बागपत जिला अस्पताल में लापरवाही का आरोप, किसान नेता की पत्नी की मौत के मामले में मुकदमा दर्ज
रिपोर्ट- हैदर मलिक
बागपत। किसान नेता प्रदीप धामा की पत्नी सुंदर देवी की वर्ष 2005 में सांप के काटने के बाद हुई मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। बागपत में सामने आए इस पुराने मामले में जिला अस्पताल में उपचार के दौरान कथित चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में तत्कालीन/संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों के रूप में सीएमएस अनुराग वार्ष्णेय, डॉ. विक्रांत और फार्मासिस्ट मोहित त्यागी के नाम सामने आए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला बागपत शहर कोतवाली क्षेत्र से जुड़ा है। किसान नेता प्रदीप धामा की पत्नी सुंदर देवी की 4 नवंबर 2005 को सांप के काटने के बाद तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया था। आरोप है कि अस्पताल में उपचार के दौरान चिकित्सकीय स्तर पर लापरवाही बरती गई, जिसके चलते उनकी मौत हो गई।
2005 में हुई थी सुंदर देवी की मौत
बताया गया है कि सुंदर देवी को सांप के काटने के बाद उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया था। उस समय उनकी हालत को लेकर परिजन काफी चिंतित थे। अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद परिजनों की ओर से उपचार में लापरवाही के आरोप लगाए गए थे।
हालांकि, घटना को काफी समय बीत चुका है। अब इस मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद एक बार फिर पुराने प्रकरण की जांच और उससे जुड़े तथ्यों पर चर्चा शुरू हो गई है। मुकदमे में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए हैं।
चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों की होगी जांच
मामले में जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, उनमें सीएमएस अनुराग वार्ष्णेय, डॉ. विक्रांत और फार्मासिस्ट मोहित त्यागी शामिल हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सुंदर देवी के उपचार के दौरान आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया का उचित ढंग से पालन नहीं किया गया।
अब पुलिस की जांच में यह स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण होगा कि घटना के समय अस्पताल में सुंदर देवी को किस स्थिति में लाया गया था, उनका किस प्रकार उपचार किया गया और उपचार के दौरान कौन-कौन से चिकित्सकीय कदम उठाए गए थे। साथ ही, उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह भी देखा जाएगा कि मौत के पीछे उपचार में लापरवाही की कोई भूमिका थी या नहीं।
पुराने मामले में मुकदमा दर्ज होने से बढ़ी हलचल
करीब दो दशक पुराने इस मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद बागपत के स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन में भी हलचल बढ़ गई है। इतने लंबे समय बाद सामने आए मामले में जांच अधिकारियों के सामने पुराने दस्तावेज, चिकित्सकीय रिकॉर्ड और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्य जुटाना महत्वपूर्ण चुनौती हो सकती है।
इसके अलावा, मामले में शामिल तत्कालीन परिस्थितियों और अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की भी जांच की जा सकती है। जांच के दौरान यदि कोई अतिरिक्त तथ्य सामने आता है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
परिजनों के आरोपों की जांच के बाद सामने आएगी स्थिति
किसी भी चिकित्सकीय लापरवाही के मामले में आरोप और दोष सिद्ध होना अलग-अलग विषय हैं। इसलिए पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मुकदमा दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपित व्यक्ति दोषी सिद्ध हो गए हैं। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा।
सुंदर देवी की मौत से जुड़े इस मामले में अब पुलिस के सामने घटना के समय की परिस्थितियों को दोबारा सामने लाने की चुनौती है। इसके लिए अस्पताल से संबंधित रिकॉर्ड, चिकित्सकीय दस्तावेज, पोस्टमार्टम अथवा अन्य उपलब्ध अभिलेख और उस समय दर्ज कराए गए बयानों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है और आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर होगी। पुलिस द्वारा आरोपों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि करने वाले पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

