इटावा में UPI पेमेंट के MDR में संशोधन की मांग, व्यापार मंडल ने सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन

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रिपोर्ट – रोहित सिंह चौहान 

इटावा: यूपीआई पेमेंट से जुड़े मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) में संशोधन की मांग को लेकर अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने आवाज उठाई है। इसी क्रम में संगठन के पदाधिकारियों और व्यापारियों ने प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन इटावा के सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र प्रसाद को सौंपा। व्यापारियों ने ज्ञापन के माध्यम से यूपीआई भुगतान से जुड़े मौजूदा प्रावधानों में आवश्यक संशोधन करने की मांग रखी।

व्यापार मंडल का कहना है कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच छोटे और मध्यम व्यापारियों के सामने भुगतान से जुड़ी लागत और अन्य व्यावसायिक चुनौतियां भी सामने आती हैं। इसलिए व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए यूपीआई पेमेंट व्यवस्था से संबंधित MDR के प्रावधानों की समीक्षा की जानी चाहिए।

प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा

अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल से जुड़े व्यापारी अपनी मांग को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र प्रसाद को सौंपा।

व्यापारियों ने ज्ञापन में यूपीआई पेमेंट में लागू MDR से संबंधित प्रावधानों में संशोधन की मांग की। उनका कहना है कि डिजिटल लेनदेन आज व्यापारिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ऐसे में भुगतान व्यवस्था से जुड़े नियम व्यापारियों के लिए सुविधाजनक और व्यावहारिक होने चाहिए।

व्यापार मंडल ने प्रशासन के माध्यम से अपनी मांग केंद्र सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया है। व्यापारियों का कहना है कि उनकी मांग पर केंद्र सरकार और संबंधित विभाग द्वारा विचार किया जाना चाहिए।

डिजिटल भुगतान का बढ़ रहा इस्तेमाल

पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने का चलन तेजी से बढ़ा है। बाजारों में खरीदारी से लेकर छोटे दुकानदारों तक डिजिटल भुगतान की सुविधा आम हो चुकी है। ग्राहक अक्सर नकद के बजाय मोबाइल फोन से यूपीआई के माध्यम से भुगतान करना पसंद करते हैं।

इसके परिणामस्वरूप व्यापारियों के लिए भी डिजिटल भुगतान स्वीकार करना जरूरी हो गया है। हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान से जुड़ी व्यवस्थाओं में छोटे कारोबारियों की व्यावहारिक जरूरतों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

इसी वजह से अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने MDR के प्रावधानों में संशोधन की मांग उठाई है। संगठन का मानना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ-साथ व्यापारियों के हितों का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।

MDR को लेकर व्यापारियों की चिंता

MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारिक लेनदेन की व्यवस्था में संबंधित पक्षों के बीच लागू हो सकता है। यूपीआई के अलग-अलग लेनदेन और भुगतान माध्यमों के संदर्भ में शुल्क व्यवस्था अलग-अलग हो सकती है।

व्यापारियों की ओर से सौंपे गए ज्ञापन का मुख्य विषय इसी व्यवस्था में संशोधन की मांग है। व्यापार मंडल चाहता है कि सरकार व्यापारियों पर पड़ने वाले संभावित वित्तीय प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था की समीक्षा करे।

व्यापारियों का कहना है कि खासकर छोटे कारोबारियों के लिए भुगतान से जुड़ी लागत महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे डिजिटल भुगतान की सुविधा भी बनी रहे और व्यापारियों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव भी न पड़े।

व्यापार मंडल ने सरकार के सामने रखी मांग

अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल समय-समय पर व्यापारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार और प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखता रहा है। इसी क्रम में इटावा में भी संगठन की ओर से ज्ञापन सौंपकर यूपीआई पेमेंट से जुड़े MDR में संशोधन की मांग की गई।

व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ भुगतान व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी और व्यापार हितैषी बनाया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि छोटे दुकानदारों और कारोबारियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर नीतियों में बदलाव किए जाने से डिजिटल भुगतान व्यवस्था को और मजबूती मिल सकती है।

इसके अलावा व्यापारियों का यह भी कहना है कि सरकार और व्यापारिक संगठनों के बीच संवाद लगातार बना रहना चाहिए, ताकि नीतियां तैयार करते समय जमीनी स्तर की समस्याओं को भी समझा जा सके।

प्रशासन के माध्यम से केंद्र तक पहुंचेगी मांग

ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपे जाने के बाद अब व्यापारियों को उम्मीद है कि उनकी मांग संबंधित स्तर तक पहुंचाई जाएगी। हालांकि, MDR में किसी भी तरह का संशोधन केंद्र सरकार और संबंधित नियामकीय संस्थाओं के स्तर पर तय होने वाला विषय है।

इसलिए फिलहाल व्यापारियों की मांग ज्ञापन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। केंद्र सरकार की ओर से इस मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है, यह आगे स्पष्ट होगा।

व्यापारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था का विरोध करना नहीं है, बल्कि मौजूदा व्यवस्था में व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक बदलाव की मांग करना है। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान आज व्यापार का अभिन्न हिस्सा बन चुका है और इसे अधिक सुविधाजनक बनाना सभी पक्षों के हित में होगा।

व्यापारियों ने रखी अपनी बात

ज्ञापन सौंपने के दौरान व्यापारियों ने अपनी समस्याओं और मांगों से प्रशासन को अवगत कराया। व्यापारी प्रतिनिधियों ने कहा कि व्यापारिक गतिविधियों में डिजिटल भुगतान की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इससे संबंधित शुल्क और नियमों को लेकर स्पष्टता तथा व्यावहारिकता जरूरी है।

व्यापार मंडल ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन के जरिए अपनी मांग दर्ज कराई है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार और संबंधित विभाग इस मांग पर किस स्तर पर विचार करते हैं।

फिलहाल, इटावा में यूपीआई पेमेंट के MDR में संशोधन की मांग को लेकर व्यापार मंडल की ओर से सौंपा गया ज्ञापन व्यापारियों के डिजिटल भुगतान से जुड़े मुद्दों को सामने लाने का माध्यम बना है। व्यापारियों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांग पर विचार करेगी और व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाएगा।

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