लखनऊ में ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश यादव पर हमला, पुरानी पेंशन और PDA को लेकर साधा निशाना
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले नेताओं के बीच बयानबाजी तेज होती जा रही है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। राजभर ने पुरानी पेंशन योजना, सरकारी नौकरियों, पिछड़े और निषाद समाज के प्रतिनिधित्व तथा समाजवादी पार्टी के PDA अभियान को लेकर कई आरोप लगाए।
राजभर ने पुरानी पेंशन योजना के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के मौजूदा रुख पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि पुरानी पेंशन व्यवस्था को बंद करने का फैसला मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में हुआ था। साथ ही उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव जब उत्तर प्रदेश की सत्ता में थे, तब उन्होंने पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल नहीं किया।
हालांकि, पुरानी पेंशन योजना को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग दावे और नीतिगत रुख सामने आते रहे हैं। हाल में अखिलेश यादव ने भी सत्ता में आने पर पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करने की बात कही है और इसके वित्तीय मॉडल को पार्टी के घोषणा पत्र में स्पष्ट करने की बात रिपोर्टों में सामने आई है।
सरकारी नौकरियों को लेकर भी साधा निशाना
ओम प्रकाश राजभर ने अपने बयान में समाजवादी पार्टी के शासनकाल में सरकारी नौकरियों को लेकर भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि उस समय अपनी जाति के लोगों को नौकरी देने का काम किया गया। यह बयान समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार के दौरान सरकारी भर्तियों और सामाजिक प्रतिनिधित्व से जुड़े पुराने राजनीतिक आरोपों की ओर इशारा करता है।
इससे पहले भी राजभर अखिलेश यादव पर पिछड़े वर्गों और विभिन्न सामाजिक समूहों के प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। सितंबर में दिए गए एक बयान में उन्होंने सपा और कांग्रेस पर लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद पिछड़े समुदायों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं देने का आरोप लगाया था। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और इनके संबंध में अलग-अलग दलों के अपने दावे हैं।
शिवपाल यादव पर भी राजभर का पलटवार
ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवपाल यादव ने राजभर और निषाद समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके साथ ही राजभर ने दावा किया कि राजभर और निषाद समाज से आने वाले सांसदों को मंच पर उचित स्थान नहीं दिया गया।
यह मुद्दा सामाजिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक मंचों पर विभिन्न पिछड़े समुदायों की भागीदारी से जुड़ा है। हालांकि, राजभर द्वारा लगाए गए इन आरोपों के संबंध में संबंधित पक्ष का पक्ष अलग हो सकता है। ऐसे में इन दावों को राजभर के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
दरअसल, ओम प्रकाश राजभर और समाजवादी पार्टी के नेताओं के बीच पिछले कुछ समय से सार्वजनिक बयानबाजी जारी है। सितंबर में शिवपाल सिंह यादव ने भी राजभर के बयानों पर प्रतिक्रिया दी थी। दोनों नेताओं के बीच अलग-अलग राजनीतिक मुद्दों पर तीखी टिप्पणियां सामने आई हैं।
PDA को लेकर राजभर ने साधा निशाना
राजभर ने समाजवादी पार्टी के PDA अभियान पर भी सवाल उठाया। उन्होंने PDA को लेकर तंज कसते हुए इसे ‘परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी’ बताया। उनके इस बयान का निशाना समाजवादी पार्टी की उस राजनीतिक रणनीति पर था, जिसमें पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को एक साथ जोड़ने के लिए PDA शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।
समाजवादी पार्टी की ओर से PDA को सामाजिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा राजनीतिक संदेश बताया जाता रहा है, जबकि राजभर लगातार इस अवधारणा पर सवाल उठाते रहे हैं। हाल में भी उन्होंने PDA को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधा था।
2027 से पहले तेज हो रही राजनीतिक बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं की ओर से लगातार बयान सामने आ रहे हैं। ऐसे में पुरानी पेंशन, सरकारी भर्ती, सामाजिक प्रतिनिधित्व और पिछड़े वर्गों की राजनीति प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।
ओम प्रकाश राजभर की ताजा टिप्पणियों को भी इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। उन्होंने एक साथ कई मुद्दों को उठाते हुए अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के पुराने कार्यकाल तथा वर्तमान राजनीतिक अभियान पर सवाल खड़े किए हैं।
वहीं, समाजवादी पार्टी की ओर से पुरानी पेंशन सहित कर्मचारियों और विभिन्न सामाजिक वर्गों से जुड़े मुद्दों पर अपने प्रस्ताव सामने रखे जा रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार अखिलेश यादव ने सरकार बनने की स्थिति में पुरानी पेंशन लागू करने और शिक्षामित्रों समेत शिक्षकों से जुड़े विषयों पर काम करने की बात कही है।
कुल मिलाकर, ओम प्रकाश राजभर के बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में पुरानी पेंशन, सरकारी नौकरियों, सामाजिक प्रतिनिधित्व और PDA जैसे मुद्दों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। चुनाव से पहले इन मुद्दों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के दावे और जवाबी दावे सामने आने की संभावना बनी हुई है।

