भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह 2026: सामुदायिक भागीदारी से जल सुरक्षा की नई दिशा
रिपोर्ट- अमित सिंह यादव
नई दिल्ली। जल सुरक्षा केवल बड़े बांधों, नहरों या जलापूर्ति योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी मजबूत नींव स्थानीय स्तर पर पानी के संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और सामुदायिक भागीदारी से तैयार होती है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह (IIWW) 2026 का आयोजन नई दिल्ली में किया जा रहा है। 22 से 26 सितंबर तक आयोजित हो रहे इस नौवें संस्करण में जलवायु के अनुकूल जल प्रबंधन और जमीनी स्तर पर जल सुरक्षा को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।
इस वर्ष भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह की थीम ‘जलवायु के अनुकूल जल प्रबंधन’ रखी गई है। जल शक्ति मंत्रालय की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में नीति-निर्माता, शोधकर्ता, उद्योग जगत, जल विशेषज्ञ और समुदायों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। लगभग 150 देशों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है, जबकि 11 देशों के साझेदार देश के रूप में शामिल होने की उम्मीद है।
सात प्रमुख विषयों पर केंद्रित चर्चा
भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह 2026 में जल प्रबंधन से जुड़े सात प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। इनमें समावेशी और न्यायपूर्ण जल प्रशासन, जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए सहयोग, जल सुरक्षा के लिए तकनीक और समुदाय, जलवायु जोखिमों के संदर्भ में जल, जल बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के लिए वित्तपोषण, सतत जल संसाधन प्रबंधन तथा लोगों और धरती के लिए जल शामिल हैं।
इसके अलावा, कार्यक्रम में मंत्रियों के पूर्ण सत्र, युवा मंच और स्टार्टअप से जुड़े विशेष मंच भी आयोजित किए जा रहे हैं। जल क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर कुल 49 विशेष सत्र प्रस्तावित हैं। इस आयोजन में छह केंद्रीय मंत्रालयों तथा 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।
जल संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी पर जोर
पिछले वर्षों में जल संरक्षण को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई पहल की गई हैं। इनमें जल शक्ति अभियान, कैच द रेन, अटल भूजल योजना, मिशन अमृत सरोवर और जल संचय जन भागीदारी जैसी पहल शामिल हैं। वहीं, NAQUIM 2.0 के माध्यम से क्षेत्र आधारित भूजल प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
इन प्रयासों के बीच भूजल पुनर्भरण से जुड़े आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार देश में कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 2017 में 432 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) था, जो 2025 में बढ़कर 448.52 BCM हो गया।
छत्तीसगढ़ के बालोद में बने 2.84 लाख पुनर्भरण ढांचे
जल संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका का उदाहरण छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में देखने को मिलता है। यहां ग्राम पंचायतों और स्थानीय लोगों ने मिलकर वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण के लिए विभिन्न संरचनाएं तैयार की हैं।
जल संचय जन भागीदारी 2.0 के तहत जून 2025 से मई 2026 के बीच जिले में करीब 2.84 लाख पुनर्भरण संबंधी ढांचे बनाए गए। इनमें चेक डैम, रिचार्ज पिट और कंटूर ट्रेंच शामिल हैं।
इसके साथ ही 14.3 किलोमीटर लंबे मौसमी जलमार्ग तवेरा नाला के पुनरुद्धार पर भी काम किया गया। इसके किनारे 6,250 से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गई हैं। इन प्रयासों से करीब 6.5 करोड़ लीटर अतिरिक्त वर्षा जल के संरक्षण और भूजल स्तर में अनुमानित 5 से 10 फीट तक सुधार की उम्मीद जताई गई है।
त्रिपुरा में महिलाओं ने संभाली जल प्रबंधन की जिम्मेदारी
त्रिपुरा के खोवाई जिले में ग्रामीण जलापूर्ति और जल संरक्षण को मजबूत करने के लिए पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, स्कूलों और अन्य स्थानीय संस्थाओं को जोड़ा गया है। यहां 6,000 से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं समुदाय को जल प्रबंधन के लिए जागरूक करने में भूमिका निभा रही हैं।
स्कूल वाटर क्लब के माध्यम से महिलाओं द्वारा विद्यार्थियों को फील्ड टेस्टिंग किट की मदद से पानी की गुणवत्ता की बुनियादी जांच का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं, जियो-टैग आधारित निगरानी, तीसरे पक्ष से गुणवत्ता जांच और नियमित बैठकों के जरिए ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की निगरानी मजबूत की गई है।
इसके अलावा, जिले के सभी 860 आंगनवाड़ी केंद्रों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था मौजूद है। जल स्रोतों की स्थिरता के लिए कैचमेंट क्षेत्र संरक्षण, वृक्षारोपण, भूजल पुनर्भरण और ग्रे-वॉटर प्रबंधन जैसे उपाय भी अपनाए जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में नदियों के पुनरुद्धार से जल सुरक्षा को बढ़ावा
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर क्षेत्र में जल जीवन मिशन को जल संरक्षण और नदियों के पुनरुद्धार से जोड़ने का प्रयास किया गया है। ‘धारा से धरोहर तक’ अभियान के तहत बान नदी को लगभग 42 किलोमीटर और सोट नदी को करीब 17 किलोमीटर तक पुनर्जीवित किया गया। इन प्रयासों को पड़ोसी जिलों की नदियों तक भी विस्तार दिया गया है।
साथ ही, ग्राम सभा की निगरानी, ‘पानी की पाठशाला’, महिलाओं की भागीदारी से पानी की गुणवत्ता जांच और ‘जल सेवा आकलन’ जैसे प्रयासों के जरिए समुदाय को जल संसाधनों की सुरक्षा में सक्रिय भूमिका देने पर जोर दिया गया है।
ओडिशा में विद्यार्थियों को सिखाया जा रहा जल संरक्षण
ओडिशा में कैच द रेन 2026 अभियान के जरिए विद्यार्थियों को भूजल, जल चक्र और वर्षा जल संचयन के बारे में जागरूक किया जा रहा है। राज्य में नुक्कड़ नाटक, लोक प्रदर्शन और सामुदायिक कार्यक्रमों के जरिए 968 IEC गतिविधियां आयोजित की गई हैं।
इसके अलावा, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण के लिए राज्य में 905 संरचनाएं बनाई गई हैं। इनमें 849 वर्षा जल संचयन प्रणालियां और 56 रिचार्ज शाफ्ट शामिल हैं। जाजपुर में 45 रिचार्ज शाफ्ट बनाए गए हैं, जबकि राज्य के सभी 30 जिलों में 98 टैंकों की मरम्मत और डी-सिल्टिंग का काम भी शुरू किया गया है।
स्थानीय प्रयासों से वैश्विक मंच तक पहुंची जल सुरक्षा की चर्चा
दरअसल, भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह 2026 यह संदेश सामने रखता है कि जल सुरक्षा के लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए समुदाय, स्थानीय संस्थाओं, वैज्ञानिकों, तकनीक और प्रशासन के बीच निरंतर समन्वय जरूरी है।

