इटावा बिजली विभाग में कथित वित्तीय अनियमितता, अधिशासी अभियंता, लेखाधिकारी और ठेकेदार पर केस
Digital UP News Desk
इटावा। उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में विद्युत विभाग से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। विद्युत वितरण खंड प्रथम के अधिशासी अभियंता, लेखाधिकारी और एक विभागीय ठेकेदार के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी और दस्तावेजों में कूटरचना के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश के बाद की गई है। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 468 के तहत प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
शिकायतकर्ता अधिवक्ता अजय द्विवेदी ने आरोप लगाया है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार के बीच कथित मिलीभगत से सरकारी धन के भुगतान में अनियमितता की गई। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि कुछ कार्यों को कागजों में पूरा दिखाकर उनके एवज में भुगतान कराया गया। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
RTI से मिली जानकारी के आधार पर लगाए गए आरोप
मामले में शिकायतकर्ता की ओर से सूचना के अधिकार यानी RTI के माध्यम से प्राप्त जानकारी को आधार बनाए जाने की बात कही गई है। आरोप है कि विभागीय रिकॉर्ड में कई ऐसे कार्य और पैकेज दर्ज पाए गए, जिनके वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
शिकायत के अनुसार, एक वर्ष की अवधि में एक करोड़ रुपये से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितता का दावा किया गया है। आरोप यह भी है कि कुछ मामलों में बिना वास्तविक कार्य के ही पैकेज स्वीकृत किए गए और इसके बाद भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी गई।
हालांकि, यह राशि और इससे जुड़े आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए दावों का हिस्सा हैं। इनकी वास्तविकता का निर्धारण पुलिस जांच, विभागीय दस्तावेजों और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उपलब्ध कराए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगा।
फर्जी पंजीकरण और दस्तावेजों में काम दिखाने का आरोप
शिकायत में कथित तौर पर फर्जी पंजीकरण और दस्तावेजों में कार्य पूरा दर्शाए जाने का आरोप लगाया गया है। आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि कुछ कामों के लिए कागजी प्रक्रिया पूरी की गई, जबकि मौके पर कार्य की स्थिति अलग होने का दावा किया गया।
इसके अलावा, शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार की भूमिका के कारण सरकारी धन का भुगतान ऐसे कार्यों के लिए किया गया, जिनके वास्तविक निष्पादन पर सवाल हैं।
मामले में धारा 420 और 468 के तहत केस दर्ज होना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शिकायत में धोखाधड़ी और दस्तावेजों की कथित कूटरचना से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। पुलिस अब एफआईआर में दर्ज आरोपों के आधार पर संबंधित रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच कर सकती है।
अधिशासी अभियंता और लेखाधिकारी भी आरोपी
इस प्रकरण में विद्युत वितरण खंड प्रथम के अधिशासी अभियंता और लेखाधिकारी के साथ विभागीय ठेकेदार को भी आरोपी बनाया गया है। शिकायतकर्ता ने तीनों के बीच कथित मिलीभगत का आरोप लगाया है।
सरकारी विभागों में होने वाले निर्माण, मरम्मत और अन्य कार्यों के लिए स्वीकृति, कार्यादेश, माप पुस्तिका, बिल और भुगतान जैसे कई स्तरों से प्रक्रिया गुजरती है। ऐसे में इस मामले की जांच के दौरान संबंधित दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती होगी कि जिन कार्यों और भुगतानों को लेकर शिकायत की गई है, वे वास्तव में हुए थे या नहीं और यदि हुए थे तो उनके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
एक साल में एक करोड़ रुपये से अधिक की अनियमितता का दावा
शिकायतकर्ता की ओर से दावा किया गया है कि करीब एक वर्ष के दौरान एक करोड़ रुपये से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितता हुई। इसके साथ ही यह आरोप भी लगाया गया कि बिना काम कराए कुछ पैकेजों को स्वीकृत कर भुगतान किया गया।
हालांकि, किसी भी सरकारी धन के दुरुपयोग या वित्तीय हेराफेरी के आरोप को जांच के निष्कर्ष आने तक अंतिम तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। एफआईआर में आरोप दर्ज होना जांच की शुरुआत है, दोष सिद्ध होना नहीं।
इसी वजह से अब पुलिस जांच में दस्तावेजों, भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड, कार्यस्थल की स्थिति और संबंधित अधिकारियों व ठेकेदार के बयानों की भूमिका अहम होगी।
न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज हुआ मुकदमा
रिपोर्ट के अनुसार, मामला न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज किया गया है। पुलिस ने शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है।
अब जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी तथ्यात्मकता है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि करने वाले पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो पुलिस आगे कानूनी कार्रवाई कर सकती है। वहीं, जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं होने की स्थिति में उसका निष्कर्ष भी सामने आएगा।
अधीक्षण अभियंता कार्यालय से जुड़ा मामला
यह प्रकरण इटावा अधीक्षण अभियंता कार्यालय से जुड़े विद्युत विभागीय कार्यों और रिकॉर्ड को लेकर उठे सवालों से संबंधित बताया जा रहा है। मामले के सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर भी संबंधित दस्तावेजों और कार्यों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

