आईसीएआर-सीआईआरबी में स्वच्छता संवाद, सफाई और कचरा प्रबंधन को लेकर जनभागीदारी पर जोर
Digital UP News Desk
हिसार। स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण के निर्माण के लिए केवल नियमित सफाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-सीआईआरबी), हिसार में स्वच्छता ही सेवा 2026 अभियान के तहत स्वच्छता संवाद का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 24 सितंबर 2026 को “स्वच्छता में सहभाग – स्वच्छ भारत, विकसित भारत” विषय के अंतर्गत आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संविदात्मक कर्मचारियों और युवा पेशेवरों (वाईपी) के बीच स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ाना, जिम्मेदार व्यवहार को प्रोत्साहित करना तथा संस्थान और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था। आठवें दिन की कार्ययोजना के तहत आयोजित इस स्वच्छता संवाद में करीब 20 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
संवाद के जरिए स्वच्छता को लेकर बढ़ाई गई जागरूकता
आमतौर पर जागरूकता कार्यक्रमों में जहां वक्ताओं द्वारा जानकारी दी जाती है, वहीं आईसीएआर-सीआईआरबी में आयोजित इस संवाद को अधिक सहभागी और व्यावहारिक बनाया गया। प्रतिभागियों को अपने घर, कार्यस्थल और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता से जुड़े अनुभव साझा करने का अवसर दिया गया। इसके साथ ही उन्होंने दैनिक जीवन में सामने आने वाली समस्याओं और उनके संभावित समाधान पर भी चर्चा की।
इस दौरान प्रतिभागियों ने बताया कि स्वच्छता को प्रभावी बनाने के लिए केवल सफाई कर्मचारियों पर निर्भर रहने के बजाय आम लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर कूड़ा इधर-उधर न फैलाने, कचरे को निर्धारित स्थान पर डालने और प्लास्टिक के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करने जैसे कदम उठाए, तो इसका सकारात्मक प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई दे सकता है।
कचरा प्रबंधन और प्लास्टिक उपयोग पर हुई चर्चा
स्वच्छता संवाद में कचरा प्रबंधन को विशेष महत्व दिया गया। प्रतिभागियों ने कचरे को सही तरीके से अलग-अलग करने और उसके उचित निस्तारण की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। चर्चा में यह बात सामने आई कि गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण प्रारंभिक स्तर पर ही कर दिया जाए तो कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनाई जा सकती है।
इसके अलावा प्लास्टिक के अत्यधिक और अनावश्यक इस्तेमाल को कम करने पर भी जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने अपने दैनिक जीवन में ऐसे विकल्प अपनाने की आवश्यकता बताई, जिनसे प्लास्टिक पर निर्भरता कम हो सके। साथ ही इस्तेमाल किए जाने वाले प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट को खुले स्थानों पर न फेंकने तथा निर्धारित व्यवस्था के अनुसार उसका निस्तारण करने की बात कही गई।
स्वच्छता को सामाजिक जिम्मेदारी बनाने पर जोर
कार्यक्रम के दौरान यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि स्वच्छता केवल किसी एक विभाग, संस्था या कर्मचारी की जिम्मेदारी नहीं है। बल्कि यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ा विषय है। इसलिए स्वच्छता को स्थायी बनाने के लिए व्यवहार में बदलाव और निरंतर जनभागीदारी आवश्यक है।
प्रतिभागियों ने चर्चा के दौरान माना कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर कूड़ा न फैलाना, कचरे को अलग-अलग रखना, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता का ध्यान रखना और प्लास्टिक का विवेकपूर्ण उपयोग करना ऐसे प्रयास हैं, जिनमें किसी बड़े संसाधन की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, इनका सामूहिक प्रभाव काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।
संवाद से सामने आए व्यावहारिक सुझाव
स्वच्छता संवाद के दौरान प्रतिभागियों ने अपने अनुभवों के आधार पर कई व्यावहारिक सुझाव भी साझा किए। इनमें नियमित सफाई के साथ-साथ कचरा फैलाने की प्रवृत्ति को रोकना, कचरे के पृथक्करण को बढ़ावा देना और लोगों को जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति जागरूक करना शामिल रहा।
इसके साथ ही कार्यस्थल और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने कहा कि यदि स्वच्छता संबंधी संदेश केवल अभियान तक सीमित न रहकर रोजमर्रा की आदतों में शामिल हो जाए, तो इसके परिणाम अधिक स्थायी हो सकते हैं।
सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने अपने-अपने कार्यस्थल, घर और आसपास के परिवेश में स्वच्छता, जिम्मेदार कचरा प्रबंधन और टिकाऊ आदतों को बढ़ावा देने की सामूहिक प्रतिबद्धता जताई। इस दौरान “स्वच्छता में सहभाग” की भावना को व्यवहार में उतारने पर विशेष जोर दिया गया।
आईसीएआर-सीआईआरबी में आयोजित यह स्वच्छता संवाद इस दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा कि इसमें स्वच्छता को केवल सफाई अभियान के रूप में नहीं, बल्कि साझी सामाजिक जिम्मेदारी और व्यवहारिक बदलाव के विषय के रूप में समझने पर जोर दिया गया। संवाद और सहभागिता के माध्यम से प्रतिभागियों ने यह संदेश दिया कि स्वच्छ वातावरण के निर्माण में हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है।

