कानपुर में शुरू हुई 70वीं जनपदीय विद्यालयीय कबड्डी प्रतियोगिता, 35 टीमों ने दिखाया दम; छात्र-छात्राओं में दिखा उत्साह

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रिपोर्ट – हनुमंत सिंह 

कानपुर: नवाबगंज स्थित सेठ मोती लाल खेड़िया स्कूल में 70वीं जनपदीय विद्यालयीय कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन उत्साह और खेल भावना के साथ किया गया। प्रतियोगिता में कानपुर के विभिन्न विद्यालयों से करीब 35 टीमों ने हिस्सा लिया। इस दौरान 14, 17 और 19 वर्ष आयु वर्ग के छात्र-छात्राओं ने अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों में बेहतर प्रदर्शन करने और अपनी टीम को आगे ले जाने का उत्साह दिखाई दिया।

विद्यालय स्तर पर आयोजित इस प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना और उन्हें प्रतिस्पर्धी मंच उपलब्ध कराना रहा। वहीं, कबड्डी जैसे पारंपरिक भारतीय खेल के माध्यम से विद्यार्थियों में टीम भावना, अनुशासन और आपसी सहयोग की भावना विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

35 विद्यालयीय टीमों ने प्रतियोगिता में लिया हिस्सा

सेठ मोती लाल खेड़िया स्कूल में आयोजित जनपदीय विद्यालयीय कबड्डी प्रतियोगिता में कानपुर के अलग-अलग विद्यालयों की करीब 35 टीमों ने प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता में निर्धारित आयु वर्ग के छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ मैदान पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

14, 17 और 19 वर्ष आयु वर्ग में आयोजित मुकाबलों के दौरान खिलाड़ियों ने कबड्डी के विभिन्न कौशल का प्रदर्शन किया। खेल के दौरान खिलाड़ियों में टीम के लिए बेहतर प्रदर्शन करने की प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। इसके साथ ही, प्रतियोगिता में शामिल विद्यार्थियों को खेल के नियमों और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी मिला।

विद्यालय स्तर से लेकर जनपदीय और आगे मंडलीय स्तर तक होने वाली ऐसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के लिए अपनी प्रतिभा पहचानने का महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती हैं। इसके अलावा, इन आयोजनों के जरिए विद्यार्थियों को नियमित खेल गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरणा मिलती है।

विजेता टीम को ट्रॉफी देकर किया जाएगा सम्मानित

मंडलीय क्रीड़ा सचिव अनुराग मिश्रा ने प्रतियोगिता के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली विजेता टीम को ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के लिए खेल केवल शारीरिक गतिविधि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से उनमें खेल भावना और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना भी विकसित होती है।

अनुराग मिश्रा के मुताबिक, विद्यालयों में खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए बेहतर मंच देता है। ऐसे आयोजनों में भाग लेने से बच्चों को अपनी क्षमताओं को समझने और उनमें सुधार करने का अवसर मिलता है।

उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ खेलों में भी सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए। खेल गतिविधियां बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और उन्हें टीम के साथ मिलकर लक्ष्य हासिल करने की सीख देती हैं।

पढ़ाई के साथ खेलों में भी रुचि लें विद्यार्थी

स्कूल की प्रधानाचार्य सुमन चंदोला ने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी रुचि लेनी चाहिए। उन्होंने कबड्डी को देश का प्रमुख पारंपरिक खेल बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को इस खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

प्रधानाचार्य के अनुसार, विद्यालयों में पढ़ाई के साथ खेलों को पर्याप्त महत्व मिलने से विद्यार्थियों को अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। कबड्डी जैसे खेलों में टीम के सभी खिलाड़ियों को एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाकर खेलना होता है। इसलिए ऐसे खेल विद्यार्थियों में सहयोग और टीम भावना विकसित करने में भी सहायक होते हैं।

उन्होंने कहा कि विद्यालय में इस तरह की प्रतियोगिता का आयोजन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है। इससे बच्चों को खेल के मैदान में अपनी क्षमता दिखाने के साथ-साथ प्रतियोगिता के अनुभव से सीखने का अवसर मिलता है।

एशियन गेम्स से खिलाड़ियों को मिली प्रेरणा

स्कूल के खेल विभाग के शिक्षक और खेल प्रभारी ओम प्रकाश ने कहा कि हाल ही में एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों ने देश का नाम रोशन किया है। भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन से विद्यार्थियों में भी खेलों के प्रति उत्साह बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियां बच्चों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। इसी तरह विद्यालय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए शुरुआती मंच उपलब्ध कराती हैं।

ओम प्रकाश के मुताबिक, कबड्डी भारतीय खेल संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण खेल है। इसलिए विद्यार्थियों को इस खेल के प्रति प्रोत्साहित करना जरूरी है। विद्यालयों में नियमित खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन से बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने और प्रतिस्पर्धी माहौल में प्रदर्शन करने का अनुभव मिलता है।

खेल प्रतिभाओं को मंच देने पर जोर

70वीं जनपदीय विद्यालयीय कबड्डी प्रतियोगिता के आयोजन के दौरान विद्यार्थियों में खेल के प्रति उत्साह देखने को मिला। विभिन्न विद्यालयों से पहुंची टीमों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। वहीं, आयोजन से जुड़े शिक्षकों और खेल अधिकारियों ने विद्यार्थियों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

दरअसल, विद्यालयों में होने वाली खेल प्रतियोगिताएं बच्चों को अपनी प्रतिभा पहचानने के साथ उसे निखारने का अवसर देती हैं। कबड्डी जैसे टीम आधारित खेलों में खिलाड़ियों को शारीरिक क्षमता के साथ रणनीति, अनुशासन और आपसी तालमेल की भी आवश्यकता होती है। ऐसे में प्रतियोगिताओं का अनुभव विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में उपयोगी हो सकता है।

कानपुर के नवाबगंज स्थित सेठ मोती लाल खेड़िया स्कूल में आयोजित इस प्रतियोगिता ने एक बार फिर विद्यालयी खेल गतिविधियों के महत्व को सामने रखा। प्रतियोगिता में शामिल छात्र-छात्राओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया और खेल के प्रति अपनी रुचि का प्रदर्शन किया। वहीं, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीम को ट्रॉफी देकर सम्मानित किए जाने की घोषणा से खिलाड़ियों में उत्साह और बढ़ा।

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