बांदा में तहबाजारी वसूली के विरोध में ट्रक ऑपरेटरों ने डीएम को सौंपा ज्ञापन

Digital UP News Desk

बांदा: उत्तर प्रदेश गिट्टी मोरंग ट्रक ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने नियम विरुद्ध तहबाजारी वसूली किए जाने के आरोप को लेकर बुधवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। एसोसिएशन ने जिला पंचायत की ओर से खनिज तहबाजारी के नाम पर की जा रही कथित वसूली पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि संबंधित आदेश जारी होने के बावजूद कुछ वाहनों और खनिज सामग्री से तहबाजारी शुल्क की वसूली किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक, जिला पंचायत द्वारा खनिज तहबाजारी के नाम पर ऐसी वसूली की जा रही है, जिसे वे नियमों के विपरीत मानते हैं। इसको लेकर ट्रक ऑपरेटरों में नाराजगी है। उन्होंने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर पूरे मामले की जांच कराने और कथित अवैध वसूली को बंद कराने की मांग उठाई है।

आदेश के बावजूद वसूली जारी रहने का आरोप

एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में बताया कि अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत बांदा की ओर से पत्रांक 1344/2026-27 दिनांक 09 सितंबर 2026 के माध्यम से एक आदेश जारी किया गया था। एसोसिएशन के अनुसार, इस आदेश में मध्य प्रदेश से आने वाले वाहनों तथा डम्प में एकत्र खनिज सामग्री से तहबाजारी शुल्क की वसूली नहीं किए जाने की बात कही गई थी।

हालांकि, ट्रक ऑपरेटरों का आरोप है कि उक्त आदेश के बाद भी तहबाजारी शुल्क के नाम पर वसूली की जा रही है। उनका कहना है कि यदि किसी शुल्क की वसूली पर संबंधित विभाग की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी किए जा चुके हैं, तो उसके बाद भी वसूली जारी रहना गंभीर विषय है। इसी कारण एसोसिएशन ने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

जिलाधिकारी से तत्काल कार्रवाई की मांग

ज्ञापन के माध्यम से ट्रक ऑपरेटरों ने जिलाधिकारी से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि नियमों के विपरीत वसूली हो रही है तो उसे तत्काल बंद कराया जाए। साथ ही, एसोसिएशन ने संबंधित आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित कराने की भी मांग रखी है।

ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि गिट्टी और मोरंग के परिवहन से जुड़े वाहन पहले से ही विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं और शुल्क संबंधी प्रावधानों के तहत काम करते हैं। ऐसे में किसी अतिरिक्त या कथित नियम विरुद्ध वसूली से परिवहन कारोबार पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है।

एसोसिएशन ने प्रशासन से यह भी अपेक्षा जताई कि मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। इससे ट्रक ऑपरेटरों के बीच बनी असमंजस की स्थिति भी दूर हो सकेगी।

ज्ञापन देने पहुंचे एसोसिएशन के पदाधिकारी

ज्ञापन सौंपने के दौरान उत्तर प्रदेश गिट्टी मोरंग ट्रक ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के कई पदाधिकारी और ट्रक ऑपरेटर मौजूद रहे। इनमें जिलाध्यक्ष जयसिंह, जिला महामंत्री दिनेश सिंह, प्रमोद, मुकुल सिंह सहित अन्य लोग शामिल रहे।

पदाधिकारियों ने प्रशासन के समक्ष अपनी समस्या रखते हुए कहा कि ट्रक ऑपरेटरों से संबंधित मामलों का नियमानुसार निस्तारण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी शुल्क की वसूली को लेकर कोई भ्रम या विवाद है तो प्रशासनिक स्तर पर इसकी स्पष्ट जानकारी जारी की जानी चाहिए, ताकि वाहन संचालकों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

नियमों के पालन की मांग

ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी विभाग का विरोध करना नहीं, बल्कि निर्धारित नियमों और प्रशासनिक आदेशों का पालन सुनिश्चित कराना है। एसोसिएशन ने मांग की है कि जिला पंचायत और संबंधित अधिकारियों के स्तर पर मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।

इसके अलावा, एसोसिएशन ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि यदि 9 सितंबर 2026 को जारी आदेश में कुछ विशेष परिस्थितियों में तहबाजारी शुल्क नहीं लिए जाने के निर्देश हैं, तो संबंधित अधिकारियों और वसूली करने वाले कर्मचारियों को इसकी जानकारी स्पष्ट रूप से दी जाए। इससे आगे विवाद की स्थिति बनने से रोकी जा सकती है।

प्रशासन के रुख पर नजर

फिलहाल ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने ज्ञापन के जरिए अपनी शिकायत और मांग जिलाधिकारी के समक्ष रखी है। अब मामले में प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर ट्रक ऑपरेटरों की नजर बनी हुई है।

वहीं, एसोसिएशन की ओर से लगाए गए वसूली संबंधी आरोपों पर संबंधित विभाग का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी। ट्रक ऑपरेटरों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन उनके ज्ञापन पर संज्ञान लेते हुए मामले की जांच कराएगा और नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई करेगा।

इस पूरे मामले में एसोसिएशन की मुख्य मांग यही है कि जिस वसूली को वह नियम विरुद्ध बता रही है, उसे तत्काल रोका जाए और संबंधित आदेश का प्रभावी तरीके से पालन कराया जाए। साथ ही, खनिज परिवहन से जुड़े वाहन संचालकों को शुल्क और नियमों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध कराए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की शिकायतों की स्थिति न बने।