कानपुर नगर निगम सदन में भाजपा-सपा पार्षद भिड़े, हंगामे के बाद परिसर में भारी पुलिस बल तैनात
रिपोर्ट: हनुमंत सिंह पिंटू
कानपुर। कानपुर नगर निगम सदन की बैठक शनिवार को उस समय हंगामे में बदल गई, जब भाजपा और समाजवादी पार्टी (सपा) के पार्षदों के बीच तीखी बहस के बाद धक्का-मुक्की और मारपीट की स्थिति बन गई। कार्यकारिणी के छह रिक्त पदों के चुनाव के लिए बुलाई गई बैठक में कई मुद्दों को लेकर पहले से ही माहौल गरम था। विवाद बढ़ने के बाद नगर निगम परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
बैठक का मुख्य एजेंडा नगर निगम कार्यकारिणी के छह रिक्त सदस्यों का चुनाव था। इससे पहले सामने आई जानकारी के मुताबिक, कार्यकारिणी के कुछ सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो चुका था और एक सीट पार्षद के निधन के कारण रिक्त हुई थी। इसी वजह से छह नए सदस्यों के चुनाव के लिए सदन की बैठक बुलाई गई थी।
चुनाव को लेकर पहले से बनी थी सरगर्मी
नगर निगम कार्यकारिणी में कुल 12 सदस्य होते हैं। छह सदस्यों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई नियुक्तियों को लेकर पार्षदों के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं। बैठक से पहले सभी दलों के पार्षदों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि, कुछ बागी पार्षदों की सक्रियता के कारण चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति भी बनी हुई थी।
इसी बीच सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो शहर की बदहाल सड़कों का मुद्दा भी सामने आया। भाजपा पार्षद दल के नेता की ओर से सड़कों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए। कानपुर में सड़कों और गड्ढों की समस्या को लेकर नगर निगम स्तर पर पहले भी अधिकारियों के साथ बैठकें हो चुकी हैं।
मंगल भवन की कमेटी को लेकर भी सवाल
बैठक के दौरान मंगल भवन की कमेटी को भंग किए जाने का मुद्दा भी चर्चा में रहा। इस मामले में नगर आयुक्त से सवाल-जवाब किए गए। हाल के दिनों में मंगल भवन की कमेटी को लेकर नगर निगम के भीतर और भाजपा नेताओं के बीच भी मतभेद सामने आए हैं। महापौर प्रमिला पांडेय और भाजपा सांसद रमेश अवस्थी की ओर से इस मुद्दे पर अलग-अलग बातें सामने आई थीं।
इसके अलावा कुछ बागी पार्षदों ने सदन की कार्यवाही और बैठक के एजेंडे को लेकर विरोध जताया। उनका कहना था कि शहर की जनसमस्याओं पर पर्याप्त चर्चा के बजाय बैठक को मुख्य रूप से कार्यकारिणी चुनाव तक सीमित रखा गया है।
ज्ञापन देने पहुंचे पार्षद ने किया बहिष्कार
सदन की कार्यवाही के दौरान पार्षद आलोक पांडेय भी अपने क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं का ज्ञापन लेकर महापौर के पास पहुंचे। बताया गया कि ज्ञापन सौंपने के दौरान स्थानीय लोगों को थाने भेजे जाने के विरोध में उन्होंने नाराजगी जताई। इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया और बाहर निकल गए।
वहीं, सदन के भीतर अलग-अलग मुद्दों पर पार्षदों के बीच बहस का सिलसिला चलता रहा। धीरे-धीरे यह बहस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गई। इसके बाद भाजपा और सपा पार्षदों के बीच विवाद बढ़ गया।
देखते ही देखते बढ़ा विवाद
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सदन के भीतर दोनों पक्षों के पार्षदों के बीच पहले तीखी नोकझोंक हुई। इसके बाद धक्का-मुक्की शुरू हो गई। स्थिति बिगड़ने पर दोनों पक्षों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई। इससे सदन में मौजूद पार्षदों और अन्य लोगों के बीच अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई।
घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने लगा। वीडियो में सदन के भीतर हंगामे और पार्षदों के बीच विवाद की स्थिति दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की पड़ताल की जा रही है।
सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात
हंगामे की सूचना मिलने के बाद पुलिस बल नगर निगम परिसर में पहुंचा। स्थिति को देखते हुए परिसर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई। पुलिसकर्मियों की तैनाती के बाद नगर निगम परिसर में आवाजाही को भी नियंत्रित किया गया।
पुलिस स्तर पर वायरल वीडियो और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट करने की प्रक्रिया जारी है कि विवाद की शुरुआत किस मुद्दे से हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
जनसमस्याओं से चुनावी विवाद तक पहुंची बैठक
दरअसल, नगर निगम सदन की बैठक ऐसे समय में हुई, जब कार्यकारिणी की छह रिक्त सीटों के चुनाव को लेकर पहले से राजनीतिक सरगर्मी बनी हुई थी। बैठक से पहले बागी पार्षदों की गतिविधियों और संभावित मतदान को लेकर भी चर्चा थी। इसके साथ ही टेंडर से जुड़े मुद्दे को भी बैठक में उठाए जाने की संभावना जताई गई थी।
ऐसे में सदन के भीतर सड़क, नगर निगम की समितियों और स्थानीय समस्याओं से जुड़े मुद्दों के साथ कार्यकारिणी चुनाव का राजनीतिक पक्ष भी महत्वपूर्ण हो गया। हालांकि, बैठक का उद्देश्य नगर निगम की कार्यकारिणी के रिक्त पदों पर चुनाव कराना था।

