मायावती का सपा पर हमला, परिवारवाद और धनबल को लेकर उठाए सवाल
रिपोर्ट – डिजिटल उप्रन्यूज़
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर निशाना साधते हुए उसके राजनीतिक तौर-तरीकों और राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन को लेकर सवाल उठाए हैं। मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट के जरिए कहा कि बसपा चुनावों में परिवार, रिश्तेदारों और बड़े पूंजीपतियों को टिकट देने की परंपरा का पालन नहीं करती। इसके साथ ही उन्होंने सपा पर ‘पीडीए’ के नाम पर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया।
मायावती का यह बयान उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की द्विवार्षिक चुनाव प्रक्रिया के बीच आया है। सपा ने वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। इन नामों को लेकर ही मायावती ने अपनी पोस्ट में सपा की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, रामगोपाल यादव सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा हैं, जबकि धनराज परिमल नाथवानी उद्योग जगत से जुड़े व्यक्ति हैं।
बसपा परिवार और पूंजीपतियों को टिकट नहीं देती: मायावती
मायावती ने अपने एक्स पोस्ट में कहा कि बसपा किसी भी छोटे या बड़े चुनाव में अपने परिवार के सदस्यों, सगे-संबंधियों, भाई-भतीजों और करीबी रिश्तेदारों के साथ-साथ बड़े पूंजीपतियों या धन्नासेठों को टिकट नहीं देती। उन्होंने दावा किया कि पार्टी चुनावों में धनबल का सहारा लेने के बजाय संगठन में काम करने वाले गरीब, मध्यम वर्ग और कमजोर तबकों के कर्मठ अंबेडकरवादी कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार बनाती है।
इसके आधार पर बसपा प्रमुख ने अपनी पार्टी की राजनीति को परिवारवाद और धनबल से अलग बताया। हालांकि, ये मायावती द्वारा अपने दल की नीतियों और सपा की राजनीति को लेकर किए गए राजनीतिक दावे हैं। सपा की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया आने पर तस्वीर का दूसरा पक्ष भी सामने आ सकता है।
PDA को लेकर भी सपा पर निशाना
मायावती ने सपा के ‘PDA’ फॉर्मूले पर भी सवाल उठाए। PDA का इस्तेमाल समाजवादी पार्टी की राजनीति में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के संदर्भ में किया जाता है। मायावती ने आरोप लगाया कि सपा चुनाव के समय इन वर्गों से समर्थन मांगती है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन में परिवार के सदस्यों और बड़े पूंजीपतियों को प्राथमिकता देती है।
उन्होंने कहा कि सपा स्वयं को समाजवादी और PDA आधारित पार्टी के रूप में प्रस्तुत करती है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन को लेकर उनका दावा इससे अलग तस्वीर पेश करता है। मायावती ने अपने समर्थकों और संबंधित सामाजिक वर्गों से सपा के PDA दावे को लेकर सतर्क रहने की अपील भी की।
रामगोपाल यादव और धनराज नाथवानी के नाम पर विवाद
राज्यसभा चुनाव के लिए सपा द्वारा रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद यह राजनीतिक बहस तेज हुई है। रामगोपाल यादव सपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और पार्टी ने उन्हें एक बार फिर उच्च सदन के लिए प्रत्याशी बनाया है। वहीं धनराज परिमल नाथवानी को भी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया है।
इसी चयन को आधार बनाकर मायावती ने सपा पर परिवारवाद और पूंजीपतियों को राजनीतिक अवसर देने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, इन उम्मीदवारों का चयन सपा का आधिकारिक राजनीतिक निर्णय है और उम्मीदवारों की योग्यता या भूमिका को लेकर अंतिम आकलन चुनावी प्रक्रिया तथा संबंधित राजनीतिक पक्षों के बयानों के आधार पर ही किया जा सकता है।
तीसरे प्रत्याशी को लेकर मायावती की टिप्पणी
मायावती ने अपने बयान में सपा के संभावित तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि लोगों की राय में सपा का तीसरा प्रत्याशी पहले की तरह ‘चेहरा बचाने’ या चुनाव हारने के लिए हो सकता है। यह मायावती की राजनीतिक टिप्पणी और आकलन है, जिसे उन्होंने अपने एक्स पोस्ट के जरिए सामने रखा।
दरअसल, राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवारों की संख्या, उपलब्ध सीटों और विधानसभा में दलों की संख्या के आधार पर चुनावी गणित महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे में किसी भी अतिरिक्त उम्मीदवार के मैदान में उतरने पर राजनीतिक दलों के बीच रणनीतिक गतिविधियां बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि, तीसरे उम्मीदवार के चुनावी परिणाम को लेकर अभी कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
यूपी की राजनीति में बढ़ सकती है बयानबाजी
मायावती के ताजा बयान को उत्तर प्रदेश की राजनीति में बसपा और सपा के बीच जारी राजनीतिक मतभेदों के संदर्भ में देखा जा रहा है। खास तौर पर राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन के बाद दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा सामने आया है।
मायावती ने अपने बयान में बहुजन समाज के साथ-साथ उच्च जाति समाज के गरीब वर्गों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दलितों, आदिवासियों, अति-पिछड़ों, मुस्लिम और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक वर्गों से सपा के PDA दावे को लेकर सावधान रहने की अपील की।
कुल मिलाकर, मायावती के बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में उम्मीदवार चयन, परिवारवाद, धनबल और PDA की राजनीति को लेकर नई बहस को सामने ला दिया है। राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ राजनीतिक दलों की रणनीति और उम्मीदवारों को लेकर बयानबाजी भी जारी रहने की संभावना है। फिलहाल मायावती ने अपने एक्स पोस्ट के जरिए बसपा की उम्मीदवार चयन नीति को सपा से अलग बताते हुए सपा के PDA दावे पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

