अभियान का हिस्सा

अभियान के अंतर्गत कृषि विभाग के जनपद में स्थापित सभी कार्यालयों, प्रशिक्षण केंद्रों और राजकीय कृषि प्रक्षेत्रों में भी वृक्षारोपण किया गया। अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने-अपने कार्यालय परिसरों में पौधे लगाकर हरियाली बढ़ाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के संयोजक एवं कृषि विभाग के प्रधान सहायक मनोज शुक्ला सहित विभाग के सभी कर्मचारियों ने अभियान को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग दिया।

जनभागीदारी बनी अभियान की सबसे बड़ी ताकत

महा-वृक्षारोपण अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से बड़ी संख्या में किसानों, कृषि विशेषज्ञों और विभागीय कर्मचारियों को जोड़ा गया। परिणामस्वरूप पूरे जिले में यह अभियान उत्सव की तरह मनाया गया।

कार्यक्रम के दौरान लोगों को यह संदेश भी दिया गया कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित सिंचाई, सुरक्षा और देखभाल भी उतनी ही आवश्यक है।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और घटते हरित क्षेत्र को देखते हुए वृक्षारोपण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। पेड़ वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते हैं, कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसके अलावा वृक्ष भूजल संरक्षण, वर्षा चक्र को संतुलित रखने, मिट्टी के कटाव को रोकने और जैव विविधता को सुरक्षित रखने में भी सहायक होते हैं।

पौधों के संरक्षण पर रहेगा विशेष जोर

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया कि अभियान के तहत लगाए गए पौधों की नियमित निगरानी की जाएगी। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी भी सौंपी जाएगी, ताकि अधिक से अधिक पौधे जीवित रह सकें।

इसके साथ ही किसानों और आम नागरिकों से भी अपील की गई कि वे अपने आसपास लगाए गए पौधों की देखभाल में सहयोग करें।

किसानों के लिए पर्यावरण और खेती दोनों में लाभ

विशेषज्ञों का कहना है कि वृक्षारोपण केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि कृषि के लिए भी लाभदायक है। पेड़ मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने, तापमान नियंत्रित करने और वर्षा के प्राकृतिक चक्र को संतुलित करने में मदद करते हैं।

इसी कारण कृषि विभाग किसानों को कृषि वानिकी (Agroforestry) और खेतों की मेड़ों पर पौधारोपण के लिए भी लगातार प्रेरित कर रहा है।

सामूहिक प्रयास से मिलेगा बेहतर परिणाम

अभियान में शामिल अधिकारियों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण तभी संभव है जब सरकार, किसान, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिलकर कार्य करें। सामूहिक प्रयासों से ही हरित उत्तर प्रदेश और स्वच्छ भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी देखभाल भी करे।

कानपुर में आयोजित महा-वृक्षारोपण अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल बनकर सामने आया है। कृषि विभाग, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों और प्रगतिशील किसानों की भागीदारी से 38 हजार पौधों का रोपण कर जिले ने हरित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।

यदि लगाए गए पौधों का संरक्षण और नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जाता है, तो यह अभियान आने वाले वर्षों में कानपुर के पर्यावरण को और अधिक संतुलित, स्वच्छ एवं हरित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही यह अभियान समाज को यह संदेश भी देता है कि प्रकृति की रक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।

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