बांदा पुलिस ने साइबर ठगी गिरोह का किया भंडाफोड़, 9 आरोपी गिरफ्तार; पढ़िए क्या हुआ बरामद

b7c398fc-01a6-47e2-8f84-3be0e1894e5a

रिपोर्ट – शैलेन्द्र शानू वर्मा 

बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। थाना साइबर क्राइम, कोतवाली नगर और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की संयुक्त टीम ने एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल के निर्देशन में की गई। आरोपियों के कब्जे से नकदी, बोलेरो वाहन, मोबाइल फोन, लैपटॉप, एटीएम कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं। फिलहाल मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।

संदिग्ध बैंक खाते की सूचना से शुरू हुई कार्रवाई

पुलिस के अनुसार पूरे मामले का खुलासा एक संदिग्ध बैंक खाते की सूचना मिलने के बाद हुआ। प्रारंभिक जांच के दौरान पुलिस ने मवई बाइपास क्षेत्र से प्रेम प्रकाश नामक व्यक्ति को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के नीचे खड़ी एक बोलेरो में मौजूद आठ अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया।

इस संयुक्त अभियान में साइबर क्राइम थाना, कोतवाली नगर पुलिस और एसओजी की टीम ने समन्वित तरीके से कार्रवाई की, जिससे कथित गिरोह का पर्दाफाश हो सका।

पूछताछ में सामने आया कथित साइबर ठगी का तरीका

पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित रूप से बताया कि वे लोगों को फर्जी APK फाइल और अन्य नकली मोबाइल एप्लिकेशन भेजकर उनके मोबाइल फोन तक अनधिकृत पहुंच बनाने का प्रयास करते थे।

इसके बाद कथित रूप से लोगों को विभिन्न बहानों से आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया जाता था। पुलिस का कहना है कि इन दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्मों के नाम से बैंक खाते और सिम कार्ड खुलवाए जाते थे।

पुलिस के अनुसार साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि पहले इन खातों में मंगाई जाती थी और फिर विभिन्न खातों में स्थानांतरित कर नकद निकाली जाती थी। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

बरामद हुआ यह सामान

संयुक्त पुलिस टीम ने आरोपियों के कब्जे से कई महत्वपूर्ण सामान बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार बरामद सामग्री में शामिल हैं—

  • 52,475 नकद
  • एक बोलेरो वाहन
  • 10 मोबाइल फोन
  • एक लैपटॉप
  • 6 एटीएम कार्ड
  • एक चेकबुक
  • एक पैन कार्ड

पुलिस का मानना है कि बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच से मामले में और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

नौ आरोपियों को किया गया गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में कुल नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में विधिक कार्रवाई की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों में प्रेम प्रकाश, सूरज, समीर, अभिषेक, जीतू, योगेश, कृष्णा, सुशील कुमार और मुकेश कुमार शामिल हैं।

पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

डिजिटल साक्ष्यों की होगी जांच

जांच अधिकारियों के अनुसार बरामद मोबाइल फोन, लैपटॉप और बैंकिंग से जुड़े दस्तावेजों की तकनीकी जांच कराई जाएगी। इससे यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि कथित साइबर ठगी का नेटवर्क किन-किन क्षेत्रों तक फैला हुआ था और कितने लोग इससे प्रभावित हुए हो सकते हैं।

साथ ही बैंक खातों के लेनदेन, मोबाइल डेटा और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड का भी विश्लेषण किया जाएगा।

साइबर अपराध से बचाव के लिए पुलिस की अपील

मामले के बाद पुलिस ने नागरिकों से साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी अनजान लिंक, APK फाइल या मोबाइल एप्लिकेशन को डाउनलोड करने से बचें।

इसके अलावा किसी भी व्यक्ति के साथ आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी या अन्य गोपनीय विवरण साझा न करें। यदि किसी प्रकार की साइबर ठगी का संदेह हो तो तत्काल स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।

उत्कृष्ट कार्य पर पुलिस टीम को मिला पुरस्कार

इस संगठित साइबर ठगी गिरोह का खुलासा करने वाली संयुक्त पुलिस टीम के कार्य की सराहना करते हुए पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने टीम को ₹20,000 का नगद पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिले में लगातार विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं और भविष्य में भी ऐसे अभियानों को जारी रखा जाएगा।

साइबर अपराध के प्रति जागरूकता है सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ साइबर अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं। इसलिए जागरूकता, सतर्कता और समय पर शिकायत करना साइबर अपराध से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं।

यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध कॉल, संदेश, ईमेल या मोबाइल एप्लिकेशन प्राप्त करता है, तो उसकी सत्यता की जांच किए बिना कोई कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही मोबाइल और बैंकिंग ऐप को हमेशा आधिकारिक स्रोतों से ही डाउनलोड करना चाहिए।

बांदा पुलिस द्वारा साइबर ठगी के कथित संगठित गिरोह का भंडाफोड़ जिले में साइबर अपराध के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। पुलिस ने नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंकिंग दस्तावेज और नकदी बरामद की है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।

वहीं, पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे ऑनलाइन लेनदेन के दौरान सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें। इससे साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने में सहायता मिल सकती है।

You may have missed