बागपत में साध्वी प्राची का बयान, अवैध धार्मिक निर्माणों पर कार्रवाई की मांग; जानिए क्या कहा
रिपोर्ट – हैदर मलिक
बागपत: हिंदूवादी नेता साध्वी प्राची ने बागपत पहुंचकर धार्मिक स्थलों और कथित अवैध निर्माणों को लेकर बयान दिया। वह बागपत स्थित परशुरामेश्वर महादेव मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना की। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने देश में कथित तौर पर अवैध रूप से बनाए गए मस्जिद, मदरसे और मजारों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की।
साध्वी प्राची ने कहा कि जिन धार्मिक निर्माणों को संबंधित भूमि और निर्माण नियमों के अनुसार अवैध पाया जाए, उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। इस दौरान उन्होंने कई राजनीतिक और धार्मिक मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। उनके बयान के कुछ हिस्से राजनीतिक रूप से तीखे रहे, जिन्हें उन्होंने अपने व्यक्तिगत विचार के तौर पर रखा।
हाल के समय में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों के निर्माण और भूमि से जुड़े मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई तथा जांच की खबरें सामने आई हैं। उदाहरण के तौर पर सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एक मस्जिद को अदालत के आदेशों के बाद प्रशासन ने हटाया था, जबकि मुरादाबाद और संभल में अन्य धार्मिक स्थलों के निर्माण से जुड़े मामलों की जांच या दस्तावेजों की मांग की गई है।
परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में की पूजा-अर्चना
साध्वी प्राची बागपत के प्रसिद्ध परशुरामेश्वर महादेव मंदिर पहुंचीं। मंदिर में उन्होंने पूजा-अर्चना कर भगवान शिव से देश में शांति और लोगों के कल्याण की प्रार्थना करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि वह बाबा भोलेनाथ से प्रार्थना करने आई थीं कि देश में शांति बनी रहे और जो लोग अशांति फैलाने का प्रयास करते हैं, उन्हें सद्बुद्धि मिले। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए देश में धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों पर अपना पक्ष रखा।
बागपत जिला प्रशासन की वेबसाइट भी परशुरामेश्वर पुरा महादेव मंदिर को जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल करते हुए श्रावण और कांवड़ यात्रा के दौरान यहां विशेष व्यवस्थाओं का उल्लेख करती है।
अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की मांग
साध्वी प्राची ने कहा कि जिन मस्जिदों, मदरसों या मजारों को सरकारी जमीन अथवा अन्य भूमि पर नियमों के विपरीत बनाया गया है, उनकी जांच होनी चाहिए और यदि वे अवैध पाए जाते हैं तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने उज्जैन और देश के अन्य हिस्सों में धार्मिक स्थलों को लेकर चल रही बहस का उल्लेख करते हुए अपने विचार रखे। इसी दौरान उन्होंने यह दावा भी किया कि जमीन की खुदाई के दौरान कई स्थानों पर धार्मिक अवशेष मिल सकते हैं। हालांकि, इस तरह के दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन्हें तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
किसी भी धार्मिक या सार्वजनिक निर्माण की वैधता का निर्धारण संबंधित भूमि रिकॉर्ड, स्वीकृत नक्शे, स्थानीय कानून और सक्षम प्रशासनिक अथवा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है।
धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया अहम
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाल के दिनों में धार्मिक स्थलों से जुड़े निर्माण और भूमि विवाद चर्चा में रहे हैं। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के मामले में अदालत ने सरकारी भूमि पर अनधिकृत कब्जे से संबंधित प्रशासनिक आदेश को बरकरार रखा था, जिसके बाद सितंबर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई। मस्जिद प्रबंधन की ओर से इसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर किए जाने की खबर भी सामने आई।
इसी तरह मुरादाबाद में एक मस्जिद के निर्माण संबंधी दस्तावेज मांगे जाने और संभल में एक मस्जिद से जुड़े मामले की पुरातात्विक जांच की खबरें सामने आई हैं।
ऐसे मामलों में किसी भी निर्माण को अवैध या वैध घोषित करने का अंतिम आधार संबंधित अधिकारियों और न्यायिक प्रक्रिया से सामने आने वाले दस्तावेज और आदेश होते हैं।
सपा प्रवक्ता के बयान पर भी साध्वी प्राची की प्रतिक्रिया
साध्वी प्राची ने बातचीत के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता के कथित बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि सपा की सरकार बनने पर मंदिरों और मठों के दस्तावेजों को लेकर कार्रवाई की बात कही गई है। इसी संदर्भ में उन्होंने सनातन समाज के लोगों से एकजुट रहने की अपील की।
उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मुद्दों पर समाज को अपनी बात रखने के लिए एकजुट रहना चाहिए। इस दौरान उन्होंने “बंटोगे तो कटोगे, एक रहोगे तो सेफ रहोगे” जैसे राजनीतिक नारे का भी इस्तेमाल किया।
यह बयान साध्वी प्राची का राजनीतिक और वैचारिक मत है। किसी राजनीतिक दल या उसके प्रवक्ता की ओर से संबंधित बयान की वास्तविक शब्दावली और संदर्भ अलग हो सकते हैं, इसलिए उनके कथन को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी बयान
साध्वी प्राची ने बातचीत में उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 में मौजूदा सरकार को प्रचंड बहुमत मिलेगा। यह उनका राजनीतिक आकलन और दावा है; इसे चुनाव परिणाम की भविष्यवाणी के रूप में स्वतंत्र तथ्य नहीं माना जा सकता।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां पहले से तेज हैं और विभिन्न दल अपने-अपने मुद्दों को जनता के बीच उठा रहे हैं। ऐसे में धार्मिक स्थलों और पहचान से जुड़े मुद्दे भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं।
शांति और सद्भाव की अपील का भी उल्लेख
मंदिर में पूजा के दौरान साध्वी प्राची ने देश में शांति की कामना करने की बात कही। उन्होंने कहा कि वह भगवान शिव से देश में शांति बनाए रखने और अशांति फैलाने वालों को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना करने आई हैं।
वहीं, धार्मिक स्थलों को लेकर उनके बाद के बयान में उन्होंने कथित अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की मांग को प्रमुखता से रखा। इस पूरे घटनाक्रम में उनके धार्मिक विचारों के साथ-साथ राजनीतिक टिप्पणियां भी सामने आईं।
कुल मिलाकर, बागपत में साध्वी प्राची का दौरा धार्मिक पूजा के साथ-साथ धार्मिक स्थलों से जुड़े मुद्दों पर दिए गए बयानों के कारण चर्चा में रहा। उन्होंने कथित अवैध मस्जिद, मदरसे और मजारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की और इस विषय को लेकर अपनी राजनीतिक राय सामने रखी। वहीं, संबंधित निर्माणों की वैधता का निर्धारण दस्तावेजों, भूमि रिकॉर्ड और सक्षम प्रशासनिक एवं न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।

