बांदा में गांधी जयंती पर शराबबंदी के बावजूद बिक्री का आरोप, बंद दुकान के अंदर से खिड़की के जरिए शराब देने का दावा
रिपोर्ट – शैलेंद्र शानू वर्मा
बांदा। गांधी जयंती के अवसर पर शराब की बिक्री पर प्रतिबंध के बावजूद बांदा शहर में एक शराब की दुकान से कथित तौर पर बिक्री किए जाने का मामला सामने आया है। मामला आवास विकास कॉलोनी स्थित शराब की दुकान से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि प्रशासन के निर्देश के बाद दुकान के बाहर ताले तो लगा दिए गए, लेकिन अंदर से खिड़की के माध्यम से शराब की बिक्री जारी रही। इस मामले ने आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था और शराबबंदी के आदेश के पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांधी जयंती के मद्देनजर जिलाधिकारी अमित आसेरी की ओर से जनपद में शराब की दुकानों को बंद रखने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद निर्धारित दुकानों को बंद रखने की व्यवस्था की गई थी। आवास विकास कॉलोनी स्थित संबंधित दुकान भी बाहर से पूरी तरह बंद दिखाई दे रही थी। दुकान के मुख्य गेट के साथ-साथ पीछे के गेट पर भी ताला लगा हुआ था।
हालांकि, स्थानीय स्तर पर लगाए गए आरोपों के मुताबिक दुकान के अंदर मौजूद सेल्समैन ने कथित तौर पर खिड़की के माध्यम से शराब की बिक्री की। दावा किया गया कि शराब खरीदने के लिए पहुंचे लोगों को दुकान के अंदर से खिड़की के जरिए बोतलें दी गईं। इसके बाद लोग शराब लेकर वहां से निकलते रहे।
बाहर ताला, अंदर से बिक्री का आरोप
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि दुकान बंद रखने के स्पष्ट निर्देश थे और दुकान के मुख्य तथा पीछे के गेट पर ताले लगाए गए थे, तो कथित रूप से अंदर से शराब की बिक्री कैसे होती रही। स्थानीय लोगों के आरोपों ने प्रशासनिक निगरानी की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि गांधी जयंती जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर शराब की बिक्री रोकने के लिए आबकारी विभाग की टीमों को निगरानी के निर्देश दिए गए थे। विभाग की ओर से शहर और जिले में अलग-अलग टीमों के माध्यम से दुकानों की जांच और निगरानी किए जाने की बात कही गई थी। ऐसे में यदि बंद दुकान के अंदर से बिक्री के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़ा कर सकता है।
सिर्फ ताले की जांच या अंदर की गतिविधियों पर भी नजर?
मामले में दूसरा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि शराब की दुकानों की निगरानी के दौरान क्या केवल दुकानों के बाहर लगे ताले और बंद शटर की जांच की गई या अंदर की गतिविधियों पर भी नजर रखी गई। क्योंकि आरोप यह है कि दुकान बाहर से बंद थी, लेकिन कथित तौर पर अंदर मौजूद व्यक्ति खिड़की के जरिए शराब उपलब्ध करा रहा था।
हालांकि, इस संबंध में वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सामने आए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। प्रशासन और आबकारी विभाग की ओर से मामले की जांच किए जाने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शराब की बिक्री वास्तव में प्रतिबंधित अवधि के दौरान हुई थी या नहीं।
आबकारी विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
गांधी जयंती पर शराबबंदी का उद्देश्य निर्धारित अवधि में शराब की दुकानों को पूरी तरह बंद रखना और बिक्री पर रोक सुनिश्चित करना होता है। ऐसे में किसी दुकान से कथित बिक्री की सूचना सामने आने पर संबंधित विभाग की जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था स्वाभाविक रूप से चर्चा में आ जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दुकान बंद थी तो शराब खरीदने के लिए लोगों की आवाजाही और खिड़की के माध्यम से कथित लेन-देन पर निगरानी टीमों की नजर क्यों नहीं पड़ी। वहीं, यदि आरोप गलत हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि किसी व्यक्ति या विभाग पर बिना पुष्टि के आरोप न लगे।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति
मामले को लेकर अब प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई पर निगाहें टिकी हुई हैं। यदि जांच में शराबबंदी के आदेश का उल्लंघन और प्रतिबंधित अवधि में बिक्री की पुष्टि होती है तो संबंधित दुकान संचालक, लाइसेंसधारी या अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
इसके विपरीत, यदि जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो प्रशासन की ओर से वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। इसलिए फिलहाल इस मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार करना उचित होगा।
गांधी जयंती के अवसर पर बांदा में सामने आए इस कथित मामले ने एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या शराबबंदी के दौरान केवल दुकान के बाहर ताला लगाना पर्याप्त है, या फिर बिक्री रोकने के लिए अंदर की गतिविधियों की भी प्रभावी निगरानी जरूरी है? अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और आबकारी विभाग इस मामले में क्या जांच करते हैं और आरोप सही पाए जाने पर क्या कार्रवाई की जाती है।

