बिजनौर के नूरपुर में करंट की चपेट में आने से किसान की मौत, पत्नी भी झुलसी
Digital UP News Desk
बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नूरपुर क्षेत्र में रविवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में 58 वर्षीय किसान की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। घटना ग्राम अब्दुल्लापुर दहाना में उस समय हुई, जब किसान बारिश के कारण गिरी गन्ने की पौध को सीधा कर रहे थे। इसी दौरान उनका हाथ शौचालय के पास कटे हुए बिजली के तार के संपर्क में आ गया और वह करंट की चपेट में आ गए।
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। किसान को बचाने के लिए उनकी पत्नी भी दौड़ीं, लेकिन उन्हें भी करंट का झटका लगा। इसके बाद आसपास के लोगों ने मौके पर पहुंचकर बिजली के तार को काटकर दोनों को अलग किया। हालांकि, तब तक किसान बेहोश हो चुके थे। परिजन उन्हें तत्काल निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
गन्ने की पौध सीधी करते समय हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, नूरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम अब्दुल्लापुर दहाना निवासी इसरार अहमद (58) पुत्र यूसुफ खेती-किसानी करते थे। रविवार सुबह बारिश के बाद वह खेत में गन्ने की पौध को सीधा करने के लिए गए थे। बारिश और तेज हवा के कारण खेत में गन्ने की पौध गिर गई थी।
बताया गया कि पौध को ठीक करते समय वह शौचालय के पास मौजूद एक कटे हुए बिजली के तार के संपर्क में आ गए। तार में करंट होने के कारण उन्हें बिजली का तेज झटका लगा और वह मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़े।
घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों और परिजनों को जानकारी हुई तो उन्होंने तत्काल मदद के लिए दौड़ लगाई। इस बीच किसान की पत्नी भी उन्हें बचाने पहुंचीं, लेकिन बिजली के संपर्क में आने के कारण उन्हें भी करंट का झटका लगा।
पड़ोसियों ने तार काटकर दोनों को बचाया
घटना के दौरान महिला के शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। स्थिति को देखते हुए पड़ोसियों ने बिजली का तार काटकर दोनों को करंट के संपर्क से अलग किया। इसके बाद किसान को आनन-फानन में निजी अस्पताल ले जाया गया।
हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने इसरार अहमद को मृत घोषित कर दिया। किसान की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। घटना के बाद गांव में भी शोक का माहौल है।
वहीं, हादसे में किसान की पत्नी को भी करंट लगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पड़ोसियों की तत्परता से उन्हें भी बिजली के तार से अलग किया गया। हादसे के बाद परिवार और आसपास के लोगों में बिजली के खुले या कटे तार को लेकर चिंता बनी हुई है।
बारिश के बीच बढ़ जाता है बिजली के तारों का खतरा
बारिश के मौसम में बिजली से जुड़े हादसों का खतरा बढ़ जाता है। खासकर खेतों, घरों और रास्तों के आसपास बिजली के कटे या खुले तार दिखाई देने पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। पानी की मौजूदगी में बिजली का करंट आसपास के हिस्से में भी फैल सकता है।
नूरपुर के अब्दुल्लापुर दहाना गांव में हुई घटना भी इसी तरह की सावधानी की जरूरत को सामने लाती है। बताया जा रहा है कि किसान बारिश से गिरी गन्ने की पौध को ठीक करने के दौरान उस तार की चपेट में आए, जो शौचालय के पास कटा हुआ पड़ा था।
ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के तारों की नियमित जांच और खराब तारों की समय पर मरम्मत जरूरी हो जाती है। वहीं, लोगों को भी बारिश के दौरान बिजली के तारों के आसपास जाने से बचना चाहिए।
खेती-किसानी करते थे इसरार अहमद
परिजनों के अनुसार, इसरार अहमद खेती-किसानी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनकी उम्र 58 वर्ष थी। परिवार में उनकी पत्नी के अलावा दो बेटे हैं। बताया गया है कि उनके दो बेटों में से एक बेटा कुवैत में रहता है।
किसान की अचानक हुई मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिस समय परिवार खेती-किसानी से जुड़े रोजमर्रा के काम में लगा था, उसी दौरान हुए हादसे ने परिवार को गहरा सदमा दिया। घटना की जानकारी मिलने के बाद रिश्तेदार और ग्रामीण भी परिवार को सांत्वना देने के लिए पहुंचने लगे।
गांव में शोक का माहौल
इसरार अहमद की मौत की खबर जैसे ही गांव में फैली, ग्रामीणों में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने घटना पर दुख जताते हुए बारिश के मौसम में बिजली के तारों को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत बताई।
घटना के बाद ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी रही कि यदि बिजली का कटे हुए तार समय रहते ठीक कर दिया जाता तो हादसा टल सकता था। हालांकि, बिजली के तार की स्थिति और हादसे के कारणों से संबंधित आधिकारिक जानकारी संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल परिवार में मातम का माहौल है और किसान की मौत से परिजन सदमे में हैं। हादसे ने एक बार फिर बारिश के मौसम में खेतों और घरों के आसपास बिजली के तारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत को सामने ला दिया है।
बारिश के दौरान ग्रामीणों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी कटे, टूटे या खुले बिजली के तार को स्वयं न छुएं। ऐसी स्थिति में तत्काल बिजली आपूर्ति बंद कराने और संबंधित विभाग को सूचना देने की आवश्यकता होती है। इससे संभावित दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है।

