सोनभद्र में पितृपक्ष के पहले दिन सतत वाहिनी नदी तट पर पिंडदान और तर्पण, सफाई व्यवस्था को लेकर नाराजगी

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रिपोर्ट – ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी 

सोनभद्र: जिले के विंढमगंज थाना क्षेत्र में पितृपक्ष के प्रथम दिन श्रद्धालुओं ने अपने पितरों के निमित्त पिंडदान और तर्पण किया। बुटबेढवा ग्राम पंचायत में भारतीय इंटरमीडिएट कॉलेज के खेल मैदान से सटे सतत वाहिनी नदी तट पर बने छठ घाट पर रविवार सुबह धार्मिक अनुष्ठानों के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

पितृपक्ष शुरू होते ही सुबह करीब सात बजे से श्रद्धालुओं के घाट पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। लोगों ने सबसे पहले नदी में स्नान किया और इसके बाद अपने पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए।

इस दौरान पंडित राजू रंजन तिवारी ने श्रद्धालुओं को धार्मिक विधि-विधान के अनुसार पिंडदान और तर्पण की प्रक्रिया कराई।

जौ, तिल, पुष्प और जल से किया तर्पण

घाट पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए जौ, तिल, पुष्प और जल अर्पित किया। कई लोगों ने पंडित के मार्गदर्शन में पिंडदान की रस्म पूरी की। इस दौरान घाट पर धार्मिक वातावरण बना रहा और लोग अपने पूर्वजों को याद करते हुए पूजा-अर्चना करते नजर आए।

पितृपक्ष के दौरान लोग अपने दिवंगत पूर्वजों का स्मरण करते हैं और परिवार की परंपराओं के अनुसार श्राद्ध, तर्पण तथा पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म करते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में इन अनुष्ठानों की विधि और परंपराओं में स्थानीय स्तर पर कुछ अंतर भी देखने को मिलता है।

पंडित ने बताया पितृपक्ष का धार्मिक महत्व

पंडित राजू रंजन तिवारी ने बताया कि पितृपक्ष में श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करने, तर्पण और पिंडदान करने की धार्मिक परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दौरान किए जाने वाले कर्मकांड पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम माने जाते हैं।

उन्होंने बताया कि श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पितरों के लिए धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए तर्पण और पिंडदान से पितरों की शांति की कामना की जाती है और परिवार में सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है।

घाट पर सफाई व्यवस्था को लेकर श्रद्धालुओं में नाराजगी

जहां एक ओर पितृपक्ष के पहले दिन श्रद्धालुओं ने श्रद्धा के साथ धार्मिक अनुष्ठान किए, वहीं दूसरी ओर सतत वाहिनी नदी तट पर बने छठ घाट की साफ-सफाई को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली।

श्रद्धालुओं ने घाट पर गंदगी होने की शिकायत करते हुए ग्राम पंचायत स्तर पर तत्काल सफाई कराने की मांग की। लोगों का कहना है कि पितृपक्ष की अवधि में आने वाले दिनों में घाट पर श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ सकती है। ऐसे में यदि समय रहते साफ-सफाई नहीं कराई गई तो लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

नियमित सफाई कराने की मांग

स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, धार्मिक अनुष्ठानों के लिए घाट पर स्वच्छ वातावरण होना जरूरी है। पितृपक्ष के दौरान लोग सुबह के समय नदी तट पर स्नान, तर्पण और पिंडदान के लिए पहुंचते हैं। इसलिए घाट और उसके आसपास नियमित रूप से सफाई की व्यवस्था किए जाने की जरूरत है।

लोगों ने ग्राम पंचायत के प्रशासक बने ग्राम प्रधान से घाट की तत्काल सफाई कराने की मांग की है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं ने प्रशासन से भी धार्मिक स्थल की स्वच्छता और मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान देने की अपील की है।

आने वाले दिनों में बढ़ सकती है श्रद्धालुओं की संख्या

पितृपक्ष कई दिनों तक चलने वाला धार्मिक पक्ष है। ऐसे में शुरुआती दिन के बाद घाट पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना रहती है। विशेष रूप से उन परिवारों के लोग यहां पहुंच सकते हैं, जो स्थानीय परंपरा के अनुसार नदी तट पर पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करते हैं।

इसी वजह से स्थानीय लोगों ने पहले ही घाट की सफाई, कचरा हटाने और आसपास के क्षेत्र को व्यवस्थित रखने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान साफ-सफाई के साथ-साथ लोगों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

श्रद्धा के साथ व्यवस्था पर भी जोर

सतत वाहिनी नदी तट पर पितृपक्ष के पहले दिन श्रद्धालुओं ने अपने पितरों का स्मरण कर धार्मिक अनुष्ठान किए। सुबह से ही घाट पर लोगों की आवाजाही बनी रही। पंडित राजू रंजन तिवारी के मार्गदर्शन में श्रद्धालुओं ने तर्पण और पिंडदान की रस्म पूरी की।

हालांकि, घाट की सफाई को लेकर सामने आई शिकायत ने स्थानीय व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत भी सामने रखी है। श्रद्धालुओं की मांग है कि पितृपक्ष के दौरान घाट की नियमित सफाई कराई जाए, ताकि यहां आने वाले लोगों को स्वच्छ और सुविधाजनक वातावरण मिल सके।

फिलहाल स्थानीय लोगों की निगाहें इस बात पर हैं कि ग्राम पंचायत और प्रशासन की ओर से घाट की साफ-सफाई को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं। वहीं, पितृपक्ष के आगे बढ़ने के साथ घाट पर श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होने की संभावना को देखते हुए व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग भी तेज हो गई है।

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