यूपी राज्यसभा चुनाव 2026 में क्रॉस वोटिंग की चर्चा हुई तेज, 10वीं सीट पर फंसा पेंच – जानें कब होगा मतदान

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Digital UP News

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक इन सीटों के लिए 16 अक्टूबर 2026 को मतदान होना है। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है, जबकि 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच और 9 अक्टूबर को नाम वापसी की प्रक्रिया होगी।

राज्यसभा चुनाव में इस बार मुख्य चर्चा सीटों के गणित और संभावित क्रॉस वोटिंग को लेकर है। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर भाजपा नेतृत्व वाला गठबंधन सात सीटों पर मजबूत स्थिति में है, जबकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या बताई जा रही है। ऐसे में असली मुकाबला अतिरिक्त उम्मीदवारों के मैदान में उतरने की स्थिति में बनने वाले समीकरणों पर केंद्रित हो गया है।

16 अक्टूबर को होगा राज्यसभा चुनाव

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर 16 अक्टूबर को मतदान होना है। इन सीटों का मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। चुनाव आयोग ने 22 सितंबर को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की थी।

राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की विधानसभा के निर्वाचित सदस्य मतदान करते हैं। मौजूदा प्रभावी विधानसभा संख्या 397 बताई जा रही है और प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए 37 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होगी। इसी गणित के आधार पर राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों की संख्या और समर्थन का आकलन कर रहे हैं।

सात सीटों पर स्थिति स्पष्ट, 10वीं सीट पर मुकाबले की चर्चा

वर्तमान संख्या बल को देखें तो भाजपा नेतृत्व वाला एनडीए सात सीटें जीतने की स्थिति में है। वहीं, सपा और कांग्रेस के संयुक्त विधायकों की संख्या दो उम्मीदवारों को निर्वाचित कराने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है। इसलिए चुनावी चर्चा का केंद्र अतिरिक्त सीटों पर है।

यही वजह है कि संभावित आठवीं भाजपा सीट और तीसरी सपा सीट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। यदि दोनों पक्ष अतिरिक्त उम्मीदवारों को मैदान में रखते हैं, तो मतदान की स्थिति बन सकती है और उस स्थिति में प्रत्येक विधायक का मत महत्वपूर्ण हो जाएगा।

भाजपा के लिए आठवीं सीट का गणित

भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में मामूली अंतर दिखाई देता है, लेकिन उपलब्ध ताजा आकलनों के अनुसार गठबंधन की मौजूदा ताकत आठवीं सीट के लिए आवश्यक संख्या के आसपास है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने एनडीए खेमे के करीब 293 विधायकों का आंकड़ा बताया है, जबकि अन्य आकलनों में संख्या कुछ अलग है।

इसलिए भाजपा के लिए आठवीं सीट हासिल करने का रास्ता सहयोगी दलों के समर्थन और संभावित अतिरिक्त वोटों पर निर्भर कर सकता है। इसी कारण पार्टी के भीतर विधायकों के साथ लगातार संपर्क और चुनावी रणनीति पर चर्चा की खबरें सामने आ रही हैं।

हालांकि, किसी विधायक के क्रॉस वोटिंग करने की बात को तब तक पुष्ट तथ्य नहीं माना जा सकता, जब तक संबंधित विधायक स्वयं ऐसा न करें या विश्वसनीय आधिकारिक जानकारी सामने न आए।

सपा के सामने तीसरी सीट की चुनौती

दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या है। तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए पार्टी को अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। हालिया रिपोर्टों में सपा-कांग्रेस खेमे के पास करीब 100 से अधिक विधायकों का समर्थन बताया गया है, जबकि तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त प्रथम वरीयता मत जुटाने होंगे।

सपा ने राज्यसभा के लिए राम गोपाल यादव और धनराज नाथवानी को उम्मीदवार बनाया है। तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं। ऐसे में पार्टी के सामने अतिरिक्त समर्थन जुटाने की चुनौती है।

SBSP विधायकों को लेकर भी चर्चा

इस चुनाव में सहयोगी दलों के विधायक भी महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई दे सकते हैं। खास तौर पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी यानी SBSP के विधायकों को लेकर चर्चा सामने आई है।

SBSP अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने हाल ही में कहा कि उनकी पार्टी के दो विधायक सपा के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। उन्होंने अब्बास अंसारी और जगदीश नारायण राय का उल्लेख करते हुए उन्हें सपा से जुड़ा बताया। यह बयान राजनीतिक समीकरणों की चर्चा के बीच सामने आया है।

हालांकि, मतदान से पहले किसी विधायक का अंतिम रुख आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं माना जा सकता। इसलिए इन संभावनाओं को फिलहाल राजनीतिक दावों और चर्चाओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

क्रॉस वोटिंग पर क्यों टिकी नजर?

राज्यसभा चुनाव में यदि अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में आते हैं तो क्रॉस वोटिंग की संभावना को लेकर राजनीतिक दल सतर्क हो जाते हैं। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले होने वाला यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें दलों के बीच विधायकों की एकजुटता और गठबंधन प्रबंधन की स्थिति सामने आ सकती है।

पिछले राज्यसभा चुनावों में भी उत्तर प्रदेश में क्रॉस वोटिंग को लेकर राजनीतिक विवाद हुआ था। हालांकि, इस बार कौन सा विधायक किसके पक्ष में मतदान करेगा, इसका अनुमान केवल राजनीतिक अटकलों के आधार पर नहीं लगाया जा सकता।

10वीं सीट पर क्या होगा?

राज्यसभा की 10 सीटों के मौजूदा गणित में सात सीटों पर भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन और दो सीटों पर सपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। ऐसे में अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में आने पर एक सीट के लिए मुकाबला बन सकता है।

यही सीट चुनावी रणनीति का केंद्र बनी हुई है। दोनों प्रमुख दल अपने-अपने विधायकों और सहयोगी दलों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर और नाम वापसी की 9 अक्टूबर की समयसीमा के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।

फिलहाल, उत्तर प्रदेश का राज्यसभा चुनाव केवल सीटों की संख्या का मामला नहीं रह गया है। इसके साथ दलों के बीच संख्या बल, सहयोगी दलों का रुख और संभावित क्रॉस वोटिंग जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं। हालांकि अंतिम तस्वीर 16 अक्टूबर को मतदान और उसके बाद मतगणना से ही स्पष्ट होगी।

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