श्रावस्ती में बारिश और राप्ती के बढ़े जलस्तर से बढ़ी चिंता, 87 हेक्टेयर धान की फसल प्रभावित
रिपोर्ट – सूर्य प्रकाश शुक्ला
श्रावस्ती: जिले में लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। राप्ती नदी के बढ़ते जलस्तर, नदी किनारे कटान और ग्रामीण इलाकों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। इकौना, जमुनहा और आसपास के तटवर्ती क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। हालिया स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है और प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण कर रहा है।
प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, अतिवृष्टि से जिले में अब तक 87 हेक्टेयर धान की फसल प्रभावित हुई है। इसके अलावा 22 कच्चे मकान, दो पक्के आवासीय मकान और 11 पशुशेड क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। नुकसान का आकलन करने के लिए संबंधित विभागों की ओर से सर्वे कराया जा रहा है।
राप्ती नदी के जलस्तर पर प्रशासन की नजर
लगातार बारिश के कारण राप्ती नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। 27 सितंबर की स्थानीय रिपोर्टों में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी। इसके चलते जमुनहा, इकौना और आसपास के तटवर्ती इलाकों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाई।
वहीं, प्रशासनिक स्तर पर नदी के जलस्तर और कटान की स्थिति पर लगातार निगरानी की जा रही है। बाढ़ चौकियों को सक्रिय रखा गया है और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव दल को तत्काल मौके पर भेजने की तैयारी की गई है।
जिला प्रशासन के अनुसार फिलहाल आबादी वाले क्षेत्रों में बाढ़ से बड़े स्तर पर जनजीवन प्रभावित होने की स्थिति नहीं है। हालांकि, नदी के जलस्तर में बदलाव को देखते हुए संवेदनशील गांवों में सतर्कता बनाए रखना जरूरी है।
इकौना के मझौवा सुमाल में कटान की स्थिति
इकौना क्षेत्र के मझौवा सुमाल में नदी किनारे कटान की स्थिति बनी हुई है। इससे निर्माणाधीन पुल के अप्रोच मार्ग को लेकर भी चिंता बढ़ी है। नदी के लगातार बहाव और किनारे की मिट्टी के कटाव के कारण निर्माण कार्य से जुड़े हिस्से पर दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ऐसे में संबंधित विभाग को निर्माणाधीन पुल और उसके आसपास के हिस्से की तकनीकी स्थिति पर नजर रखने की जरूरत है। कटान की स्थिति को देखते हुए आवश्यकतानुसार सुरक्षात्मक उपाय किए जा सकते हैं, ताकि मार्ग को नुकसान से बचाया जा सके।
जमुनहा के कई गांवों में जलभराव
जमुनहा क्षेत्र के कई गांवों में बारिश और जलभराव के कारण लोगों की परेशानियां बनी हुई हैं। नदी के आसपास के निचले इलाकों में पानी जमा होने से आवागमन प्रभावित होने की स्थिति बनी है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है।
इससे पहले भी राप्ती का जलस्तर बढ़ने पर तटवर्ती गांवों में बाढ़ की आशंका बढ़ी थी। प्रशासन ने बाढ़ चौकियों, नाव और नाविकों को अलर्ट रखने के साथ संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ाई थी।
87 हेक्टेयर धान की फसल प्रभावित
अतिवृष्टि का असर खेती पर भी पड़ा है। प्रशासन के अनुसार जिले में करीब 87 हेक्टेयर धान की फसल प्रभावित हुई है। धान की खेती के लिए अधिक पानी कई परिस्थितियों में नुकसान का कारण बन सकता है, खासकर तब जब खेतों में पानी लंबे समय तक जमा रहे या तेज बारिश के साथ फसल गिर जाए।
कृषि क्षेत्र में हुए नुकसान का वास्तविक आकलन सर्वे पूरा होने के बाद स्पष्ट होगा। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि नुकसान का रिकॉर्ड तैयार किया जा सके।
मकान और पशुशेड भी हुए क्षतिग्रस्त
बारिश और तेज हवा के कारण जिले में कच्चे और पक्के मकानों के साथ पशुशेड को भी नुकसान पहुंचने की सूचना है। प्रशासनिक जानकारी के अनुसार 22 कच्चे मकान, दो पक्के आवासीय मकान और 11 पशुशेड क्षतिग्रस्त हुए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे मकानों और पशुशेड की स्थिति को देखते हुए स्थानीय स्तर पर निरीक्षण जरूरी है। साथ ही, जिन परिवारों को नुकसान हुआ है, उनके मामलों का सर्वे कर नियमानुसार सहायता की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।
बिजली व्यवस्था पर भी बारिश का असर
तेज हवा और बारिश के कारण बिजली के बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचने की सूचना है। प्रशासनिक जानकारी के अनुसार 25 डबल पोल ट्रांसफार्मर और 433 बिजली के पोल क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा कई स्थानों पर पेड़ों के तार और केबल पर गिरने के कारण विद्युत व्यवस्था प्रभावित हुई है।
बिजली विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई-छंटाई और रास्तों से बाधाएं हटाने का काम कर रही हैं। वहीं, बिजली के टूटे पोल और क्षतिग्रस्त तारों के आसपास लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। मरम्मत का काम पूरा होने तक ऐसे स्थानों से दूरी बनाए रखना सुरक्षित रहेगा।
24 घंटे सक्रिय जिला आपदा नियंत्रण कक्ष
बारिश और नदी के जलस्तर को देखते हुए जिला आपदा नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखा गया है। प्रशासन की ओर से जलस्तर, कटान और संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है। बाढ़ चौकियों और राहत-बचाव टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है।
हालिया प्रशासनिक निरीक्षणों में अधिकारियों ने संभावित बाढ़ की स्थिति बनने पर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारियों की समीक्षा की है। साथ ही, राहत केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने और जरूरत पड़ने पर मेडिकल टीम तथा अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने सतर्क रहने पर दिया जोर
अपर जिलाधिकारी श्रावस्ती ललित कुमार के अनुसार, प्रशासन की प्राथमिकता संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए रखना और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत-बचाव कार्रवाई सुनिश्चित करना है। जिला प्रशासन की ओर से जलस्तर और कटान की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
फिलहाल श्रावस्ती में बारिश का असर कई क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। राप्ती नदी के जलस्तर में बदलाव, कटान, जलभराव, फसल और बिजली व्यवस्था को हुए नुकसान के बीच प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। हालांकि, स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता के अनुसार राहत एवं बचाव कार्य आगे बढ़ाए जाएंगे।
स्थानीय लोगों के लिए भी जरूरी है कि वे नदी के किनारे या कटान प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से न जाएं और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। खासकर बारिश के दौरान बिजली के क्षतिग्रस्त तारों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखना जरूरी है।

