कुशीनगर में तटबंध टूटने के बाद बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे CM योगी, राहत का दिया भरोसा

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रिपोर्ट – शैलेंद्र गुप्ता

कुशीनगर। नारायणी नदी के बढ़े जलस्तर और एपी तटबंध में करीब 70 मीटर कटान के बाद कुशीनगर जिले के तमकुहीराज क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। तटबंध टूटने के बाद आसपास के करीब 35 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। ऐसे में प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत-बचाव कार्यों को तेज करने के लिए प्रशासन लगातार जुटा हुआ है। इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को कुशीनगर पहुंचे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया।

मुख्यमंत्री ने राहत शिविरों में पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार संकट की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों के साथ है और राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं की निरंतर निगरानी करने और राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

एपी तटबंध में 70 मीटर कटान से बढ़ी परेशानी

तमकुहीराज तहसील के जवहीं दयाल एहतमाली के पास एपी तटबंध में करीब 70 मीटर का कटान होने के बाद नारायणी नदी का पानी तेजी से आसपास के इलाकों में फैल गया। इसके कारण करीब 35 गांवों में बाढ़ का असर दिखाई देने लगा। कई स्थानों पर लोगों को अपने घरों से निकलकर ऊंचे स्थानों, तटबंधों और सुरक्षित जगहों पर शरण लेनी पड़ी।

बाढ़ के पानी के फैलाव को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू किए। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ ही जरूरतमंद परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। वहीं, प्रशासनिक और बचाव दल लगातार संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने किया हवाई सर्वेक्षण

बाढ़ की गंभीर स्थिति की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को तत्काल राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मंगलवार दोपहर मुख्यमंत्री कुशीनगर पहुंचे। उन्होंने हेलीकॉप्टर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और प्रभावित इलाकों की स्थिति को करीब से देखा।

हवाई सर्वेक्षण के बाद मुख्यमंत्री राहत शिविरों में पहुंचे। यहां उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों से बातचीत की और उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली। प्रभावित लोगों ने भोजन, आवास, बिजली, सड़क और अन्य आवश्यक सुविधाओं से जुड़ी अपनी समस्याएं मुख्यमंत्री के सामने रखीं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

नेपाल से अधिक पानी आने का भी असर

मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से तटबंध टूटने के कारणों और अब तक किए गए राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली। अधिकारियों की ओर से बताया गया कि सामान्य दिनों की तुलना में नारायणी नदी में अचानक अधिक मात्रा में पानी आने से तटबंध पर दबाव बढ़ा। इसके परिणामस्वरूप तटबंध में कटान की स्थिति बनी और बाद में पानी आसपास के क्षेत्रों में फैल गया।

मुख्यमंत्री ने नेपाल से छोड़े गए अधिक पानी को भी बाढ़ की गंभीरता से जुड़े प्रमुख कारणों में शामिल बताया। उन्होंने अधिकारियों को नदी के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए, ताकि आगे किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।

NDRF, SDRF और PAC की टीमें राहत कार्य में जुटीं

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की टीमें लगातार काम कर रही हैं। प्रभावित गांवों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा जरूरतमंद परिवारों तक भोजन और अन्य राहत सामग्री पहुंचाने का काम भी जारी है।

प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जिन स्थानों पर पानी का स्तर अधिक है, वहां लोगों को सुरक्षित रहने और प्रशासन की ओर से निर्धारित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है। साथ ही राहत शिविरों में आवश्यक सुविधाओं को उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।

जनहानि और फसल नुकसान पर सहायता का भरोसा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि यदि बाढ़ के कारण जनहानि होती है तो प्रभावित परिवार को चार लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, क्षतिग्रस्त मकानों के लिए आवश्यक आवासीय सहायता देने और फसल नुकसान का सर्वे कराकर नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराने की बात कही गई।

इससे प्रभावित किसानों और परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नुकसान का आकलन पारदर्शी तरीके से किया जाए और पात्र लोगों तक सरकारी सहायता समय से पहुंचाई जाए।

छह दिनों तक स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश

बाढ़ के बाद उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को अगले छह दिनों तक प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एंटी-वेनम और एंटी-रेबीज दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

इसके अलावा प्रभावित इलाकों में स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बाढ़ के बाद किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या उत्पन्न होने पर लोगों को तत्काल उपचार मिल सके।

बिजली और सड़क जैसी सुविधाओं की बहाली पर जोर

मुख्यमंत्री ने बाढ़ से प्रभावित बिजली, सड़क और अन्य जरूरी सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए। प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि जैसे-जैसे पानी का स्तर कम हो, प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं की बहाली प्राथमिकता के आधार पर की जाए।

फिलहाल प्रशासन, बचाव दल और संबंधित विभागों की टीमें बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत कार्यों में जुटी हैं। मुख्यमंत्री के दौरे के बाद अधिकारियों को राहत-बचाव कार्यों में और तेजी लाने के निर्देश मिले हैं। प्रशासन का प्रयास है कि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान, भोजन, स्वास्थ्य सुविधा और अन्य जरूरी सहायता समय पर उपलब्ध कराई जाए।

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