प्रतापगढ़ में साढ़े तीन बीघा कृषि भूमि पर कथित अवैध प्लॉटिंग की शिकायत PMO तक पहुंची
धारा 80 की स्वीकृति को लेकर उठे सवाल
शिकायत में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 80 से संबंधित स्वीकृति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि कृषि भूमि का उपयोग आवासीय या अन्य गैर-कृषि प्रयोजन के लिए किया जा रहा है तो उससे संबंधित आवश्यक वैधानिक अनुमति और प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।इसी आधार पर शिकायत में यह भी मांग की गई है कि राजस्व अभिलेखों और मौके की स्थिति का मिलान कराया जाए। साथ ही यह जांच की जाए कि संबंधित गाटा संख्या 418 और 421 के संबंध में भूमि उपयोग परिवर्तन से जुड़ी आवश्यक अनुमति वास्तव में प्राप्त की गई है या नहीं।
ले-आउट स्वीकृति और RERA पंजीकरण पर भी सवाल
मामले में नगर पंचायत स्तर से ले-आउट स्वीकृति को लेकर भी शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित भूमि पर प्लॉटिंग के लिए आवश्यक ले-आउट अनुमोदन नहीं कराया गया। इसके अलावा बिना RERA पंजीकरण के भूखंडों की बिक्री किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।शिकायत में इन सभी बिंदुओं की अलग-अलग जांच की मांग की गई है। विशेष रूप से यह पता लगाने की मांग की गई है कि कथित परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (UPRERA) में पंजीकरण कराया गया था या नहीं। इसके अलावा, यदि कोई पंजीकरण या अनुमति नहीं मिली थी तो प्लॉटिंग गतिविधि किस आधार पर संचालित की जा रही थी, इसकी भी जांच की मांग की गई है।
PMO तक पहुंची शिकायत, दर्ज हुआ सरकारी रिकॉर्ड
मामले को लेकर शिकायत GOVUP/E/2026/0121132 पंजीकरण संख्या के तहत दर्ज की गई। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार शिकायत 18 सितंबर 2026 को प्राप्त हुई थी, जबकि 22 सितंबर 2026 को इस पर कार्रवाई दर्ज की गई। सरकारी पोर्टल पर फिलहाल शिकायत की स्थिति “Case Closed” प्रदर्शित हो रही है।हालांकि, शिकायत के निस्तारण का अर्थ यह नहीं माना जा सकता कि लगाए गए सभी आरोप सही या गलत साबित हो गए हैं। शिकायत में उठाए गए अलग-अलग कानूनी और प्रशासनिक बिंदुओं की स्थिति संबंधित विभागों के रिकॉर्ड तथा मौके की जांच से ही स्पष्ट हो सकती है।
UPRERA जांच में पंजीकरण नहीं मिलने का उल्लेख
निस्तारण टिप्पणी में UPRERA पोर्टल पर संबंधित परियोजना की जांच किए जाने का उल्लेख है। टिप्पणी के अनुसार संबंधित परियोजना का पंजीकरण नहीं पाया गया। साथ ही यह भी बताया गया है कि RERA से जुड़े किसी उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार नोटिस की कार्रवाई प्राधिकरण स्तर से की जाती है।दूसरी ओर, धारा 80 की स्वीकृति और नगर पंचायत से ले-आउट अनुमोदन से जुड़े विषयों को संबंधित राजस्व एवं नगर विकास विभाग के क्षेत्राधिकार का विषय बताया गया है। ऐसे में मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच के लिए संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
मौके की स्थिति की जांच से सामने आएगी वास्तविक तस्वीर
अब मुख्य सवाल यह है कि डंगरी वार्ड स्थित गाटा संख्या 418 और 421 की मौके पर वास्तविक स्थिति क्या है। क्या कृषि भूमि का स्वरूप बदला गया है? क्या धारा 80 के तहत आवश्यक अनुमति प्राप्त है? क्या नगर पंचायत से ले-आउट स्वीकृत कराया गया है? क्या संबंधित परियोजना के लिए RERA से जुड़ी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गई हैं? इन सवालों का जवाब संबंधित अभिलेखों और स्थलीय जांच के आधार पर ही मिल सकेगा।

