कानपुर में UPI MDR के विरोध में व्यापारी लामबंद, 0.4% शुल्क वापस लेने की मांग
रिपोर्टर – हनुमंत सिंह पिंटू
कानपुर नगर। कानपुर में UPI पेमेंट पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर व्यापारियों में नाराजगी सामने आई है। 2 अक्टूबर को व्यापारियों ने प्रस्तावित शुल्क के विरोध में आवाज उठाते हुए इसे कारोबार की लागत बढ़ाने वाला कदम बताया। व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के दौर में UPI पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से छोटे और मध्यम कारोबारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
व्यापारी संगठनों का विरोध ऐसे समय में सामने आया है, जब NPCI के नए ढांचे के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के निर्दिष्ट Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होना है। हालांकि, सरकारी स्पष्टीकरण के मुताबिक सभी UPI लेनदेन पर शुल्क नहीं लगाया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P भुगतान मुफ्त रहेंगे और 2,000 रुपये तक के कई व्यापारी लेनदेन भी शुल्क से बाहर रहेंगे।
कानपुर में व्यापारियों ने जताई नाराजगी
कानपुर में विरोध कर रहे व्यापारियों का कहना है कि कारोबार पहले से ही विभिन्न खर्चों, टैक्स और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी लागत का सामना कर रहा है। ऐसे में UPI भुगतान पर MDR का प्रावधान व्यापारियों के लिए अतिरिक्त वित्तीय दबाव पैदा कर सकता है।
व्यापारियों के मुताबिक आज छोटे-बड़े दुकानदारों के लिए डिजिटल भुगतान कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ग्राहक नकद के साथ-साथ UPI के माध्यम से भुगतान करना पसंद करते हैं। ऐसे में व्यापारियों को आशंका है कि यदि डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की लागत बढ़ती है तो इसका असर उनके दैनिक कारोबार और मुनाफे पर पड़ सकता है।
हालांकि, प्रस्तावित व्यवस्था में छोटे व्यापारियों के लिए अलग छूट का प्रावधान भी है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, लगभग 96 प्रतिशत P2M लेनदेन नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे। वहीं, छोटे व्यापारियों के लिए शून्य-MDR व्यवस्था जारी रहने की बात कही गई है।
15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR ढांचा
NPCI की ओर से घोषित व्यवस्था के अनुसार 2,000 रुपये से अधिक के निर्दिष्ट P2M UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। उदाहरण के तौर पर 10,000 रुपये के ऐसे भुगतान पर 40 रुपये MDR बनता है। वहीं, 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन निर्धारित की गई है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है। यह भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पक्षों, जैसे बैंक और भुगतान सेवा प्रदाताओं के बीच वितरित किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य UPI इकोसिस्टम की संचालन लागत और दीर्घकालिक स्थिरता को समर्थन देना है।
इसके बावजूद कानपुर के व्यापारियों का तर्क है कि जमीनी स्तर पर इसका असर कारोबार की लागत पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि व्यापारियों को डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त शुल्क वहन करना पड़ा तो यह छोटे और मध्यम कारोबार के लिए चुनौती बन सकता है।
ऑनलाइन बाजार को भी बताया चुनौती
व्यापारियों ने UPI MDR के साथ-साथ ऑनलाइन मार्केटिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि पारंपरिक बाजार पहले से ही ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन के कारण प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है।
व्यापारियों के अनुसार, बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म कीमत, डिलीवरी और डिजिटल प्रचार के माध्यम से ग्राहकों तक तेजी से पहुंच बना रहे हैं। इसके विपरीत स्थानीय दुकानदारों को दुकान का किराया, कर्मचारियों का खर्च, बिजली, टैक्स और अन्य परिचालन लागत वहन करनी पड़ती है। ऐसे में डिजिटल भुगतान की लागत में किसी भी तरह की वृद्धि उनके लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकती है।
हालांकि, UPI व्यवस्था के नए नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ग्राहक से MDR सीधे वसूलने की अनुमति नहीं होगी। वित्त मंत्रालय ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि नया शुल्क ग्राहकों पर न डाला जाए।
व्यापारियों ने आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी
कानपुर के व्यापारियों ने प्रस्तावित MDR को वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उनकी मांग पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा। व्यापारियों ने चरणबद्ध तरीके से विरोध करने की चेतावनी देते हुए कहा कि वे इस मुद्दे को संबंधित अधिकारियों और सरकार के सामने लगातार उठाएंगे।
इस बीच देश के अन्य हिस्सों में भी कुछ व्यापारी संगठनों ने UPI MDR के खिलाफ विरोध का आह्वान किया है। राजस्थान सहित कई स्थानों पर 2 अक्टूबर और 15 अक्टूबर को विरोध कार्यक्रमों की घोषणाएं सामने आई हैं। हालांकि, UPI सेवा के देशभर में बंद रहने की बात को लेकर प्रसारित कुछ दावों को व्यापारी संगठन पहले ही खारिज कर चुके हैं।
UPI को लेकर बहस तेज
UPI MDR को लेकर अब बहस केवल व्यापारियों के शुल्क तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था की लागत और उसके भविष्य से भी जुड़ गई है। एक ओर सरकार और भुगतान क्षेत्र से जुड़े संस्थान UPI के बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और संचालन को टिकाऊ बनाने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। दूसरी ओर व्यापारी संगठनों का कहना है कि अतिरिक्त लागत का असर छोटे कारोबार पर नहीं पड़ना चाहिए।
इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 15 अक्टूबर 2026 से निर्दिष्ट 2,000 रुपये से अधिक के P2M UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR की व्यवस्था लागू होनी है, जबकि P2P भुगतान और निर्धारित छोटे व्यापारी वर्ग इससे बाहर रहेंगे।
कानपुर में व्यापारियों का विरोध इसी प्रस्तावित बदलाव को लेकर है। अब देखना होगा कि सरकार, NPCI और बैंकिंग क्षेत्र व्यापारियों की चिंताओं को किस तरह संबोधित करते हैं और MDR व्यवस्था के लागू होने के बाद स्थानीय बाजार पर इसका वास्तविक प्रभाव कितना पड़ता है।

