मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का मेरठ-वाराणसी दौरा स्थगित, कार्यक्रम पर खर्च को लेकर भी चर्चा
Digital UP News Desk
मेरठ/लखनऊ। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का उत्तर प्रदेश के मेरठ और वाराणसी में प्रस्तावित संवाद कार्यक्रम फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। मेरठ में 25 सितंबर को युवाओं, बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े प्रतिभागियों के साथ संवाद होना था। वहीं वाराणसी में भी युवाओं के साथ संवाद का कार्यक्रम प्रस्तावित था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक दोनों कार्यक्रमों की नई तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े लोगों के साथ सीधे संवाद के माध्यम से मतदाता जागरूकता, निर्वाचन प्रक्रिया तथा डिजिटल मतदाता सेवाओं की जानकारी साझा करना था। मेरठ में प्रस्तावित कार्यक्रम को निर्वाचक साक्षरता क्लब (ELC 2.0) और ECI-Net से भी जोड़ा गया था। इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों और शिक्षकों की भागीदारी प्रस्तावित थी।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद चर्चा तेज
कार्यक्रम स्थगित होने का घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सार्वजनिक बहस चल रही है। द इंडियन एक्सप्रेस ने निर्वाचन आयोग के भीतर मतभेदों और SIR से जुड़े मुद्दों पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त के प्रस्तावित युवा संवाद कार्यक्रमों के स्थगन की खबर सामने आई।
हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि कार्यक्रम केवल किसी एक मीडिया रिपोर्ट के कारण ही रद्द या स्थगित हुआ। अमर उजाला की रिपोर्ट में भी उल्लेख है कि निर्वाचन आयोग की ओर से कार्यक्रम स्थगित करने का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में आयोग के भीतर मतभेद और SIR को लेकर जारी विवाद को कार्यक्रम स्थगित होने की पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा गया है। वहीं अन्य रिपोर्टों में संभावित विरोध और सुरक्षा संबंधी इनपुट का भी उल्लेख किया गया है। इन कारणों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
मेरठ कार्यक्रम की तैयारियों पर खर्च का मुद्दा
मुख्य चुनाव आयुक्त के मेरठ कार्यक्रम को लेकर सबसे अधिक चर्चा इसकी तैयारियों पर प्रस्तावित खर्च को लेकर हो रही है। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार कार्यक्रम के लिए डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च किए जाने की योजना थी। इनमें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम और मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में आयोजन संबंधी विभिन्न व्यवस्थाएं शामिल थीं।
बताया गया है कि दोनों स्थानों पर टेंटेज, ब्रांडिंग, ऑडियो-विजुअल व्यवस्था, फर्निशिंग, लाइटिंग और जनरेटर जैसी व्यवस्थाओं के लिए करीब 114.75 लाख रुपये का प्रावधान किया गया था। इसके अलावा दोनों स्थानों पर कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के भोजन के लिए करीब 39.04 लाख रुपये खर्च होने की बात सामने आई है।
इस तरह इन दोनों मदों को जोड़ने पर प्रस्तावित राशि करीब 153.79 लाख रुपये, यानी लगभग 1.54 करोड़ रुपये बैठती है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आंकड़े कार्यक्रम की तैयारियों से संबंधित उपलब्ध रिपोर्टों में बताए गए प्रस्तावित खर्च हैं। कार्यक्रम स्थगित होने के बाद वास्तव में कितना भुगतान हुआ या कितना खर्च बचा, इसकी आधिकारिक जानकारी अलग से सामने आना बाकी है।
युवाओं से संवाद का था कार्यक्रम
मेरठ में प्रस्तावित आयोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा युवा मतदाताओं से संवाद था। चुनाव आयोग की ओर से पिछले दिनों भी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में मतदाता जागरूकता कार्यक्रमों पर जोर दिया गया है। इसी क्रम में ELC 2.0 और ECI-Net के माध्यम से विद्यार्थियों को निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ने की योजना बनाई गई थी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इससे पहले भी बूथ लेवल अधिकारियों और युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रमों में भाग ले चुके हैं। अगस्त में लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने BLO को भारतीय लोकतंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी बताया था।
मेरठ के कार्यक्रम में भी BLO और युवाओं के साथ प्रत्यक्ष संवाद प्रस्तावित था। इसके माध्यम से मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची, निर्वाचन प्रक्रिया और डिजिटल सेवाओं से संबंधित विषयों पर चर्चा किए जाने की योजना थी।
वाराणसी का कार्यक्रम भी टला
मेरठ के साथ वाराणसी में प्रस्तावित कार्यक्रम भी फिलहाल स्थगित हो गया है। रिपोर्टों के मुताबिक वाराणसी में 28 सितंबर को युवाओं के साथ संवाद प्रस्तावित था। दोनों कार्यक्रमों के स्थगित होने के बाद अब नई तारीख का इंतजार है।
गौरतलब है कि अगस्त में जारी कार्यक्रम संबंधी जानकारी में मेरठ और वाराणसी में युवाओं के साथ संवाद की योजना पहले से बताई गई थी। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में मतदाता जागरूकता गतिविधियों को बढ़ावा देना था
खर्च और आयोजन को लेकर उठे सवाल
कार्यक्रम स्थगित होने के बाद सबसे बड़ा सवाल प्रस्तावित खर्च को लेकर है। करीब 1.54 करोड़ रुपये की बताई जा रही व्यवस्था में सबसे बड़ी राशि टेंटेज, ब्रांडिंग, तकनीकी और अन्य आयोजन संबंधी व्यवस्थाओं के लिए प्रस्तावित थी। इसके बाद भोजन पर करीब 39.04 लाख रुपये खर्च होने की बात सामने आई है।
ऐसे में कार्यक्रम के स्थगित होने के बाद यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि तैयारियों के लिए कितनी राशि वास्तव में खर्च हुई, कितने कार्यों के भुगतान हुए और किन मदों में भुगतान रोका गया। इन सवालों पर संबंधित विभाग या निर्वाचन अधिकारियों की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का मेरठ और वाराणसी में प्रस्तावित युवा संवाद कार्यक्रम आगे के लिए टाल दिया गया है। नई तारीख और स्थगन के आधिकारिक कारण की जानकारी आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट होगी।

