बस्ती में भारी बारिश से फसलों को नुकसान, सांसद रामप्रसाद चौधरी ने मांगा किसानों को मुआवजा
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बस्ती: पूर्वी उत्तर प्रदेश में लगातार हुई भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है। बस्ती समेत आसपास के क्षेत्रों में मौसम की प्रतिकूल स्थिति से खेतों में खड़ी फसलें प्रभावित हुई हैं। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। फसल नुकसान के बीच बस्ती के सांसद रामप्रसाद चौधरी ने प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता और उचित मुआवजा दिलाने की मांग उठाई है। संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार रामप्रसाद चौधरी बस्ती लोकसभा क्षेत्र से वर्तमान सांसद हैं।
सांसद ने इस संबंध में प्रदेश के कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का सर्वे कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के कारण जिन किसानों की फसलें प्रभावित हुई हैं, उनका स्थलीय आकलन कराया जाना चाहिए। इसके बाद पात्र किसानों को नियमानुसार जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
तेज हवाओं और बारिश से फसलों को नुकसान
बताया गया है कि पूर्वांचल के विभिन्न हिस्सों में हुई तेज बारिश और हवाओं का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ा है। खेतों में खड़ी फसलों को मौसम की मार झेलनी पड़ी है। कई स्थानों पर फसलें प्रभावित होने से किसानों के सामने आर्थिक नुकसान की स्थिति पैदा हुई है।
किसानों के लिए फसल केवल खेत में खड़ी उपज नहीं होती, बल्कि उसके पीछे महीनों की मेहनत और लागत जुड़ी होती है। ऐसे में प्राकृतिक आपदा के कारण फसल खराब होने पर किसान की आय प्रभावित होती है। इसके अलावा अगली फसल की तैयारी, कृषि लागत और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने की चुनौती भी बढ़ सकती है।
इसी को देखते हुए सांसद रामप्रसाद चौधरी ने सरकार से नुकसान का वास्तविक आकलन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सर्वे के आधार पर प्रभावित किसानों तक राहत पहुंचाई जानी चाहिए।
कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम से सर्वे की मांग
सांसद ने अपने पत्र में प्रभावित क्षेत्रों में कृषि एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों के माध्यम से स्थलीय सर्वे कराने की मांग की है। इसके तहत खेतों में जाकर फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने और पात्र किसानों की पहचान करने की बात कही गई है।
सर्वे की प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फसल नुकसान का वास्तविक आकलन मौके पर निरीक्षण के बाद ही किया जा सकता है। ऐसे में प्रभावित गांवों और खेतों का रिकॉर्ड तैयार होने से राहत एवं सहायता की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
वहीं, उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय की वेबसाइट पर 21 सितंबर 2026 के शासनादेश में बाढ़ से प्रभावित किसानों को राहत सहायता और कृषि निवेश अनुदान उपलब्ध कराने के लिए राज्य आपदा मोचक निधि से धन आवंटन का उल्लेख है।
किसानों को जल्द आर्थिक सहायता मिलने की मांग
सांसद रामप्रसाद चौधरी ने सरकार से मांग की है कि फसल नुकसान के सर्वे में अनावश्यक देरी न हो। सर्वे पूरा होने के बाद पात्र किसानों को निर्धारित नियमों के अनुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदा के समय किसानों को राहत पहुंचाना जरूरी है। समय पर सहायता मिलने से प्रभावित किसानों को आर्थिक दबाव से उबरने में कुछ मदद मिल सकती है। खास तौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए फसल नुकसान का असर उनके पूरे कृषि चक्र पर पड़ सकता है।
सांसद ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार किसानों की समस्या का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करेगी और प्रभावित किसानों को राहत दिलाने की दिशा में कदम उठाएगी।
पूर्वांचल में मौसम की स्थिति बनी चिंता का कारण
लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में कृषि क्षेत्र प्रभावित होने की चिंता बनी हुई है। बारिश का सीधा असर खेतों में खड़ी फसलों पर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों की नजर अब मौसम की स्थिति के साथ-साथ प्रशासन की ओर से होने वाले सर्वे पर भी है।
हालिया रिपोर्टों में भी उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश के कारण फसल नुकसान का उल्लेख किया गया है। ऐसे मौसम में फसल नुकसान की सूचना और मुआवजे की प्रक्रिया को लेकर किसानों के बीच जानकारी की आवश्यकता भी बढ़ जाती है।
सर्वे के बाद साफ होगी नुकसान की वास्तविक तस्वीर
फिलहाल फसलों को हुए नुकसान की वास्तविक स्थिति का विस्तृत आकलन सरकारी सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। अलग-अलग क्षेत्रों में नुकसान की मात्रा मौसम, फसल की स्थिति और बारिश की तीव्रता के आधार पर अलग हो सकती है।
इसलिए प्रभावित किसानों के लिए खेतों में हुए नुकसान का सही रिकॉर्ड तैयार होना महत्वपूर्ण है। सांसद की ओर से उठाई गई मांग के बाद अब किसानों की नजर प्रशासन और प्रदेश सरकार की कार्रवाई पर है।
बस्ती समेत पूर्वांचल के किसान चाहते हैं कि प्रभावित क्षेत्रों में जल्द सर्वे कराया जाए और नुकसान के अनुसार पात्र किसानों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराई जाए। यदि सर्वे और सहायता प्रक्रिया समय पर पूरी होती है, तो प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को आर्थिक सहारा मिल सकता है।

